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Guru Purnima: गुरु पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त

2 Jul 2023

बृहस्पति ग्रह दोष दूर करने के लिए पूजन विधि

आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार 3 जुलाई 2023 सोमवार के दिन रहेगी गुरु पूर्णिमा। इस आषाढ़ी पूर्णिमा का महर्षि वेद व्यास और गुरु की पूजा की जाती है। पूजा करने होगा बृहस्पति ग्रह का दोष दूर।


पूर्णिमा तिथि : शाम 05:08 तक


शुभ मुहूर्त :-

अमृत काल - प्रात: 04:08 से 05:34 तक।

अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:16 से 01:09 तक।

विजय मुहूर्त : दोपहर 02:55 से 03:48 तक।

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:19 से 07:41 तक।


सन्ध्या : शाम 07:20 से 08:25 तक।


शुभ योग-

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ब्रह्म योग - 03 जुलाई दोपहर 03:45 तक रहेगा।

एंद्र योग - 03 जुलाई दोपहर 03:45 से अगले दिन सुबह 11:49 तक रहेगा।

बुधादित्य योग - इस दिन बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य योग रहेगा।


गुरु पूर्णिमा 2023 : किसे बनाएं अपना गुरु?


3 जुलाई 2023 को गुरु पूर्णिमा है। हमें जो भी व्यक्ति कोई शिक्षा या विद्या प्रदान करता है वह हमारा गुरु है, परंतु यदि आप आध्यात्म के मार्ग पर जाना जाहते हैं तो आपको सोच समझकर ही किसी को गुरु बनाना चाहिए। हिन्दू धर्म में किसी को गुरु बनने या गुरु बनाने की एक निश्‍चित प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले दीक्षा दी जाती है।


दीक्षा क्या है?

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दिशाहीन जीवन को दिशा देना ही दीक्षा है। दीक्षा एक शपथ, एक अनुबंध और एक संकल्प है। दीक्षा के बाद व्यक्ति द्विज बन जाता है। द्विज का अर्थ दूसरा जन्म। दूसरा व्यक्तित्व।


दीक्षा के प्रकार कितने?

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हिन्दू धर्म में 64 प्रकार से दीक्षा दी जाती है। जैसे, समय दीक्षा, मार्ग दीक्षा, शाम्भवी दीक्षा, चक्र जागरण दीक्षा, विद्या दीक्षा, पूर्णाभिषेक दीक्षा, उपनयन दीक्षा, मंत्र दीक्षा, जिज्ञासीु दीक्षा, कर्म संन्यास दीक्षा, पूर्ण संन्यास दीक्षा आदि।


क्यों और कब लेना चाहिए दीक्षा?

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दीक्षा लेने का मतलब यह है कि अब आप दूसरे व्यक्ति बनना चाहते हैं। आपके मन में अब वैराग्य उत्पन्न हो चुका है इसलिए दीक्षा लेना चाहते हैं। अर्थात अब आप धर्म के मोक्ष मार्ग पर चलना चाहते हैं। अब आप योग साधना करना चाहते हैं। अक्सर लोग वानप्रस्थ काल में दीक्षा लेते हैं। दीक्षा देना और लेना एक बहुत ही पवित्र कार्य है। इसकी गंभीरता को समझना चाहिए।


स्वयंभू गुरुओं की भीड़?

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यदि आपने किसी स्वयंभू बाबा से दीक्षा ले रखी है जबकि आपका संन्यास या धर्म से कोई नाता नहीं है बल्कि आप उनके प्रवचन, भजन, भंडारे और चातुर्मास के लिए इकट्टे हो रहे हैं और उन्हीं का लाभ कर रहे हैं और उनके लाभ में ही आपका लाभ छुपा हुआ है तो आपको समझना चाहिए कि आप किस रास्ते पर हैं। यह धर्म का मार्ग नहीं है। इससे धर्म की हानि तो हो ही रही है साथ ही आपका भी नुकसान ही होगा।


वर्तमान दौर में अधिकतर नकली और ढोंगी संतों और कथा वाचकों की फौज खड़ी हो गई है और हिंदुजन भी हर किसी को अपना गुरु मानकर उससे दीक्षा लेकर उसका बड़ा-सा फोटो घर में लगाकर उसकी पूजा करता है। उसका नाम या फोटो जड़ित लाकेट गले में पहनता है। संत चाहे कितना भी बढ़ा हो लेकिन वह भगवान या देवता नहीं, उसकी आरती करना, पैरों को धोना और उस पर फूल चढ़ाना धर्म का अपमान ही है। स्वयंभू संतों की संख्‍या तो हजारों हैं उनमें से कुछ सचमुच ही संत हैं बाकी सभी दुकानदारी है।


किसे बनाना चाहिए गुरु?

