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खून की उल्टी होने पर युवराज ने कहा - मैं मर भी जाऊं तो भी वर्ल्ड कप भारत ही जीते

मुंबई| 2011 ODI वर्ल्ड कप के दौरान खून की उल्टी होने पर युवी ने कहा था, मैं मर भी जाऊं तो भी वर्ल्ड कप भारत ही जीते। जिस युवराज सिंह के दम पर टीम इंडिया ने 28 साल बाद विश्व कप का खिताब जीता था, वह लीग मैच के दौरान ही कैंसर से जूझ रहे थे। फिर भी युवराज सिंह ने पूरा टूर्नामेंट खेला था और भारत को चैंपियन बनाया था। तारीख थी 20 मार्च 2011 और जगह एम ए चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत की शुरुआत खराब रही। सचिन तेंदुलकर पहले ही ओवर में 2 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। गौतम गंभीर भी 26 गेंद पर 22 रन ही बना सके। भारत का स्कोर 8.3 ओवर में 2 विकेट के नुकसान पर 51 रन हो गया। युवराज सिंह टूर्नामेंट में छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरते थे, लेकिन जब वीरू चोट के कारण बाहर हुए तब युवी ने चौथे नंबर पर बैटिंग करने का निर्णय लिया। युवराज ने विराट कोहली के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 122 रनों की शतकीय साझेदारी निभाई। युवराज सिंह उस मैच में अलग ही अंदाज में बल्लेबाजी कर रहे थे। कोई भी गेंदबाज चाहकर भी उन पर अपना असर नहीं छोड़ पा रहा था।


विराट 5 चौकों की मदद से 59 रन बनाकर रवि रामपाल का शिकार बन गए, लेकिन युवराज खड़े रहे। जैसे-जैसे युवराज सेंचुरी के करीब पहुंच रहे थे, उन्हें खून की उल्टियां होने लगीं। किसी भी खिलाड़ी के लिए यह दृश्य बेहद डरावना होता है। भारतीय टीम के करोड़ों फैंस भी यह देखकर सन्न रह गए थे। जब युवराज को खून की उल्टी हुई, तब उन्हें लगा कि चेन्नई की गर्मी की वजह से ऐसा हो रहा है। एक इंटरव्यू में युवराज ने बताया कि उस मैच के दौरान उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की थी, जो भी हो, अगर मैं मर भी जाऊं तो भी वर्ल्ड कप भारत ही जीते। यह काम एक सच्चा देशभक्त ही कर सकता है। युवराज ने उस मुकाबले में 10 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 113 रनों की अविस्मरणीय पारी खेली थी। भारतीय टीम ने 49.1 ओवर में 268 रन बनाए और जवाब में वेस्टइंडीज 43 ओवर में 188 रन ही बना सकी। युवी ने गेंदबाजी में भी 4 ओवर में 18 रन देकर 2 विकेट चटकाए। टीम इंडिया ने 80 रन से मैच जीत लिया। खून की उल्टियां करने के बाद युवराज चाहते तो दूसरी पारी में गेंदबाजी के लिए नहीं आते, पर युवी को एहसास था कि वह टीम के सबसे बड़े ऑलराउंडर हैं और ऐसे में उनकी भूमिका अहम है।


युवराज सिंह कैंसर से जूझ रहे थे, लेकिन तब उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। युवी ने कहा कि अगर मुझे पता चल भी जाता, तब भी मैं वर्ल्ड कप जीते बगैर कहीं नहीं जाता। युवराज ने 2011 विश्व कप में 4 अर्धशतक और 1 शतक के दम पर 362 रन बनाए। इसके अलावा युवी ने गेंदबाजी करते हुए 15 विकेट भी चटकाए। युवराज को उनके प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। दुखद ये रहा कि जिस खिलाड़ी ने देश की खातिर अपनी जान की परवाह नहीं की, उन्हें जबरन संन्यास के लिए मजबूर किया गया था। साल 2017 में युवराज सिंह ने इंग्लैंड के खिलाफ कटक वनडे में 127 गेंद पर 150 रनों की पारी खेली थी। इसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी,2017 में भी युवराज का बल्ला बोला था। उन्होंने चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के खिलाफ 32 गेंद पर 53 रन बनाकर टीम इंडिया को जीत दिलाई थी। चैंपियंस ट्रॉफी के बाद खेले गए 8 वनडे मुकाबलों में से 2 में युवराज मैन ऑफ द मैच थे। इस बीच युवी चोटिल हुए और चयनकर्ताओं ने उन्हें यो-यो टेस्ट पास करने के लिए कहा। उन्हें लगा कि 36 साल की उम्र में युवराज सिंह के लिए ऐसा करना नामुमकिन होगा।


युवराज सिंह ने जान लड़ा दी और यो-यो टेस्ट पास कर लिया। वह टीम इंडिया के लिए 2019 ODI वर्ल्ड कप खेलना चाहते थे। चयनकर्ताओं को उम्मीद नहीं थी कि युवराज यो-यो टेस्ट पास कर पाएंगे। ऐसे में युवी से कहा गया कि अब जाओ और घरेलू टूर्नामेंट खेलो। युवराज सिंह अपने साथ किया जा रहे इस बर्ताव से बेहद दुखी हुए थे और उन्होंने संन्यास का ऐलान कर दिया था। संन्यास के बाद एक इंटरव्यू में युवी ने कहा था कि कभी नहीं बताया गया कि मुझे बाहर कर दिया जाएगा। जिस तरीके से ऐसा किया गया, उससे मुझे दुख पहुंचा। जो खिलाड़ी 15-17 क्रिकेट खेला है, उसे आपको बैठ कर बताना चाहिए। वीरेंद्र सहवाग और जहीर खान को भी नहीं बताया गया। कोई भी खिलाड़ी हो, उन्हें सब सच बता देना चाहिए। भारतीय क्रिकेट में ऐसा ही होता है। ये हमेशा से होता आ रहा है। युवराज ने 304 वनडे में 8701 और 58 टी-20 में 1177 रन बनाए। 2007 T-20 वर्ल्ड कप और 2011 ODI वर्ल्ड कप जीत में युवी की सबसे अहम भूमिका रही।

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