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ज्योतिष ज्ञानामृत

18 Nov 2022

शनि महाराज की साड़ेसाती होती क्या है क्या होता इसमें

शनि समय काल में भ्रमण करते हुये अवश्य आता है जब शनि भ्रमण करते हुए..

जिस भी राशि में जाता हे.. तो सभी राशियों पर अपना विशेष प्रकार का प्रभाव डालता है l


जब यह प्रभाव किसी राशि के ऊपर शनि की विशेष स्थितियों के कारण पड़ता है तो इसको साढ़ेसाती कहते हैं


शनि एक राशि में ढाई वर्ष रहता है और शनि जब भी किसी राशि में रहता है उस राशि..

और तब उस राशि से दूसरे और बारहवें भाव में रहता है तो उस राशी पर साढ़ेसाती चलने लगती है l

अर्थार्त जहाँ हे वहां और उसके आगे पीछे की राशियों पर शनि की साडेसाती चलती है l

शनिदेव एक साथ तीन राशि को एक साथ प्रभावित करते है l


ढाई-ढाई वर्षों का तीन चरण. कुल मिलाकर साढ़ेसात साल तक साढ़ेसाती के रूप में चलता है l

शनि की साडेसाती जीवन-काल में 30 वर्ष में एक बार आती ही.. हे l

अन्य ग्रहों की तुलना में शनि की चाल सबसे धीमी होती है

और वो एक राशि में करीब ढाई साल तक रहते हैं और उसके बाद दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं l

शनि महाराज एक साथ तीन राशियों को साडेसाती के रूप में प्रभावित करते हैं l


ढाई-ढाई वर्ष का समय तीन चरण साढ़े सात साल तक साढ़ेसाती के रूप में चलता रहता है l

शनि की साढ़ेसाती के तीन चरण हैं........


शनि का हर एक चरण ढाई साल का होता है और पहले चरण में शनि से प्रभावित जातक को..

मानसिक रूप से परेशान करते हैं इस समय मानसिक तनाव और अकारण का चिड़चिड़ापन हो सकता है

और किसी-किसी को सिर में दर्द बना रहता है l


वर्तमान (2022) में कुम्भ राशि में शनि का प्रथम चरण चल रहा है l

साढ़ेसाती के दूसरे चरण में आर्थिक और शारीरिक रूप से कष्ट होने लगता है l

अचानक बने बनाए काम का बिगड़ जाना, धन का अप्रत्याशित रूप से व्यय होना या खर्च बढ़ जाता है,

किसी बड़ी बीमारी या दुर्घटना की चपेट में आ जाते है l ये सब साढ़ेसाती के दूसरे चरण के लक्षण हैं l

जो वर्तमान में मकर राशि को चल रही है l


और, आपको पते की बात बताते हें

जिससे आपको अचम्भा होगा कि साढ़ेसाती का तीसरा चरण

ज्योतिष के अनुसार अच्छा माना जाता है क्योंकि इस समय शनिदेव आपको हुए पिछले समय में किये हुए कर्म से जो हुई हानी हुई है उसकी भरपाई करते हैं और आपको आपके उच्च स्थान पर ले जाने के लिए मार्ग भी बनाते हैं l

जो वर्तमान में धनु राशि वालों को चल रही है l


अब आपको बताते हैं शनि की साढ़ेसाती के कुछ लक्षण .........


हथेलियों का रंग बदलना या हथेली की रेखाओं में कहीं नीला तो कहीं कालेपन जैसा धब्बा दिखना..


माथे से या चेहरे से चमक लुप्त हो जाना और ललाट पर कालापन नजर आना,


अपमानित होने या छवि खराब होने का डर सताना शरीर और चेहरे पर दमक या कान्ति कम होने लगती है l


>नाखून का कमजोर होकर अपने आप टूटने लगना या आंखों के नीचे कालापन आ जाना है l


छोटी-छोटी बात-बात पर अनावश्यक क्रोध आना, वाणी कर्कश हो जाना, विचारों में उग्रता,


अकारण शंका मन में घर कर जाना और परिवार में कलह का वातावरण बना रहना आदि l


साडेसाती किन-किन राशि पर चल रही है और ये जातक..

कब मुक्त होंगे और इनको क्या उपाय करने होंगे ?



शनि की साडेसाती वर्तमान में तीन राशियों पर चल रही है l


प्रथम चरण में कुम्भ राशि पर जो अगले साडे छे वर्ष रहेगी


दुसरे चरण में मकर राशि जो साडे तीन वर्ष तक और..


