आईआरसी मानकों के मुताबिक बदलेगा उज्जैन का ट्रैफिक सिस्टम

उज्जैन। धार्मिक आस्था और पर्यटन की राजधानी बन चुके उज्जैन शहर के भविष्य को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन अब पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों को ध्यान में रखते हुए शहर के प्रमुख चौराहों को वैज्ञानिक पद्धति से विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों और गाइडलाइन का पालन अनिवार्य किया गया है।
प्रशासन एक्शन मोड में, प्रमुख चौराहों के ले-आउट से लेकर सड़क चौड़ीकरण तक होगा बड़े पैमाने पर सुधार
हाल ही में सिंहस्थ मेला कार्यालय के सभागृह में आयोजित बैठक में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने शहर की सड़कों और चौराहों के आधुनिकीकरण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहर में नए मार्गों और इंटरसेक्शन का निर्माण केवल सौंदर्यकरण के उद्देश्य से नहीं, बल्कि यातायात के दबाव, सुरक्षा और सुगमता को ध्यान में रखकर किया जाए। बैठक में प्रभारी नगर निगम आयुक्त संतोष टैगोर, यूडीए सीईओ संदीप सोनी, लोक निर्माण विभाग और एमपीआरडीसी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
चौराहों की डिजाइन ट्रैफिक पैटर्न के हिसाब से
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर चौराहे की डिजाइन इस तरह तैयार की जाए कि ट्रैफिक का मूवमेंट निर्बाध रहे और जाम की स्थिति न बने। इसके लिए सभी निर्माण एजेंसियों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा गया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सड़कों की चौड़ाई, टर्निंग रेडियस, साइनेज, रोड सेफ्टी फीचर्स और क्रॉस सेक्शन आईआरसी मानकों के अनुरूप ही तय हों।
तीन विभाग करेंगे लेआउट तैयार
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों की सामग्री और इंजीनियरिंग गुणवत्ता पर कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने नगर निगम, उज्जैन विकास प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग को मिलकर चौराहों का अंतिम ले-आउट तैयार करने के निर्देश दिए।
इस कारण जरूरी चौराहों का वैज्ञानिक विकास
शहर में हर साल बढ़ रहा वाहन दबाव
2028 के सिंहस्थ को ध्यान में रखकर पूर्व तैयारी
असंगठित चौराहों के कारण बार-बार ट्रैफिक जाम
सुरक्षा मानक और टर्निंग रेडियस तय करने की जरूरत
आईआरसी मानक अपनाने से दुर्घटना कम और यातायात सुगम बनाना