हर तरफ रफ्तार का खतरा, सड़कों पर ‘मौत की सवारी’

उज्जैन। जिले की सड़कों पर नियमों को धता बताकर दौड़ रहीं यात्री और स्लीपर बसों की मनमानी अब नहीं चलेगी। यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रही ऐसी खतरनाक बसों पर लगाम कसने के लिए परिवहन विभाग ने शुक्रवार को अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाया। नानाखेड़ा बस स्टैंड, इंदौर रोड और उन्हेल बायपास पर हुई ताबड़तोड़ चेकिंग में 189 बसों की जांच की गई, जिनमें से 52 पर बड़ी कार्रवाई की गई है।
नियम-कायदे ताक पर… उज्जैन में बेलगाम बसों पर आरटीओ की सबसे बड़ी कार्रवाई, 52 बसें धराईं
आरटीओ का यह अभियान बस संचालकों की अनियमितताओं का चिट्ठा खोल गया।बिना फिटनेस, गलत परमिट, ओवरलोड सामान और अवैध बॉडी मोडिफिकेशन का खेल खुलेआम चलता मिला।
आरटीओ संतोष मालवीय ने बताया कि जांच टीम के सामने सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि कई बसें छतों पर क्षमता से कई गुना अधिक भारी लगेज लेकर दौड़ रही थीं। यह ओवरलोड न सिर्फ बस का संतुलन बिगाड़ता है, बल्कि मोड़ पर पलटने की आशंका को 80 फीसदी तक बढ़ा देता है।
कई बसों की फिटनेस अवधि महीनों पहले समाप्त हो चुकी थी, बावजूद इसके उन्हें खुलेआम यात्रियों के साथ दौड़ाया जा रहा था। वहीं टैक्स चोरी और गलत कागजों की अनियमितता भी बड़े पैमाने पर मिली।
अवैध केबिन और खतरनाक स्लीपर कोच
टीम ने पाया कि कई बसों में अवैध केबिन, घटिया स्लीपर बर्थ और संकरे रास्ते बनाए गए थे, जिनसे आपात स्थिति में यात्री बाहर निकल भी नहीं सकते। कई बसों में आपातकालीन निकास तक अवरुद्ध पाए गए।
आरटीओ की कार्रवाई का ब्योरा
30 बसों की फिटनेस निरस्त
10 बसों का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड (कागजों में गड़बड़ी, गलत बॉडी मॉडिफिकेशन)
12 बसों के परमिट निरस्त (रूट उल्लंघन, शर्तों का पालन न करना)
आरटीओ कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। अभियान आगे भी जारी रहेगा।
इसलिए जानलेवा बन रही हैं ये बसें
अवैध बॉडी निर्माण
केबिन, सीट और स्लीपर इस तरह लगाए कि आपात स्थिति में यात्री निकल भी नहीं पाएँगे।
ओवरलोड लगेज
छतों पर भारी बोझ
टैक्स चोरी और गलत परमिट
सरकार को राजस्व नुकसान, यात्रियों को खतरे में डालकर लंबी दूरी तक दौड़ाई जा रही बसें।
बिना फिटनेस दौड़ती बसें
तकनीकी खामियों को नजरअंदाज कर सड़कों पर उतारी जा रहीं जर्जर गाड़ियाँ।