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धर्म: राहु महादशा से निपटने के अंतर/गोचर उपाय

राहु का वैदिक स्वरूप बिना धड़ का सिर है, राहु का प्रभाव सबसे पहले आपकी सोच/मस्तिष्क पर पड़ता है। अगर राहु के कुप्रभाव हैं - तो मानसिक उलझन, निर्णय लेने की क्षमता में कमी, बहुत ज्यादा कंफ्यूज़न, रात में नीद न आना आदि कुछ लक्षण हैं।


राहु महादशा से निपटने के उपाय -


1- शनिवार शाम को अलसी के तैल और लाल मौली/कलावे की बत्ती का चौमुखा दीपक, शिव मंदिर में लगाएं।


2- दुर्गा स्तोत्र चालीसा जो भी हो पाठ करें।


3- बेल पत्र, विजया/भाँग पत्र, विष्णुकांता के फूलों से शिवलिंग का अर्चन करें।


4- सरस्वती मंत्र का जप करें।


अगर कुंडली मे राहु के दुष्प्रभाव हैं, महादशा है तो बार बार एक जैसी ग़लतियाँ होने लगती हैं। वहीं शुभ प्रभाव में राहु अनायास यश, कीर्ति, धन, पद की प्राप्ति का कारण बनता है।


कलयुग शुक्र व राहु प्रधान कहा गया है, जहाँ दिखावा/प्रपञ्च/स्वार्थ सन्यासियों को भी नही छोड़ता। राहु की दशा से स्वयं को दूर रखने के लिये मन को मजबूत रखें। राहु यानी भ्रम का एक मात्र उपाय है ज्ञान, सरस्वती, साधना, शिक्षा, गीतसंगीत एवं वाद्ययंत्रों का प्रयोग करें।

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