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MP News: श्रावण महोत्सव शिवसंभवम की दूसरी प्रस्तुति

उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के महति आयोजन 18 अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव "शिव संभवम" की दूसरी संध्या में पहली प्रस्तुति बनारस की डॉ. मधुमिता भट्टाचार्या के शास्त्रीय गायन की हुई।

डॉ. मधुमिता भट्टाचार्या के शास्त्रीय गायन का प्रारम्भ राग भिन्नसरज विलंबित ख़याल एक ताल में अरज सुन लीजे गजानन, राग भिन्नसरज में द्रुत ख़याल तीन ताल में मंगल कीजे गणराज की प्रस्तुति के बाद राग शंकरा द्रुत ख़याल डमरू डम-डम बाजे की प्रस्तुति दी गई। उसके पश्यात कजरी कहे करलू गुमान गोरी सावन में की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति का समापन शिव भजन शिव-शिव के मन शरण हो से किया। उनके साथ तबला पर ज्ञानस्वरूप मुखर्जी, हारमोनियम पर डॉ. पंकज शर्मा व मंजीरा पर सुश्री शिविका उपाध्याय ने संगत की।


दूसरी प्रस्तुति भोपाल के महेश मलिक के वायलिन वादन की हुई। तबले पर तबला वादक रामेन्द्र सोलंकी, वायलिन पर संगत अमित मलिक ने संगत की।


श्रावण महोत्सव 2023 "शिव संभवम" की दूसरी संध्या की अंतिम प्रस्तुति सूरत की सुश्री जिया जरीवाला के भरतनाट्यम नृत्य की हुई। सुश्री जरीवाला ने प्रस्तुति का प्रारम्भ गणेश वंदना के किया। उसके बाद नवरस, नटनम-आदिनार की प्रस्तुति के उपरांत द्वादश ज्योतिर्लिंग पर भगवान शिव के 12 कर्ण (मुद्राओं) का प्रदर्शन किया गया। प्रस्तुति के समापन में वर्णन एवं जय कान्हा काला नटवर नंदलाल की प्रस्तुति से किया ।



कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि पीर योगी रामनाथ जी महाराज गादीपति भर्तहरि गुफा उज्जैन, महेश पुजारी पूर्व सदस्य महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, आयोजक मंडल व कलाकारों द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान के समक्ष दीप-प्रज्जवलन कर किया गया।


इस दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबन्ध समिति द्वारा संचालित श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के बटुकों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया।


दीपप्रज्वलन के उपरांत गणमान्य अतिथियों का सन्दीप कुमार सोनी अपर कलेक्टर एवं प्रशासक महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, मंदिर प्रबंध समिति सदस्य राजेंद्र शर्मा(गुरू), पुजारी राम शर्मा द्वारा सम्मान किया गया। गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रस्तुति हेतु पधारे कलाकारों का सम्मान किया गया।


संगीत की इस विविधता भरी सुरीली संध्या के साक्षी बनने नगर के कलाप्रेमी दर्शक व कलाकार भी आये। २२ जुलाई शनिवार को श्रावण महोत्सव की तीसरी संध्या में उज्जैन के पं.श्री सुधाकर देवले के शास्त्रीय गायन, ग्वालियर की सुश्री पद्मजा विश्वरूप के विचित्रवीणा वादन एवं बैंगलूर के गुरु राजू के कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति होगी।

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