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नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर का फैसला जूना अखाड़े का अखाड़े के पक्ष में

31 May 2023

अपर कलेक्टर, एसडीएम कोर्ट से आया निर्णय - तहसीलदार ने दिलाया विधिवत कब्जा

उज्जैन.दैनिक मालवा हेराल्ड | मामला नीलगंगा स्थित जूना अखाड़े के नीलकंठ महादेव मंदिर से जुड़ा है | मंदिर में साधु संतों का प्रवेश व पूजन अवैध कब्जे वालों को रास नहीं आ रहा है | रहवासियों के लिए सदा खुला है मंदिर परिसर - हरिगिरी महाराज


नीलगंगा स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर जो कि सन् 1960-61 के राजस्व रिकॉर्ड अनुसार श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा की तत्कालीन ब्रह्मलीन महंत पार्वती गिरी होकर उस पर पूजन अर्चन करती रही है। वर्ष 1977 में उनकी मृत्यु के पश्चात भगवान सिंह पिता सांवले सिंह जो कि पार्वती गिरी माई के समय भी मंदिर में साफ सफाई सेवा कार्य करते थे। माता की मृत्यु के बाद वह मंदिर में सेवा कार्य कर रहे थे, वही समय-समय पर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के संत, महंत, थानापति पूजन अर्चन करते आ रहे है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015-16 में न्यायालय अपर कलेक्टर जिला उज्जैन पीठासीन अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा आदेश क्रमांक 02/अ-39/ 2015-16 में आदेश दिनांक 24/3/ 2016 में पारित कर भूमि सर्वे नंबर 1945 /3 का नामांतरण श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा बड़ा हनुमान घाट वाराणसी द्वारा मंत्री श्री महंत हरी गिरी महाराज गुरु दत्तात्रेय के नाम प्रकरण सुनवाई पश्चात आदेश जारी कर उक्त सर्वे क्रमांक श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के स्वामित्व का उल्लेख किया है। वही नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सेवा कार्य करने वाले भगवान सिंह पिता सांवले सिंह ने दिनांक 2 फरवरी 2017 को एक इकरारनामा स्टांप पर लिख कर दिया कि वह काफी वृद्ध व बीमार होने के चलते नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर जो कि जूना अखाड़े की पार्वती गिरी माई के स्वामित्व का है और उन्होंने ही उन्हें साफ सफाई सेवा कार्य के लिए रखा था, वर्तमान में उनकी स्वास्थ्य ठीक नहीं होने से उक्त मंदिर का परिसर जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरी गिरी जी को सौंपना चाहता हूं। वही 2019 में उनकी मृत्यु के बाद जूना अखाड़ा के हरि गिरि महाराज ने एक वाद एसडीएम उज्जैन के न्यायालय में दायर किया। जिसमें प्रकरण क्रमांक 0003 / बी - 121/20- 21 में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व उज्जैन नगर द्वारा आदेश पारित कर श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के संबंध में आदेश पारित किया कि खसरा वर्ष 20- 21 के सर्वे क्रमांक 1945 /3 वा,2 में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा द्वारा मंत्री श्रीमहंत हरिगिरी महाराज भूमि स्वामी सत्व पर दर्ज है और उनके ही द्वारा पूजन अर्चन किया जाता रहा है और करते रहें। उक्त आदेश के पश्चात श्री हरि गिरि महाराज द्वारा तहसीलदार न्यायालय में कब्जा दिलाए जाने का आवेदन प्रस्तुत किया। जिस पर प्रकरण क्रमांक 0001/अ 70/ 20- 23 24 दिनांक 29/5/2023 को तहसीलदार उज्जैन अर्चना गुप्ता द्वारा प्रकरण की सुनवाई पश्चात एवं भगवान सिंह पिता सांवले सिंह के पुत्र श्याम सिंह पिता भगवान सिंह को नोटिस जारी कर मौका निरीक्षण किया गया। जिसमें श्याम सिंह द्वारा उक्त मंदिर की चाबी आदि जूना अखाड़ा के हरि गिरि महाराज को तहसीलदार के समक्ष सौंपी गई। साथ ही तहसीलदार उज्जैन ने अपने आदेश में निर्णय देते हुए आवेदक हरि गिरि महाराज को दिनांक 29/5/ 2023 को विधिवत रूप से कब्जा दिलाया गया। 30 मई गंगा दशहरे के दिन जूना अखाड़ा के नागा साधुओं द्वारा अपने पूज्य देवता को नीलगंगा सरोवर में स्नान के पश्चात नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित किया गया। इस दौरान पूर्व मंत्री और विधायक पारस जैन, महापौर मुकेश टटवाल, क्षेत्रीय पार्षद दुर्गा शक्ति सिंह चौधरी, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज सहित अन्य संत महंतों ने विधिवत रूप से पूजन अर्चन कर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में जूना अखाड़े के देवता को स्थापित किया गया। वर्तमान में जूना अखाड़ा के सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरी महाराज के नेतृत्व में संत महंत नागा, साधु नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में प्रतिदिन पूजन अर्चन आदि का कार्य कर रहे हैं एवं क्षेत्रीय महिलाएं एवं भक्तजन पूजन अर्चन करने आ रहे हैं।

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जो मामला न्यायालय में उससे प्रकरण का कोई संबंध नहीं

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खुद को मंदिर समिति का प्रमुख बताने वाले दिलीपराव गौरकर उर्फ दिल्लू पहलवान ने जिला कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला मीडिया के सामने दिया। वह मामला कस्बा उज्जैन कि भूमि सर्वे क्रमांक 1945/5 का होकर समीप के श्री राम जानकी धाम मंदिर के पीछे स्थित है। जबकि मौजूदा मामला सर्वे क्रमांक 1945/2 व 3 से संबंधित है। ऐसे में उक्त न्यायालय प्रकरण से मामले कोई वास्ता नहीं है। बेवजह मामले को तूल देने का प्रयास किया गया जबकि प्रशासन ने दस्तावेजों के आधार पर ही जूना अखाड़े को मंदिर का कब्जा दिलाया है।

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