
13 Nov 2022
जप माला कैसी हो...?
माला में सबसे पहले मनकों की संख्या पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पूजा में 15, 27 या 54 दानों की माला पूजा के लिए सामान्य कही गई है। 108 दानों कि माला पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है यदि हम 108 को आपस में जोड़ें तो योग 1+0+8 =9 होगा। नौ, अंको का सर्वश्रेष्ठ अंक है पूजा करते समय माला को शुद्ध जल से धो लेना चाहिए (यदि संभव हो तो किसी योग विद्वान से पूजा वाली माला की प्राण प्रतिष्ठा करा लेनी चाहिए) तथा गुरु दीक्षा में दिया गया मंत्र और माला को जपने की विधि लेनी चाहिए। माला फेरते समय शरीर स्थिर और एकाग्र होना चाहिए। इससे सिद्धि मिलती है।
माला का आकार प्रकारः-
माला सही बनी हुई होनी चाहिए। उसका बार-बार टूटना शुभ नहीं होता है माला को ढक कर हृदय के समीप लाकर जप करना चाहिए...।
रुद्राक्ष की माला
रुद्राक्ष की माला सर्वश्रेष्ठ मानी गई है अलग-अलग मुखों के रुद्राक्ष की माला से अलग- अलग सिद्धि प्राप्त होती है। सामान्यतः पंचमुखी रुद्राक्ष की माला का प्रयोग किया जाता है।
शिव साधकों के लिए रुद्राक्ष की माला सर्वोत्तम है...।
हाथी दांत की मालाः-
यह गणेश जी की उपासना में विशेष लाभदायक होती है क्योंकि यह बहुत मूल्यवान होती है, इसलिए साधारण लोग इसका उपयोग नहीं कर पाते।
कमलगट्टे की मालाः-
यह माला धन प्राप्ति के लिए प्रयुक्त होती है। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए यह सर्वोत्तम है। कुछ विद्वानों के मतानुसार यह शत्रु शमन और कर्ज मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयोगों में भी लाभकारी है।
पुत्रजीवा की मालाः-
इसका प्रयोग संतान की प्राप्ति हेतु की जाने वाली साधना में होता है यह कुछ मोटी माला होती है।
चांदी की मालाः-
धन की प्रचूर प्राप्ति, सात्विक अभीष्ट की पूर्ति के लिए इस माला को बहुत प्रभावी माना जाता है।
मूंगे की मालाः-
मूंगे की माला गणेश और लक्ष्मी की साधना में प्रयुक्त होती है धन संपति , द्रव्य और स्वर्ण आदि की प्राप्ति की कामना से की जाने वाली साधना की सफलता हेतु मूंगे की माला की अत्यधिक प्रभावशाली माना गया है.।
कुषा ग्रंथि की मालाः-
कुषा नामक घास की जड़ को खोद कर उसकी गांठों से बनाई गई यह कुषा ग्रंथी माला सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक विकारों का शमन करके साधक को स्वस्थ्य, निर्मल और तेजश्वी बनाती है। इसके प्रयोग से सभी प्रकार की व्याधियों का नाष होता है।
चंदन की मालाः-
यह दो प्रकार की होती है सफेद और लाल चंदन की। सफेद चंदन की माला का प्रयोग शांति पुष्टि कर्मों में तथा श्रीराम, विष्णु आदि देवताओं की उपासना में किया जाता है जबकि लाल चंदन की माला गणेषोपासना तथा देवी साधना के लिए प्रयुक्त होती है धन धान्य की प्राप्ति के लिए की जाने वाली साधना में इसका विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है।
तुलसी की मालाः-
वैष्णव भक्तों के लिए श्रीराम और श्रीकृष्ण की उपासना हेतु यह माला उत्तम मानी गई है इसका आयुर्वेदिक महत्व भी है। इस माला को धारण करने वाले या जपने वाले को पूर्ण रूप से शाकाहारी होना चाहिए तथा प्याज व लहसुन से सर्वथा दूर रहना चाहिए।
स्वर्ण मालाः-
स्वर्ण माला भी धन प्राप्ति ओर कामनापूर्ति की साधना में उपयोगी होती है।
स्फटिक मालाः-
स्फटिक माला सौम्य प्रभाव से युक्त होती है इस का प्रयोग धारक को चंद्रमा और शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त करवाता है। सात्विक कार्यों की साधना के लिए यह बहुत उत्तम मानी जाती है।
शंख मालाः-
शंख माला भी कुछ विशेष तांत्रिक प्रयोगों में प्रभावशाली रहती है। शिवजी की पूजा साधना और सात्विक कामनाओं की पूर्ति हेतु किए जाने वाले जप तथा सामान्य रूप से धारण करने के लिए इसे उत्तम माना गया है।
वैजयन्ती मालाः-
वैजयन्ती माला विष्णु भगवान की आराधना में प्रयुक्त होती है। वैष्णव भक्त इसे सामान्य रूप से भी धारण करते हैं।
हल्दी की मालाः-
हल्दी की माला गणेश पूजा के लिए प्रयोग में लाई जाती है वृहस्पति ग्रह तथा देवी बगलामुखी की साधना में इसका प्रयोग किया जाता है।
इन सब बातों को यदि आप ध्यान में रख कर पूजा या मन्त्र जप करते हैं तो आप शीघ्र ही मनोवांछित इच्छा की प्राप्ति कर सकते हैं....।।