अंतिम चरण के साथ धनु राशि पर जो अगले एक वर्ष तक रहेगी l


-शनि की साढ़ेसाती के उपाय .........


1. शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देते हैं और दान करना पुण्य कर्म माना गया है l


इसलिए शनिवार के दिन लोहा, काले उड़द की दाल, काला तिल या काला वस्त्र दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं l


2. शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और शनि स्त्रोत का पाठ करें l इससे भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं l


3. शनिवार के दिन शनिदेव के मंदिर में जाकर सरसों के तेल में काला तिल और एक लोहे की कील मिलाकर शनिदेव को अर्पित करें l


4. हनुमान जी की पूजा हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनिदेव से शांति मिलती हैं और अशुभ फल मिलना कम हो जातें हैं l


5. शनिवार को मछली,पक्षी, और पशुओं को चारा खिलाने से शनि का प्रभाव कम हो जाता है l


6. प्रत्येक दिन यदि मजबूर एवं लाचार लोगों को यथायोग्य शक्ति के अनुसार दान करें तो भी शनि देव शांत हो जाते है l


शनि की ढैया क्या होती हे और इससे बचने के कोई उपाय हों तो वो भी बताएं ?


उत्तर-


राशियों पर भ्रमण के समय जब शनि किसी भी राशि से चतुर्थ भाव में या..

अष्टम भाव में आता है तो इसको शनि की ढैया कहा जाता है l

वर्तमान में तुला राशि के चतुर्थ भाव मे शनि महाराज चल रहे है

और मिथुन राशि के अष्टम भाव में शनि है..

जिसके कारण इस दोनों राशी वालों को शनि की ढैया का प्रभाव है l


यह शनि के एक राशि पर भ्रमण के समय ही रहता है यानि कि ढाई साल तक l इसीलिए इसको ढैया कहा जाता है l

शनि की ढैया से बचने के लिए उपाय......


ढैय्या में जातक को हमेशा धैर्य से काम लें l


ऐसी स्थिति से छुटकारा पाने के लिए प्रतिदिन सुबह में चिड़ियों को दाना और पानी दें l


इसके अलावा चींटियों को आटा शक्कर भी दे सकते हैं


प्रतिदिन सूर्य को जल दें


गलत या अनुचित कार्य से बचें


शनिवार को काली उड़द, तिल, काले कपड़े आदि का गरीबों में दान करें


शनिवार के दिन सुबह और शाम में भोजन में काले नमक और काली मिर्च का प्रयोग करें..


हर शनिवार संभव हो तो बंदरों को भुने चने खिलाएं


इसके अलावा मीठी रोटी पर तेल लगाकर काले कुत्ते को भी खिला सकते हैं


मांस-मदिरा का सेवन करना छोड़ दें


सुन्दरकाण्ड या हनुमान चालीसा का लगातार पाठ करें


शनिवार को प्रतिदिन सुबह पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें


संभव हो तो पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर 108 बार शनि मंत्र

ॐ शं शनिश्चराय नम: का जाप.. करें या प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र.. या ॐ नमः शिवाय.. का जाप भी कर सकतें हैं


शनि की ढैया से मुक्ति के लिए शुक्रवार की रात्रि में कुछ मात्र में काले तिल पानी में भिगो कर

शनिवार की सुबह इन्हें पीसकर, गुड़ में मिलाकर 8 लड्डू बनाएं और काले घोड़े या कुत्ते को खिला सकतें हैं l

ऐसा आठ शनिवार तक करें l


गाय की सेवा करें उसे चारा या गुड रोटी खिलाएं l


प्रत्येक शनिवार पीपल वृक्ष के नीचे सूर्योदय के समय कच्चा दूध अर्पित करें..


ये पांच राशि के अतिरिक्त और कोन सी राशि को शनि क्या प्रभाव दे रहा है ?


उत्तर-

-०१ मेष राशि पर.............

दशम भाव विशेष रूप से कर्म का भाव होता है और शनि भी कर्म का स्वामी है।

इस समय मेष राशि को सफलता प्राप्त करने के लिए आपको कड़ी मेहनत और संघर्ष करना होगा।

त्वचा संबंधी किसी रोग से परेशानी हो सकती है।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह समय आपके लिए मध्यम परिणाम वाला सिद्ध होगा।

माता-पिता के साथ किसी तीर्थयात्रा पर जा सकते हैं।

शनि गोचर के समय पर स्वयं का नया घर-मकान लेने का सपना साकार हो सकता है।


-०२ वृषभ राशि पर........

