जानिए राहू की महादशा के बारे में

राहु की महादशा 18 वर्षों तक चलने वाली एक शक्तिशाली अवधि है, जो अचानक और अप्रत्याशित परिणाम (सफलता या संघर्ष) लाती है। राहु की महादशा में आपका झुकाव मांसाहार की ओर बढ़ने लगता है। राहू की महादशा आने से पहले आपको बुरे बुरे सपने आने लगते हैं, आपका मन विचलित रहने लगता है। राहु की महादशा की शुरुवात में आपको चोर - लुटेरों का भय सताने लगता है, जान पहचान के लोगों से आपका विवाद होने लगता है।
राहु ग्रह को अच्छे-बुरे विचार के लिए जिम्मेदार माना जाता है। सूर्य, चंद्र और मंगल ग्रह राहु के दुश्मन ग्रह माने जाते हैं, तो वहीं बुध, शनि और केतु, राहु के मित्र ग्रह हैं। राहु ग्रह किसी भी राशि का स्वामी नहीं है, यह प्रेम-प्रसंग या प्रेम संबंधों के लिए जिम्मेदार होता है। जन्मकुंडली में यदि राहु अपने मित्र ग्रहों के साथ बैठा हो, तो शुभ परिणाम देता है।
जन्मकुंडली में अगर राहु अच्छी या शुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति हाजिरजवाब, तीव्र बुद्धि वाला होता है, दिमाग में सुविचार आते हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। लेकिन अगर जन्मकुंडली में राहु बुरी या अशुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति मक्कार, बीमारियों का शिकार, शारीरिक या मानसिक रूप से पीड़ित रहता है।
यह समय मानसिक भ्रम, भय, गलत निर्णय, धोखे और अचानक धन लाभ या हानि का कारण बन सकता है। शुभ राहु प्रसिद्धि और तकनीक में सफलता देता है, जबकि अशुभ राहु संघर्ष, तनाव और कोर्ट-कचहरी के मामले देता है।
राहु की महादशा 18 वर्ष की होती है, जो 3, 6, और 9 साल के शुभ-अशुभ क्रम में चलता है और सबसे ज्यादा समस्या राहु महादशा के छठे और आठवें साल में आती है। जन्मकुंडली में यदि राहु मित्र ग्रहों के साथ बैठा हो, तो महादशा की अवधि में भी व्यक्ति को शुभ परिणाम देकर रंक से राजा बना सकता है, लेकिन यदि कुंडली में राहु अशुभ ग्रहों के साथ या अशुभ भाव में हो, तो जीवन में बहुत सी समस्याएं लेकर आता है।
राहु की महादशा के लक्षण
चेहरे में भारीपन आ जाना या चेहरे में अलग-अलग तरह के बदलाव होने लगना। खास करके गाल और जबड़े की हड्डी में बदलाव आना इस बात की तरफ संकेत देता है कि आपकी कुंडली में राहु की महादशा चल रही है।
राहु के अशुभ प्रभाव से पीड़ित व्यक्ति बेतुके ख्याल और सोच और संदेह की भावना से घिरा रहता है। सीवरेज की समस्या होना भी इस बात का संकेत देता है कि आपकी कुंडली में राहु की दशा है। कुंडली में राहु महादशा होने पर व्यक्ति गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त होने लगता है, इसके अलावा उनका गलत कामों और गलत गतिविधियों की तरफ झुकाव बढ़ने लगता है।
राहू की महादशा के अन्य संकेत
राहू की महादशा जीवन में अचानक और अप्रत्याशित परिवर्तन ला सकती है। राहू की महादशा में व्यक्ति को अनिश्चितता और भ्रम का अनुभव कराती है। राहू की महादशा में व्यक्ति संयम को अपनाकर आध्यात्मिकता और आत्म-खोज की ओर बढ़ सकता है।
राहु की महादशा से बचने के सामान्य उपाय
अपने किसी निर्णय के साथ उसकी वैकल्पिक योजना हमेशा तैयार रखें। जल्दबाजी में कोई भी फैसला ना लें। भ्रम और नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए प्रतिदिन ध्यान (Meditation) करें। सुगंधित धूप, अगरबत्ती या कपूर का प्रयोग करें इससे मन प्रसन्न रहेगा।
राहु महादशा के प्रभाव
अचानक धन लाभ, विदेशी मामलों में सफलता, तकनीकी क्षेत्र में उन्नति और जीवनस्तर में बड़ा बदलाव हो सकता है। राहु की महादशा संयम ना रखने कि स्तिथि में मानसिक तनाव, भ्रम, गलत निर्णय लेना, व्यसन (नशा), झूठे आरोप, और बीमारियों का कारण बन सकती है।
राहु की महादशा के दौरान गलत आदतों (नशा, झूठ, गलत संगति) आदि से दूर रहें। इस दौरान पराई स्त्रियों से भी दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।
कुंडली में राहू की दशा मजबूत और कमजोर दो प्रकार की होती है। राहु एक मायावी ग्रह है जो महादशा के दौरान व्यक्ति को सामाजिक व आर्थिक उतार-चढ़ाव का अनुभव कराता है। कुंडली में राहु की स्थिति कमजोर होने पर महादशा में जातक को सफलता पाने में बहुत संघर्ष का सामना करना पड़ता है।
कुंडली में राहु की स्थिति पर महादशा के परिणाम निर्भर करते हैं। जन्मकुंडली में राहु की शुभ स्थिति होने पर मायावी ग्रह जातक को रंक से राजा बना देता है किन्तु अशुभ स्थिति में होने पर राजा से रंक बनाने में पल भर नहीं लगाता। राहु की शुभ स्थिति में व्यक्ति खूब मान-सम्मान, पद एवं पैसा हासिल करते हैं।
राहु की दशा में भगवान शिव की पूजन करने से विशेष लाभ मिलता है, मन शांत रहता है।