
उज्जैन। प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में हो सकती है। इसके साथ ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। जानकार कहते हैं कि चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर तय की है। इसके बाद 10 दिन में कभी भी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है। आचार संहिता के दौरान केवल चालू काम ओ सकेंगे। नए काम और योजनाओं की घोषणा नहीं की जा सकेगी।
निर्वाचन प्रक्रिया के जानकारों के अनुसार आगामी 15 अक्टूबर तक विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता प्रभावशील हो जाएगी।ऐसे में सरकार के पास चुनावी घोषणाएं और विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन करने के लिए सिर्फ 2 महीने का वक्त है। आचार संहिता के दौरान अधिकांश सरकारी कामों पर अस्थाई रोक लग जाती है। ये वो काम होते हैं, जिनसे सरकार को फायदा होने का अंदेशा होता है।
गौरतलब है कि जो योजना पहले से लागू है, वह आचार संहिता लागू होने के बाद भी जारी रहेगी। लाड़ली बहना योजना के तहत जो राशि हितग्राही को दी जा रही है, वह तो दी जा सकती है, लेकिन राशि को बढ़ाया नहीं जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो माना जाएगा कि चुनाव को प्रभावित किया जा रहा है।
यदि ऐसा किया भी जाता है तो इसका पहले ब्लू प्रिंट सामने आना चाहिए। सरकार को यह भी बताना होगा कि राशि क्यों बढ़ाई जा रही है? यह पहले क्यों नहीं सोचा गया?
केवल चालू काम होंगे, नई घोषणा और वादे नहीं कर सकेंगे...
निर्वाचन आयोग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आचार संहिता सरकार के चालू कामों को कतई नहीं रोकती है। मतलब ये है कि जो काम चल रहे हैं, जिनका बजट स्वीकृत है, वे सभी निरंतर जारी रहेंगे।
कोई नए काम जो लोकहितकारी हों, उसकी न तो घोषणा होगी और न ही शुरू किए जा जाएंगे। सरकार कोई वादा भी नहीं कर सकती है। इधर मद की कमी से जूझ रहे नगर निगम पार्षदों को इसी बात की चिंता सता रही है कि उन्होंने पूर्व में जो कार्यों के प्रस्ताव लगा रखे हैं। उन्हें जल्द से जल्द मंजूरी मिल जाए। और वह अपने-अपने वार्डों में काम शुरू कर सके। महाकाल लोक के दूसरे चरण के अधूरे कामों को लेकर भी सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों में चिंता बनी हुई है। उनकी मंशा है कि आचार संहिता से पहले यह काम पूरे हो जाए और वह इसका लोकार्पण विधानसभा चुनाव से पहले कर दें, ताकि वे चुनाव के दौरान मतदाताओं के बीच जाकर इसे अपनी उपलब्धि बता सके।