top of page

पाकिस्तान के हाथ से फिसल रहा बलूचिस्तान, महिलाएं बन रहीं फिदाइन, पीछे हट रहे सुरक्षाबल

बलूचिस्तान में धधकती आग ने एक बार फिर पाकिस्तान की नीति, नीयत और नैतिकता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हम आपको बता दें कि दक्षिण पश्चिम के इस विशाल और संसाधन समृद्ध प्रांत में पिछले दिनों समन्वित हमलों की ऐसी कड़ी चली कि कई जनपदों में घंटों तक गोलियां, विस्फोट और घेराबंदी की गूंज सुनाई देती रही। बलूच मुक्ति सेना ने इसे अपने नायक नामक अभियान का दूसरा चरण बताया और कहा कि उसके दलों ने खरान, मस्तुंग, तुंप और पसनी जैसे इलाकों में कार्यवाही पूरी की, जबकि कुछ स्थानों पर गतिविधि जारी है। संगठन के प्रवक्ता जीयंद बलूच के अनुसार उनके साथी क्वेटा और नोश्की के हिस्सों तक पहुंचे और वहां पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।


बलूच संगठन ने दावा किया कि सेना, पुलिस और सीमांत बल के दो सौ से अधिक कर्मी मारे गए और सत्रह को पकड़ा गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रांत के मुखिया सरफराज बुगती ने कहा कि हमलों में 31 नागरिक और 17 सुरक्षाकर्मी मारे गए। दूसरी ओर सैन्य पक्ष का कहना है कि जवाबी कार्यवाही में 145 से अधिक हमलावर ढेर किए गए। अलग अलग दिनों में मारे गए लोगों की संख्या पर भी अलग अलग बयान आए। साफ है कि सच आंकड़ों की धुंध में छिपा है, पर खून की सच्चाई जमीन पर बिखरी पड़ी है।


इन हमलों की एक चौंकाने वाली कड़ी महिलाओं की भागीदारी रही। संगठन ने माना कि उसके 18 साथी मारे गए जिनमें 11 फिदाइन मजीद दल के, 4 फतह दल के और 3 एक अन्य इकाई के थे। उन्हीं में आसिफा मेंगल का नाम भी सामने आया जिसने नोश्की में गुप्तचर मुख्यालय को निशाना बनाने के लिए वाहन में रखे विस्फोटक का उपयोग किया। संगठन के अनुसार उसने पिछले वर्ष दल ज्वाइन किया और इस वर्ष फिदाइन बनने का निर्णय लिया। एक अन्य फिदाइन हवा बलूच का संदेश भी जारी किया गया जिसे उसकी अंतिम घड़ियों से पहले भेजा गया बताया गया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने भी माना कि कम से कम दो हमलों में महिलाओं ने भूमिका निभाई।

 FOLLOW US

  • Facebook
  • Instagram
  • LinkedIn
  • Pinterest
  • Twitter
  • YouTube
bottom of page