
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें इजराइल, रूस और पूरी दुनिया की नजरें टिक गई हैं। और इसी बीच एक ऐसा बड़ा घटनाक्रम सामने आया जिसने इस पूरे संकट को नया मोड़ दे दिया। इस वक्त की सबसे बड़ी खबर यह है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया। पुतिन ने पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन ने तन्याहू से फोन पर बातचीत की। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति को कॉल किया। यह सिर्फ दो फोन कॉल नहीं बल्कि मिडिल ईस्ट की राजनीति में एक संभावित गेम चेंजर माने जा रहे हैं। बीते कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त बयानबाजी। दूसरी तरफ ईरान की खुली चेतावनी और बीच में इजराइल जो ईरान को अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है।
रिपोर्ट्स में यहां तक कहा जा रहा है कि अमेरिका किसी भी वक्त ईरान पर सैन्य कारवाई कर सकता है। इसी आशंका ने पूरी दुनिया को अलर्ट मोड पर ला दिया। सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति को फोन करने से पहले इजराइल के पीएम नेतन्या से क्या बात की? दरअसल क्रेमल के बयान के मुताबिक पुतिन ने पुतिन ने नितन्याहू से ईरान संकट पर विस्तार से चर्चा की। क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर जोर दिया और सबसे अहम बात सैन्य टकराव से बचने की अपील की। यहीं से संकेत मिलते हैं कि रूस सीधे तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की तैयारी में है। रूस ने साफ शब्दों में कहा कि वह ईरान और इजराइल और अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका के बीच संवाद और सुलह की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। पुतिन का मानना है कि अगर इस टकराव ने सैन्य रूप ले लिया तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ेगा।