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महाकाल भस्म आरती

मालवा हेराल्ड | भगवान शिव का पुरे विश्व में एक मात्र महाकालेश्वर ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहा पर सदियों से शिवलिंग की भस्मआरती होती है ऐसा शिव पुराण में उलेख है, कि भगवान शिव के वस्त्र को भस्म रूपी कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि भस्म आरती भगवान शिव को जगाने के लिए की जाती है। यही कारण है कि यह आरती महाकालेश्वर में भोर ४:०० बजे की जाती है। इस आरती में शामिल होने के लिए आप महाकाल मंदिर समिति द्वारा रजिस्ट्रशन किया जाता उसका शुल्क २०० रूपये है उसके उपरांत ही आप भस्मारती में शामिल हो सकते है। शिव पुराण ओर अन्य पुराणों के अनुसार अवंतिका नगरी में राक्षस दूषण का अन्याय लोगो पर बढ़ता जा रहा तब भगवान शिव ने अवंतिका नगरी के लोगो को राक्षस दूषण से मुक्ति दिलाई थी और अवंतिका नगरवासिओ ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी की आप अवंतिका नगरी में ही वास करे तब राक्षस दूषण की चिता की राख से भगवान शिव की स्तुतिः की और भगवान शिव ने दूषण की राख से अपना श्रृंगार किया था और फिर वह हमेशा के लिए यहाँ बस गए।उसके उपरांत नगर वासियो द्वारा शमशान की प्रथम चिता से भगवान महाकाल की  भस्मआरती की जाती है,इस आरती को महानिर्वाणी अखाड़े के महंत ही सम्पन करवाते आये है अभी में महानिर्वाणी अखाड़े के महंत श्री विनीत गिरी जी के द्वारा सम्पन होती है ,अभी के समय में भस्मआरती शिव पुराण अनुसार, भस्मारती की भस्म तैयार करने के लिए कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, शमी, पीपल, पलाश, बैर के पेड़ की लकड़ियां, अमलतास और बड़ को एक साथ जलाया जाता है। इसे जलाते वक्त पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार भी होता हैं। इसके बाद उस भस्म को एक कपड़े से छान लिया जाता है फिर इस भस्म से भगवान महाकाल की भस्मारती होती। इस आरती के पहले भगवान महाकाल का श्रृंगार पुजारियों के द्वारा किया जाता है उस स्वरूप को भस्मरम्या और निरंकार नाम से जाना जाता है | जो अलौकिक रूप में रहता है जो इस स्वरुप में भगवान महाकाल को देखता है वो उनके रूप पर मोहित हो जाता है । पहले ऐसी मान्यता थी की महिलाओ का भस्मारती में प्रवेश वर्जित था पर समय के अनुसार अब महिलाये भी भस्मारती में शामिल हो सकती है और भगवान महाकाल के भस्म स्वरूप का दर्शन कर सकती है ।

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