
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मेरठ में मेट्रो और दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम शताब्दी नगर नमो भारत स्टेशन से शुरू हुआ, जहां पीएम ने नमो भारत ट्रेन और मेरठ मेट्रो को हरी झंडी दिखाई। इसके बाद उन्होंने मेरठ साउथ स्टेशन तक मेट्रो की सवारी की और छात्रों से बातचीत की।
नमो भारत कॉरिडोर की कुल लंबाई 82 किलोमीटर है, जिसमें दिल्ली से मेरठ तक का सफर अब 50-59 मिनट में पूरा होगा। मेरठ मेट्रो 13 स्टेशनों वाली है, जो मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक 30 मिनट में चलेगी और 700 से अधिक यात्रियों की क्षमता रखती है। इस उद्घाटन के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 12,930-30,274 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित की।
मेरठ मेट्रो शुरू होने से दिल्ली से मेरठ की दूरी अब लगभग 60 मिनट में तय की जा सकेगी। यह भारत की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) परियोजना है। यह परियोजना नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन द्वारा बनाई गई है। नमो भारत ट्रेनें लगभग 160 किमी/घंटा की अधिकतम गति से चल सकती हैं। मेरठ शहर के भीतर मेरठ मेट्रो के लिए अलग मेट्रो सेवाएं भी शुरू की गई हैं। शहर के अंदर कई स्टेशनों पर भूमिगत (अंडरग्राउंड) और एलिवेटेड दोनों तरह के ट्रैक बनाए गए हैं। इससे मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली के बीच रोजाना आने-जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
इस कॉरिडोर की सबसे खास बात यह है कि इसी ट्रैक पर नमो भारत (रीजनल ट्रेन) और मेरठ मेट्रो दोनों चलेंगी। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला ऐसा सिस्टम है जहाँ एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग लंबी दूरी और स्थानीय मेट्रो के लिए किया जा रहा है। मेरठ के भीतर यात्रियों के लिए यह सेवा बहुत राहत भरी होगी, जिससे शहर के मुख्य हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी काफी सुधर जाएगी।
कॉरिडोर के लाभ
प्रदूषण में कमी: सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम होने से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में गिरावट आने की उम्मीद है।
आर्थिक विकास: गाजियाबाद, मुरादनगर, मोदीनगर और मेरठ जैसे इलाकों में रियल एस्टेट और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
सुविधाएं: ट्रेनों में वाई-फाई, सीसीटीवी, एर्गोनोमिक सीटें और सामान रखने के लिए पर्याप्त जगह जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।