गोचर के दौरान शनि आपके नवम भाव में विराजमान होगा।

नवम भाव भाग्य और पिता के लिए माना जाता है इसलिए इस समय पिता के साथ वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

शनि गोचर के दौरान अपनी वाणी पर संयम रखें और किसी के साथ भी गलत या अनुचित व्यवहार न करें।

और ना ही किसी से भी ऐसा कोई वचन-वादा न करें जिसे कि आप समय पर पूरा न कर पाएं।

आलस्य का त्याग करें अन्यथा सभी महत्वपूर्ण कार्य हाथ से निकल जाएंगे। अन्यथा समस्या में पड़ सकतें है l

नई नौकरी की तलाश में हैं तो वो पूरी हो सकती है l


-०४ कर्क राशि पर .................

शनि गोचर के काल में इस राशि वालों को अपने आपको आलस्य से दूर करें, क्योंकि यह आपके हित में नहीं होगा।

व्यापार से जुड़े लोग साल की शुरुआत में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय हो सकते हैं।

काम के सिलसिले में किसी विदेशी चीजों से जुड़ सकते हैं।

संतान के स्वास्थ्य में समस्या आ सकती है इसलिए उनका ध्यान रखें।

दुर्घटना हो सकती है इसलिए वाहन चलाते समय सावधानी रखें ।

साज-सज्जा की वस्तुओं पर धन अधिक खर्च हो सकता है।

अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, किसी पुरानी बीमारी से परेशान हो सकते हैं।

व्यर्थ के वाद विवाद में न उलझें, धन हानि की संभावना हो सकती है।


-०५ सिंह राशि पर ............

शनिदेव 6ठे भाव में गोचर करेंगे, जो इनके लिए बहुत शुभ है।

शनि का गोचर सिंह राशि वालों के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हो रहा है।

आपको आपके परिश्रम का भरपूर लाभ मिलेगा अर्थात आपको सफलता प्राप्त करने के लिए भरपूर परिश्रम की आवश्यकता है।

जमीन-जायदाद के क्षेत्र में निवेश करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें सफलता मिलेगी।

स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं। किसी पुरानी बीमारी के कारण से मानसिक तनाव से घिर सकते हैं।

नौकरी में परिवर्तन की कदापि न सोचें अन्यथा समस्या आ सकती है।

किसी वर्षों पुराने मित्र से इस समय भेंट हो सकती है।


-०६ कन्या राशि पर ..........

शनिदेव कन्या राशि के जातकों के लिए 5वें भाव गोचर कर रहें हैं।

शनि गोचर के समय में आपकी रुकी हुई शिक्षा को पूरा कर सकते हैं।

आप कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं।

किसी नए व्यापार का आरम्भ कर सकतें ।

कार्यक्षेत्र में किसी करीबी सहयोगी के साथ मतभेद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

परन्तु माता-पिता का सहयोग मिलेगा।

आभूषण या कोई महंगी चीज खरीद सकते हैं।

इस समय घर या गाड़ी खरीद सकते हैं।


०८~वृश्चिक राशि पर .................

शनि का गोचर आपके तृतीय भाव में चल रहा है।

इस राशि वालों को कई सुखद समाचार मिलेगा।

किसी काम को परिपूर्ण करने के लिए आलस का त्याग ही अच्छा है, इस बात का विशेष ध्यान रखें।

क्योकि यह समय आपके लिए किसी नए कार्य या व्यापार के आरंभ करने के लिए सबसे अच्छा चल रहा है।

इस समय आर्थिक स्थिति में वृद्धि होगी नोकरी या व्यापार से धनागम होगा।

किसी रुकी हुई पढ़ाई को पूरा कर सकते हैं।


१२~मीन राशि पर ................

मीन राशि के 11वें भाव में गोचर होगा।

इस समय आलस सुस्ती का अनुभव होगा अपने आप पर आलस को बिलकुल भी हावी न होने न दें।

शनि का गोचर समाज में नई पहचान देगा और कार्यक्षेत्र में नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

वैवाहिक जीवन खुशहाल बीतेगा, जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर प्राप्त होगा।

सन्तान को लालायित लोगों को शुभसुचना मिल सकती है l

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से शनि गोचर आपके लिए लाभदायक होगा।

सभी कार्य में माता-पिता या भाई-बहन का भरपूर साथ मिलेगा।

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