
24 Nov 2022
क्या आप जानते हैं आदत बदलने से ग्रह भी अच्छा फल दे सकते हैं--
जैसे
1- मंदिर को साफ़ करते है तो बृहस्पति बहुत अच्छे फल देगा।
2- अपनी झूठी थाली या बर्तन उसी जगह पर छोड़ना- सफलता मे कमी।
3- झूठे बर्तन को उठाकर जगह पर रखते है या साफ कर लेते है तो चन्द्रमा, शनि ग्रह ठीक होते है।
4- देर रात जागने से चन्द्रमा अच्छे फल नहीं देता है।
5- कोई भी बाहर से आये उसे स्वच्छ पानी जरुर पिलाए। राहू ग्रह ठीक होता है। राहू का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।
6- रसोई को गन्दा रखते हैं तो आपको मंगल ग्रह से दिक्कतें आऐंगी। रसोई हमेशा साफ सुथरी रखेंगे तो मंगल ग्रह ठीक होता।
7- घर में सुबह उठकर पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य, शुक्र और चन्द्रमा मजबूत करते हैं।
8- जो लोग पैर घसीट कर चलते है उन का राहु खराब होता है।
9- बाथरूम में कपडे इधर उधर फेंकते है, बाथरूम में पानी बिखराकर आ जाते है तो चन्द्रमा अच्छे फल नहीं देता है।
10- बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर उधर फेंक देते है, उन्हें शत्रु परेशान करते है,क्योंकि उनका राहू बिगड़ जाता है।
11- राहू और शनि ठीक फल नहीं देते है जब बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सलवटे होंगी, चादर कही, तकिया कही है।
12- चीख कर बोलने से शनि खराब होता है।
13- बुजूर्गों के आशीर्वाद से घर में सुख समृद्धि बढती है तथा गुरू ग्रह अच्छा होता है।
14- अपशब्द बोलने से गालियां देने से गुरु और बुध खराब होते हैं..यदि आप भी गालियां देने के शौकीन हैं तो बुढ़ापे में बिस्तर पकड़ने के लिए तैयार रहें।
15- यदि आप स्त्रियों को सम्मान की नजर से नहीं देखते, तो आपका चंद्रमा व शुक्र ग्रह अच्छे परिणाम नहीं देंगे।।
घर को स्वर्ग बनाए
सावधान रहें, आपके घर की दीवारें सब सुनती हैं और सब सोखती हैं,
कभी आपने किसी घर में जाते ही वहाँ एक अजीब सी नकारात्मकता और घुटन महसूस की है...?,
या किसी के घर में जाते ही एकदम से सुकून औऱ सकारात्मकता महसूस की है.?
मैं कुछ ऐसे घरों में जाता हूँ जहां जाते ही तुरंत वापस आने का मन होने लगता है। एक अलग तरह का खोखलापन, बनावटीपन, झूठा दिखावा और नेगेटिविटी उन घरों में महसूस होती है। साफ समझ जाता हूँ कि उन घरों में रोज-रोज की कलह, चुगली , ईर्ष्या, निंदा आदि की जाती है।परिवार में, सामंजस्य, प्रेम व पवित्र व सकारात्मक विचारों की कमी है। वहाँ कुछ पलों में ही मुझे अजीब सी बेचैनी होने लगती है और मैं जल्दी ही वहाँ से वापस आ जाता हूँ।
वहीं कुछ घर इतने खिलखिलाते और प्रफुल्लित महसूस होते हैं कि वहाँ घंटों बैठकर भी मुझे वक़्त का पता नहीं चलता, क्योंकि वहां के लोगों के विचार पवित्र व सकारात्मक है।
ध्यान रखिये....
"आपके घर की दीवारें सब सुनती हैं और सब सोखती हैं। घर की दीवारें युगों तक समेट कर रखती हैं सारी सकारात्मकता और नकारात्मकता भी"
"कोपभवन" का नाम अक्सर हमारी पुरानी कथा-कहानियों में सुनाई देता है। दरअसल कोपभवन पौराणिक कथाओं में बताया गया घर का वो हिस्सा होता था जहां बैठकर लड़ाई-झगड़े और कलह-विवाद आदि सुलझाए जाते थे। उस वक़्त भी हमारे पुरखे सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को अलग-अलग रखने का प्रयास करते थे इसलिए " कोपभवन " जैसी व्यवस्था की जाती थी ताकि सारे घर को नकारात्मक होने से बचाया जाए।
इसलिए आप भी कोशिश कीजिए कि आपका घर "कलह-गृह" या "कोपभवन" बनने से बचा रहे,
घर पर सुंदर तस्वीरें , फूल-पौधे, बागीचे , सुंदर कलात्मक वस्तुएँ आदि से आपके घर का श्रृंगार बेशक़ होता हैं, पर आपका घर सांस लेता है आपकी हंसी-ठिठोली से, मस्ती-मज़े से, खिलखिलाहट से और बच्चों की शरारतों से , बुजुर्गों की संतुष्टि से ,घर की स्त्रियों के सम्मान से और पुरुषों के सामर्थ्य से , तो इन्हें भी सहेजकर-सजाकर अपने घर की दीवारों को स्वस्थ रखिये,
"आपका घर सब सुनता है और सब कहता भी है"
इसलिए यदि आप अपने घर में सदा सुख शांति बनाये रखना चाहते हैं तो कलह, नफरत, ईर्ष्या, निंदा, चुगली, झूठा दिखावा आदि बुराइयों को त्यागे।
"यदि आपके घर का वातावरण स्वस्थ्य और प्रफुल्लित होगा तो उसमें रहने वाले लोग भी स्वस्थ और प्रफुल्लित रहेंगे।।"