top of page

बॉलीवुड मूवी रिव्यु - ड्रीम गर्ल 2

मुंबई| फ़िल्म ड्रीम गर्ल 2 फिल्म क्रिकेट के पावरप्ले की तरह शुरू होती है और बीस मिनट में कहानी का वो हिस्सा समेट देती है जो हमने ट्रेलर में देखा हुआ है। फिल्म की शुरुआत में अन्नू कपूर माइक पर एक प्रोग्राम का संचालन करते हुए फिल्म के दर्शको को ताली बजाने के लिए कहते है, और लोग थियेटर में बजाने भी लगे, इतनी तेजी से आप फिल्म और कैरेक्टर से कनेक्ट हो जाते हैं।

फिल्म को लिखते वक्त बहुत क्रिस्प रखा गया है, इसी वजह से फिल्म बहुत जल्दी अपने मेन प्लॉट पर आ जाती है। पंचेज भारी भारी है, जो एक्टर की अच्छी परफॉर्मेंस की वजह से सटीक बैठते है। इस फिल्म में एक्टिंग का वो लेवल है की आप अनन्या पांडे की परफॉर्मेंस से चकित रह जायेंगे, बाकी तो फिल्म में है ही एक से बढ़कर एक एक्टर।


अपनी पिछली फिल्म्स की तरह राज शांडिल्य इस फिल्म से कई स्टीरियोटाइप तोड़ने की कोशिश में है। फिल्म की कहानी में एक मुस्लिम फैमिली है जो हिंदी सिनेमा के रेडिमेड मुस्लिमो की तरह गले में ताबीज पहने हाथ में तस्बीह लिए हुए नही घूम रहे। सिंपल सी मुस्लिम फैमिली है, जैसी मुस्लिम फैमिलीज होती है असल में। हिंदी सिनेमा के जो बने बनाए स्टीरियोटाइप है उसकी मदद से आप बहुत आसानी से दर्शको को हंसा सकते है, इसलिए इतने सालो से सब कुछ जानने समझने के बावजूद कई राइटर डायरेक्टर स्टीरियोटाइप से खुद को अलग नही कर पाते है। जो लोग लिखते है, वो लोग अगर फिल्म देखेंगे तो उन्हे समझ आयेगा कि फिल्म में कई ऐसी सिचुएशन है जहा पर राइटर ने उस सिचुएशन को सिर्फ इसलिए यूज नही किया क्युकी वहा से फिल्म सेक्सिस्ट हो जाती। जिस इंडस्ट्री में लोग कमाने के लिए कुछ भी लिखते हो, वहीं इस फिल्म के डायरेक्टर का यू हिम्मत दिखाना शायद हिंदी सिनेमा में स्टीरियोटाइप पर ब्रेक लगाएगा।


फिल्म जिस सीन में जिस इमोशन को पकड़ती है सही से पकड़ती है। इमोशनल सीन में ज्यादा लंबे डायलॉग के बजाय छोटे छोटे डायलॉग में बड़ी बात कही गई है। एक सीन में आयुष्मान खुराना का किरदार अपने दोस्त के साथ बाप के बारे में बात करता है, और जो डायलॉग है उसमे, "मां बच्चे को नौ महीना पेट में रखती है, बाप बच्चे को जिंदगी भर जहन में रखता है।" जैसे डायलॉग एक लाइन में अपनी बात समेट लेते है। फिल्म में किसी भी किरदार को जगह भरने के लिए नही रखा गया है, हर किरदार की अपनी अहमियत है। टाइगर पांडे के घर वालो को , उसके घर को भी पूरी डिटेलिंग के साथ दिखाया गया है जबकि बहुत छोटा किरदार है वो फिल्म का। ओवराल ये एक पैसा वसूल और एंट्रटेनर है,जिसे बहुत मेहनत और ईमानदारी से बनाया गया है। ये फिल्म समय बीतने के बाद और ज्यादा समझ में आयेगी जब आम दर्शक समझेगा कि फिल्म कॉमेडी की आड़ में बहुत जरूरी और सीरियस मामलो को ईमानदारी और जिम्मेदारी से हमारे सामने रखती है बिना हमारे मनोरंजन से एक पैसे का समझौता किए हुए। नब्बे के दशक में डेविड धवन,गोविंदा और कादर खान जिस तरह एक दूसरे के साथ मिलकर अपना बेस्ट देते थे, वही काम आने वाले सालो में हो सकता है राज शांडिल्य,आयुष्मान खुराना और अन्नू कपूर की तिकड़ी करेगी।

 FOLLOW US

  • Facebook
  • Instagram
  • LinkedIn
  • Pinterest
  • Twitter
  • YouTube
bottom of page