सहजयोग द्वारा श्री गणेश तत्व की सुगंध (पवित्रता, अबोधिता विवेक व सुबुद्धि) का सहज अनुभव संभव है
प्रथम पूज्य श्री गणेश, हमारे जीवन में विवेक, बुद्धि, ज्ञान व शुभ-लाभ का प्रतिनिधित्व करते हैं। विवेक व बुद्धि ही वे तत्व हैं जो मनुष्य को सभी जीवों से श्रेष्ठ बनाते हैं।

मालवा हेराल्ड |किसी भी देवता की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम उनके गुणों की स्थापना जीवन में आवश्यक है।
सहजयोग द्वारा हम अपने अंदर विराजित श्री गणेश तत्व को, आत्मसाक्षात्कार की प्राप्ति द्वारा कुंडलिनी जागरण व ध्यान पद्धति से, जागृत कर सकते हैं। हमारे सूक्ष्म तंत्र में रीढ़ की हड्डी का अंतिम सिरा, जो (भूमि पर बैठते हैं तब जो शरीर का भाग) पृथ्वीमाता से स्पर्श हो रहा है, वहां स्थित चक्र को मूलाधार चक्र कहते हैं। इसी चक्र द्वारा श्री गणेश जी हमारे भीतर अबोधिता, पवित्रता व विवेक की जागृति करते हैं। सहजयोग में श्री माता जी निर्मला देवी की कृपा से हमारी निर्विचार चेतना से हमारे अंदर पवित्रता का विकास होता है।
परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने श्री गणेश तत्व की व्याख्या अपनी अमृतवाणी करते हुए कहा है, कि अपने मे जो कुछ गंदगी( अपवित्रता, नीति विरोधी तत्व) दिखाई देती है वह इस गणेश तत्व के कारण दूर हो जाती है अब इस श्री गणेश तत्व से पहले श्री गौरी कुंडलिनी का पूजन करना पड़ता है जब आप की कुंडलिनी का जागरण होता है तब श्री गणेश तत्व की सुगंध सारे शरीर में फैलती है कुंडलिनी का जागरण जब होता है उस समय खुशबू आती है अनेक प्रकार की सुगंध आती है इसका मतलब है कि जिन लोगों को सुगंध प्रिय नहीं है जिनको सुगंध अच्छी नहीं लगती है उनमें भयंकर दोष है क्योंकि सुगंध पृथ्वी तत्व का एक महान तत्व है तो श्री गणेश का पूजन करते समय प्रथम हमें अपने आप को सुगंधित करना चाहिए...ऊपर से उसने खुशबू लगाई होगी तो वह मनुष्य सुगंधित नहीं है सुगंध ऐसी होना चाहिए की मनुष्य आकर्षक लगे किसी मनुष्य के पास जाकर खड़े होने पर अगर प्रसन्नता, पवित्रता आने लगे तो वह मनुष्य सच में सुगंधित है l
मूलाधार चक्र व श्री गणेश तत्व पर उपरोक्त दी गई संक्षिप्त जानकारी का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।