
उज्जैन। विक्रम उत्सव अब देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक-धार्मिक आयोजनों में स्थापित हो चुका है और इसकी गूंज उज्जैन से निकलकर पूरे मध्य प्रदेश के देवालयों तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात रविवार देर शाम पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में आयोजित विक्रमोत्सव 2026 के भव्य शुभारंभ समारोह में कही।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने घोषणा की कि विक्रम महोत्सव उत्सव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वरूप ले चुका है और इस वर्ष 21 लाख रुपये के राष्ट्रीय स्तर के सम्मान की शुरुआत भी की जाएगी। इसके साथ ही 1 करोड़ 1 लाख रुपए का अर्न्तराष्ट्रीय विक्रम और 5-5 लाख के तीन राज्य स्तरीय सम्मान स्थापित करने की बात कही।

महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा आयोजित 139 दिवसीय विक्रम उत्सव 2026 का शुभारंभ समारोह पोलिटेक्निक कॉलेज परिसर में धार्मिक उल्लास और भव्यता के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर महाकाल की नगरी उज्जैन में अभूतपूर्व श्रद्धा का वातावरण देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश रामराज्य की अवधारणा की दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसी गति से मध्य प्रदेश भी प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले ही इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में विक्रमादित्य व्यापार मेले का शुभारंभ किया गया है। महाकाल महालोक के निर्माण के बाद देश-विदेश से श्रद्धालुओं का उज्जैन की ओर आकर्षण लगातार बढ़ा है। महाशिवरात्रि पर उमड़ी भीड़ धार्मिक पर्यटन के विस्तार का स्पष्ट प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन की अनादि नगरी अवंतिका की गौरवशाली परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के स्वर्णिम काल की याद दिलाती है। उनके दरबार में महाकवि कालिदास सहित नवरत्नों की उपस्थिति सुशासन और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक रही है। वर्ष 2005 से निरंतर आगे बढ़ रहा विक्रम संवत आधारित यह आयोजन अब भव्य स्वरूप ले चुका है और इस वर्ष का विक्रमोत्सव अब तक का सबसे बड़ा आयोजन बनकर उभरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विक्रमोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि भक्ति, व्यापार और समग्र विकास—तीनों को साथ लेकर चलने का सशक्त मंच है। सरकार द्वारा वैदिक काल गणना और समय परंपरा को पुनर्स्थापित करने के प्रयासों के तहत नई ऑब्जर्वेटरी की स्थापना का भी उल्लेख किया गया।
दीप प्रज्ज्वलन से शुभारंभ, महाकाल वन प्रसादम से स्वागत
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। अतिथियों ने सम्राट विक्रमादित्य तथा बाबा श्री महाकालेश्वर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर विधायक उज्जैन उत्तर अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय (घट्टिया), महापौर मुकेश टटवाल, निगम सभापति कलावती यादव, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती, महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कार्यपरिषद सदस्य राजेश कुशवाह, संजय अग्रवाल, समाजसेवी नरेश शर्मा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विशेष रूप से महाकाल वन प्रसादम भेंट कर किया गया, जिसे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक अनूठा नवाचार बताया गया। इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश देना है। कार्यक्रम के प्रारंभ से पूर्व सामूहिक शंखनाद प्रस्तुति ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। सैकड़ों कलाकारों ने एक साथ शंख और डमरू वादन कर अद्भुत समां बांधा, जिसे दर्शकों ने जोरदार तालियों से सराहा।
नमो नमो शंकरा की आकर्षक प्रस्तुति, भक्तिमय हुई संगीतमय संध्या
विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित संगीतमय संध्या में “नमो नमो शंकरा” की आकर्षक प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया और पूरा परिसर शिवमय हो उठा। कार्यक्रम की शानदार शुरुआत प्रीतम एंड बैंड ने फिल्म ब्रह्मास्त्र के लोकप्रिय गीत “देवा देवा” से की। इसके बाद स्वयं प्रीतम ने “शिवाय में जिया” प्रस्तुत कर माहौल को और ऊर्जावान बना दिया। गायिका मीनल जैन ने “शिव कैलाशों के वासी” गाकर श्रद्धामय वातावरण रचा। मंच पर कलाकारों की टीम—अभिजीत सावंत, शाश्वत सिंह, सेजूती दास, हिमानी कपूर और किंजल चटर्जी—ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने “सत्यम शिवम सुंदरम” से पूरे परिसर में धार्मिक भाव जागृत किया, वहीं इसके बाद “साँसों की माला” की प्रस्तुति ने माहौल को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों ने सभी कलाकारों का सम्मान कर उनका उत्साहवर्धन किया। देर रात तक संगीतमय प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहा और श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए।