लाडली बहना योजना : एक साल में एक लाख लाभार्थी घटे, नए पंजीयन बंद

पिछले विधानसभा चुनाव में महिलाओं को साधने के लिए शुरू की गई लाडली बहना योजना ने भले ही सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई हो, लेकिन अब यह योजना प्रदेश के खजाने पर भारी पड़ रही है। हर महीने 1836 करोड़ रुपए की राशि लाभार्थी बहनों के खातों में ट्रांसफर की जा रही है, जिसके कारण सरकार की वित्तीय स्थिति कमजोर होती जा रही है और लगातार लोन लेने की नौबत आ रही है।
शुरुआत में इस योजना के तहत 1000 रुपए प्रति माह दिए जाते थे। बाद में इसे बढ़ाकर 1250 और अब दीपावली से 1500 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। इसके साथ ही फायदा लेने वाली बहनों की संख्या भी बदलती रही। योजना की शुरुआत में 1 करोड़ 31 लाख बहनें इसमें शामिल थीं, जो अब घटकर 1 करोड़ 26 लाख रह गई हैं। यानी एक साल में 5 लाख, और हाल ही में 1 लाख लाडली बहनें सूची से कम हो गईं। इसके चलते शासन को प्रतिमाह लगभग 21 करोड़ रुपए की बचत भी होने लगी है।
वहीं शासन ने फिलहाल नए पंजीयन बंद कर रखे हैं। बताया जा रहा है कि अगर संख्या बढ़ी तो आर्थिक भार और बढ़ जाएगा। मृत महिलाओं, 60 वर्ष से अधिक उम्र की बहनों और पात्रता के अन्य कारणों से कई नाम सूची से स्वतः कटते जा रहे हैं, लेकिन नई लाभार्थियों को शामिल नहीं किया जा रहा। लाखों महिलाएं पंजीयन खुलने का इंतजार कर रही हैं।
बिहार सहित अन्य राज्यों में भी चुनावी लाभ के लिए ऐसी नकद सहायता वाली योजनाएँ शुरू की गई हैं। मध्यप्रदेश में जून 2023 से अब तक 32 किश्तें ट्रांसफर की जा चुकी हैं और 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं। केवल 16 जनवरी को ही 1 करोड़ 25 लाख बहनों के खातों में 1836 करोड़ रुपए की राशि जमा की गई।
मुख्यमंत्री ने इस योजना को आगे और मजबूत करने के संकेत दिए हैं। भविष्य में राशि बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार आधारित उद्योगों में काम करने वाली बहनों को 5 हजार रुपए तक अतिरिक्त सहायता देने की भी घोषणा की गई है। हालांकि, आर्थिक बोझ के कारण यह योजना शासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।