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भगवान श्रीगणेश का प्रतीक है स्वास्तिक, इसके उपायों से घर में बनी रहती है सुख-समृद्धि

12 Dec 2022

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाया जाता है। स्वास्तिक को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी शुभता के देवता है और प्रथम पूजनीय हैं इसलिए भी हर कार्य से पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाना आवश्यक रूप से बताया जाता है। खासतौर पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा में स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाया जाता है।

आगे जानिए स्वास्तिक से जुड़ी खास बातें…


- सामान्यतः स्वास्तिक दो रेखाओं द्वारा बनाया जाता है जो एक दूसरे को काटती हुई होती हैं। जो आगे बढ़कर मुड़ जाती हैं और इसकी चार भुजाएं बन जाती हैं। जिस स्वास्तिक में रेखाएं आगे की ओर इंगित करती हुई दायीं ओर मुड़ती हैं वह स्वास्तिक शुभ माना जाता है।


- ऋग्वेद में स्वास्तिक को सूर्य माना गया है और उसकी चारों भुजाओं को चार दिशाओं की उपमा दी गई है।


- इसके अलावा स्वास्तिक के मध्य भाग को विष्णु की कमल नाभि और रेखाओं को ब्रह्माजी के चार मुख, चार हाथ और चार वेदों के रूप में भी निरूपित किया जाता है।


- अन्य ग्रंथो में स्वास्तिक को चार युग, चार आश्रम (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) का प्रतीक भी माना गया है। यह मांगलिक विलक्षण चिन्ह अनादि काल से ही संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त रहा है।


- ज्यादातर स्वास्तिक को रोली या लाल कुमकुम से बनाया जाता है, क्योंकि हिंदू धर्म में लाल रंग को शुभ माना जाता है।


- इसके अलावा सिंदूर से भी स्वास्तिक का चिह्न बनाया जाता है। लोग आजकल बाजार से बने बनाए स्वास्तिक के चिह्न लाकर लगा लेते हैं लेकिन यह सही नहीं रहता है। स्वास्तिक सदैव स्वयं अंकित करना चाहिए।


स्वस्तिक के उपाय

1. वास्तु में भी स्वास्तिक के चिह्न का बहुत महत्व माना गया है। यदि किसी के मुख्य द्वार में किसी प्रकार का दोष हो तो उसे अपने द्वार पर स्वास्तिक का चिह्न बनाया जाता है। माना जाता है कि इससे वास्तु दोष का प्रभाव कम हो जाता है और आपके घर में सुख-समृद्धि एवं शुभता बनी रहती है।


2. यदि किसी को व्यापार में लगातार हानि का सामना करना पड़ रहा है व्यापार स्थल के ईशान कोण में लगातार 7 गुरुवार तक सूखी हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए। इससे आपके व्यापार की समस्याएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं और कार्यक्षेत्र में फायदा होता है।


3. कार्यों में सफलता प्राप्ति को लिए

घर की उत्तरी दिशा में सूखी हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना शुभ रहता है। माना जाता है कि इससे कार्यों में आने वाली अड़चने दूर होने लगती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।


जानिए घर में अलग-अलग जगहों पर स्वास्तिक बनाने के चमत्कारिक लाभ


सनातन धर्म में स्वास्तिक के चिह्न को बहुत ही शुभ और कल्याणकारी माना गया है। स्वास्तिक को गणेश जी का प्रतीक माना जाता है। स्वास्तिक के चिह्न की उत्पत्ति आर्यों द्वारा मानी जाती है। स्वास्तिक के चिह्न का प्रयोग हर शुभ, मांगलिक कार्य में किया जाता है। धार्मिक के साथ स्वास्तिक का वास्तु में भी विशेष महत्व माना जाता है।


जानते हैं घर में स्वास्तिक का चिह्न बनाने के चमत्कारिक फायदे।


मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिह्न


वास्तु में मुख्य द्वार की दोनों ओर की दिवारों पर स्वास्ति चिह्न बनाने के बारे में बताया गया है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अगर आपके द्वार में कोई वास्तु दोष हैं तो उसके बुरे प्रभावो से भी राहत मिलती है। घर में समृद्धि आती है। मुख्य द्वार का वास्तु दोष दूर करने के लिए 9 अंगुल लंबा और चौड़ा स्वास्तिक का चिह्नन मुख्य द्वार पर सिंदूर से बनाना चाहिए।


घर आंगन में स्वस्तिक


आंगन के बीचो-बीच मांडने के रूप में स्वस्तिक बनाना भी शुभ रहता है। पितृपक्ष में घर के आंगन में गोबर से स्वास्तिक बनाने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है। जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। घर के आंगन में स्वास्तिक का चिह्न बनाने से सारी नकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती है।


घर के देवस्थान में स्वस्तिक


देवस्थान पर स्वास्तिक का चिह्न बनाकर उसके ऊपर देवताओं का मूर्ति स्थापित करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। जहां पर आप अपने घर में ईष्टदेव की पूजा आराधना करते हैं। उस स्थान पर भगवान के आसन के ऊपर स्वस्तिक का चिह्न बनाना बहुत ही शुभ रहता है।


तिजोरी या धन रखने की अलमारी में स्वास्तिक


तिजोरी में स्वास्तिक का चिह्न बनाने से समृद्धि बनी रहती है। मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। जिससे घर में किसी प्रकार से धन की कमी नहीं रहती है। दिवाली और अन्य शुभ अवसरो पर मां लक्ष्मी का पूजन करने से पहले स्वास्तिक बनाकर उन्हें विराजमान करना चाहिए।