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यदि हम हिन्दू संत धारा की बात करें तो इस संत धारा को शंकराचार्य, गुरु गोरखनाथ और रामानंद ने फिर से पुनर्रगठित किया था। जो व्यक्ति उक्त संत धारा के नियमों अनुसार संत बनता है वहीं हिंदू संत कहलाने के काबील है।


हिंदू संत बनना बहुत कठिन है क्योंकि संत संप्रदाय में दीक्षित होने के लिए कई तरह के ध्यान, तप और योग की क्रियाओं से व्यक्ति को गुजरना होता है तब ही उसे शैव या वैष्णव साधु-संत मत में प्रवेश मिलता है। इस कठिनाई, अकर्मण्यता और व्यापारवाद के चलते ही कई लोग स्वयंभू साधू और संत कुकुरमुत्तों की तरह पैदा हो चले हैं। इन्हीं नकली साधु्ओं के कारण हिंदू समाज लगातार बदनाम और भ्रमित भी होता रहा है। हालांकि इनमें से कमतर ही सच्चे संत होते हैं।


13 अखाड़ों में सिमटा हिंदू संत समाज पांच भागों में विभाजित है और इस विभाजन का कारण आस्था और साधना पद्धतियां हैं, लेकिन पांचों ही सम्प्रदाय वेद और वेदांत पर एकमत है। यह पांच सम्प्रदाय है - 1.वैष्णव 2.शैव, 3.स्मार्त, 4.वैदिक और पांचवां संतमत।


वैष्णवों के अंतर्गत अनेक उप संप्रदाय है जैसे वल्लभ, रामानंद आदि। शैव के अंतर्गत भी कई उप संप्रदाय हैं जैसे दसनामी, नाथ, शाक्त आदि। शैव संप्रदाय से जगद्‍गुरु पद पर विराजमान करते समय शंकराचार्य और वैष्वणव मत पर विराजमान करते समय रामानंदाचार्य की पदवी दी जाती है। हालांकि उक्त पदवियों से पूर्व अन्य पदवियां प्रचलन में थी।

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राशि के अनुसार इस गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को दें ये चीजें, बनी रहेगी गुरु की कृपा

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साल 2023 में 3 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा. शास्त्रों के अनुसार, गुरु का दर्जा भगवान से भी ऊपर बताया गया है. गुरु को अपने राशि के अनुसार उपहार भेंट करें.


अगर आप भी इस बात से परेशान हैं कि गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को क्या उपहार दें, जिससे आपके गुरु प्रसन्न हों और वह चीज आपके गुरु के दैनिक जीवन में काम आए, तो यह खबर आपके लिए है. गुरु पूर्णिमा का त्योहार हिंदू कैलेंडर के चौथे महीने आषाढ़ में आता है. आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हिंदू धर्म से जुड़े लोगों द्वारा मनाया जाता है. गुरु पूर्णिमा एक ऐसा दिन है जो किसी के आध्यात्मिक और शैक्षिक गुरु को समर्पित है.


शास्त्रों के अनुसार गुरु का दर्जा भगवान से भी ऊपर बताया गया है. ऐसे में साल 2023 में 3 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा, जिसमें लोग अपने आध्यात्मिक और शैक्षिक गुरुओं की पूजा करते हैं और उन्हें समर्पित होकर काम करते हैं. जब आप 3 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का आशीर्वाद लेने जाएंगे तो आप उन्हें कुछ ऐसी चीजें उपहार में दे सकते हैं जो उनकी दिनचर्या में काम आ सकती हैं. ऐसे में लोगों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं कि उन्हें अपने गुरु को कौन सा उपहार देना चाहिए, जिससे वह चीज उनके गुरु के काम आए. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आप अपने गुरु को उनकी राशि के अनुसार उपहार भी दे सकते हैं, जो उन्हें जरूर पसंद आएगा.


*राशि के अनुसार गुरु को दें ये उपहार *

*मेष राशि: खाने की चीजें और मूंगा दान करें.*


*वृषभ राशि: पीले वस्त्र में चने की दाल का दान करने से लाभ मिलेगा.*


*मिथुन राशि: पहनने की वस्तु का दान करना लाभदायक रहेगा.*


*कर्क राशि: चावल, दही आदि का दान करना लाभकारी रहेगा.*


*सिंह राशि: पंच धातुओं से बनी किसी वस्तु का दान करना लाभ देगा.*


कन्या राशि : हीरा, जवाहरात, कोहिनूर आदि कीमती चीजें दान करें।

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राशि के अनुसार गुरु को दें ये उपहार

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*मेष राशि: खाने की चीजें और मूंगा दान करें.*


*वृषभ राशि: पीले वस्त्र में चने की दाल का दान करने से लाभ मिलेगा.*


*मिथुन राशि: पहनने की वस्तु का दान करना लाभदायक रहेगा.*


*कर्क राशि: चावल, दही आदि का दान करना लाभकारी रहेगा.*


*सिंह राशि: पंच धातुओं से बनी किसी वस्तु का दान करना लाभ देगा.*


*कन्या राशि: हीरा, जवाहरात, कोहिनूर आदि कीमती चीजें दान करें.*


*तुला राशि: शॉल, चादर या कंबल आदि का दान करें.*


*धनु राशि: सोना या सोने से बनी कोई वस्तु दान कर सकते हैं.*


*मकर राशि: पीले वस्त्र का दान करना लाभ देगा.*


कुंभ राशि : सफेद वस्तु जैसे सफेद वस्त्र, मोती, चांदी आदि दान कर सकते हैं।


मीन राशि : पीले वस्त्र, हल्दी चने की दाल, बेसन आदि दान करें।


तुला राशि : शॉल, चादर या कंबल आदि का दान करें।


धनु राशि : सोना या सोने से बनी कोई वस्तु दान कर सकते हैं।


मकर राशि : पीले वस्त्र का दान करना लाभ देगा।


कुंभ राशि : सफेद वस्तु जैसे सफेद वस्त्र, मोती, चांदी आदि दान कर सकते हैं।


मीन राशि : पीले वस्त्र, हल्दी चने की दाल, बेसन आदि दान करें।

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