विक्रांत भैरव मंदिर क्षेत्र में तेजी से चल रहा है घाट निर्माण का कार्य

उज्जैन। त्रिवेणी से लेकर सिद्धवट तक 29 किमी लंबे पक्के घाट बन रहे हैं। वर्तमान में विक्रांत भैरव मंदिर क्षेत्र में घाट निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। इतना ही नहीं 29 किमी लंबे घाटों के बीच 14 नए पुल भी बनाए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि उज्जैन में वर्तमान में त्रिवेणी से मंगलनाथ तक शिप्रा पर छोटे-बड़े 14 पुल मौजूद हैं। वहीं आगामी सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए 14 नए पुल और बनाए जा रहे हैं। यह 14 नए पुल जुडऩे के बाद धार्मिक नगरी उज्जैन में पुलों की कुल संख्या लगभग 30 हो जाएगी। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में एक साथ शिप्रा पर पुल बनाए जा रहे हैं। इनमें टू-लेन, फोर-लेन, सबमर्सिबल ब्रिज, उच्च स्तरीय पुल और कलात्मक आर्च ब्रिज शामिल होंगे। इसके अलावा नमामि शिप्रे परियोजना के तहत 29 किमी लंबे घाट का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। विक्रांत भैरव मंदिर के घाट तक नए घाट बनने के काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ के दौरान करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। नए पुलों के बन जाने से औसतन हर 1 किलोमीटर की दूरी पर शिप्रा पार करने का रास्ता उपलब्ध होगा। इससे ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट में बड़ी राहत मिलेगी। नमामि शिप्रे परियोजना के प्रशासक इंजीनियर मयंक परमार ने बताया कि अभी शिप्रा नदी पर लगभग 8 किमी लंबे घाट बने हुए हैं। सिंहस्थ को देखते हुए इसमें 29 किमी लंबे नए घाट जोड़े जा रहे हैं। घाटों का निर्माण पूर्ण होने के बाद त्रिवेणी संगम से लेकर रामघाट और भैरवगढ़ होते हुए सिद्धनाथ तक करोड़ों आगंतुकों को स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पर्याप्त स्थान मिल सकेगा। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक सिंहस्थ में आने-जाने की सबसे बड़ी चुनौती आवागमन और क्राउड मैनेजमेंट होती है। नए पुलों और घाटों से श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान होगी और आयोजन की भव्यता बढ़ेगी। आयोजन के बाद भी ये पुल शहरवासियों के लिए लंबे समय तक उपयोगी सिद्ध होंगे।