घर की देहली पर पूजा करते समय स्वास्तिक का चिह्न बनाना


जो लोग प्रतिदिन सुबह उठकर विश्वासपूर्वक मां लक्ष्मी के आगमन के विचार से देहली पूजन करके देहली के दोनों और स्वास्तिक बनाते हैं। उनके घर मां लक्ष्मी वास करती हैं। प्रतिदिन प्रातः जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करने के पश्चात धूप दिखाकर भगवान की पूजा करें। उसके बाद देहली की पूजा करते समय दोनों ओर स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। स्वास्तिक के ऊपर चावल की ढेरी रखें। पूजा वाली दो सुपारी लेकर उसके ऊपर कलावा बांध दें अब एक-एक सुपारी को ढेरी पर रख दें।


स्वस्तिक के टोटके एवं उपाय


स्वस्तिक और वास्तु :

वास्तुशास्त्र में स्वस्तिक को वास्तु का प्रतीक मान गया है। इसकी बनावट ऐसी होती है कि यह हर दिशा से एक समान दिखाए देता है। घर के वास्तु को ठीक करने के लिए स्वस्तिक का प्रयोग किया जाता है। घर के मुख्य द्वार के दोनों और अष्‍ट धातु और उपर मध्य में तांबे का स्वस्तिक लगाने से सभी तरह का वास्तुदोष दूर होता है। पंच धातु का स्वस्तिक बनवा के प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद चौखट पर लगवाने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। चांदी में नवरत्न लगवाकर पूर्व दिशा में लगाने पर वास्तु दोष दूर होकर लक्ष्मी प्रप्ति होती है।


पहला उपाय वास्तुदोष दूर करने के लिए 9 अंगुल लंबा और चौड़ा स्वस्तिक सिंदूर से बनाने से नकारात्मक ऊर्जा सकारात्मकता में बदल जाती है।


दूसरा उपाय मांगलिक, धार्मिक कार्यों में बनाएं स्वस्तिक धार्मिक कार्यों में रोली, हल्दी या सिंदूर से बना स्वस्तिक आत्मसंतुष्‍टी देता है। त्योहारों पर द्वार के बाहर रंगोली के साथ कुमकुम, सिंदूर या रंगोली से बनाया गया स्वस्तिक मंगलकारी होता है। इसे बनाने से देवी और देवता घर में प्रवेश करते हैं। गुरु पुष्य या रवि पुष्य में बनाया गया स्वस्तिक शांति प्रदान करता है।


तीसरा उपाय व्यापार वृद्धि हेतु :यदि आपके व्यापार या दुकान में बिक्री नहीं बढ़ रही है तो 7 गुरुवार को ईशान कोण को गंगाजल से धोकर वहां सुखी हल्दी से स्वस्तिक बनाएं और उसकी पंचोपचार पूजा करें। इसके बाद वहां आधा तोला गुड़ का भोग लगाएं। इस उपाय से लाभ मिलेगा। कार्य स्थल पर उत्तर दिशा में हल्दी का स्वस्तिक बनाने से बहुत लाभ प्राप्त होता है।


चौथा उपाय स्वस्तिक बनाकर उसके ऊपर जिस भी देवता की मूर्ति रखी जाती है वह तुरंत प्रसन्न होता है। यदि आप अपने घर में अपने ईष्‍टदेव की पूजा करते हैं तो उस स्थान पर उनके आसन के उपर स्वस्तिक जरूर बनाएं।


पांचवां उपाय देव स्थान पर स्वस्तिक बनाकर उसके ऊपर पंच धान्य या दीपक जलाकर रखने से कुछ ही समय में इच्छीत कार्य पूर्ण होता है। इसके अलावा मनोकामना सिद्धी हेतु मंदिर में गोबर या कंकू से उलटा स्वस्तिक बनाया जाता है। फिर जब मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वहीं जाकर सीधा स्वस्तिक बनाया जाता है।


छठा उपाय सुख की नींद सोने हेतु :यदि आप रात में बैचेन रहते हैं। नींद नहीं आती या बुरे बुरे सपने आते हैं तो सोने से पूर्व स्वस्तिक को तर्जनी से बनाकर सो जाएं। इस उपाय से नींद अच्छी आएगी।


सातवां उपाय संजा में स्वस्तिक :पितृ पक्ष में बालिकाएं संजा बनाते समय गोबर से स्वस्तिक बनाती है। इससे घर में शुभता, शां‍ति और समृद्धि आती है और पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है।


आठवां उपाय धनलाभ हेतु प्रतिदिन सुबह उठकर विश्वासपूर्वक यह विचार करें कि लक्ष्मी आने वाली हैं। इसके लिए घर को साफ-सुथरा करने और स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद सुगंधित वातावरण कर दें। फिर भगवान का पूजन करने के बाद अंत में देहली की पूजा करें। देहली के दोनों ओर स्वस्तिक बनाकर उसकी पूजा करें। स्वस्तिक के ऊपर चावल की एक ढेरी बनाएं और एक-एक सुपारी पर कलवा बांधकर उसको ढेरी के ऊपर रख दें। इस उपाय से धनलाभ होगा।


नौवां उपाय बेहद शुभ है लाल और पीले रंग का स्वस्तिक अधिकतर लोग स्वस्तिक को हल्दी से बनाते हैं। ईशान या उत्तर दिशा की दीवार पर पीले रंग का स्वस्तिक बनाने से घर में सुख और शांति बनी रहती है। यदि कोई मांगलिक कार्य करने जा रहे हैं तो लाल रंग का स्वस्तिक बनाएं। इसके लिए केसर, सिंदूर, रोली और कुंकुम का इस्मेमाल करें।


स्वास्तिक मंत्र :-


ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः॥

स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो ब्रहस्पतिर्दधातु ॥

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