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मिट्टी का शिवलिंग कैसे बनाया जाता है?

3 Aug 2023

कलयुग में मिट्टी के शिवलिंग के पूजन का महत्व

मिट्टी का शिवलिंग कैसे बनाया जाता है, क‍ितना होना चाह‍िए इसका आकार, कैसे करें पूजन


शिवपुराण के अनुसार कलयुग में पार्थिव शिवलिंग का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि जो भी भक्त मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पार्थिव शिवलिंग का पूजन और रुद्राभिषेक करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मिट्टी के शिवलिंग को कहा जाता है पार्थिव शिवलिंग।


कलयुग में मिट्टी के शिवलिंग के पूजन का है विशेष महत्व


शिवलिंग की ऊंचाई 12 अंगुल से अधिक नहीं होनी चाहिए।सभी देवी देवताओं की साकार रूप की पूजा होती है लेकिन भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा साकार और निराकार दोनों रूप में होती है। साकार रूप में भगवान शिव मनुष्य रूप में हांथ में त्रिशूल और डमरू लिए बाघ की छाल पहनें नंदी की सवारी करते हुए नजर आते हैं। शिवपुराण के अनुसार साकार औऱ निराकार दोनों रूपों में महादेव की पूजा फलदायी होती है।


वहीं शिवलिंग की पूजा करना अधिक उत्तम माना गया है। शिव पुराण में भगवान शिव की अराधना के लिए शिवलिंग का विशेष महत्व बताया गया है। शिवलिंग की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और दुखों का निवारण होता है। देवलिंग, असुरलिंग, अर्शलिंग, पुराण लिंग, मनुष्य लिंग, स्वयंभू लिंग कई प्रकार के शिवलिंग होते हैं तथा इनका अलग महत्व और प्रभाव होता है। लेकिन शिवपुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का विशेष महत्व है।


मिट्टी के शिवलिंग को पार्थिव शिवलिंग कहा जाता है। मिट्टी का शिवलिंग गाय के गोबर, गुड़, मक्खन, भस्म, मिट्टी और गंगा जल मिलाकर बनाया जाता है। पार्थिव शिवलिंग बनाते समय इन सभी चीजों को एक में मिला दें और फिर गंगाजल मिलाकर बनाएं। ध्यान रहे मिट्टी का शिवलिंग बनाते समय पवित्र मिट्टी का इस्तेमाल करें। कोशिश करें की बेल के पेड़ की मिट्टी या फिर चिकनी मिट्टी का सेवन करें।


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शिवलिंग की ऊंचाई


शिवलिंग बनाते समय ध्यान रहे कि यह 12 अंगुल से बड़ा नहीं होना चाहिए तथा अंगुष्ट से छोटा भी नहीं होना चाहिए। इससे आप विशष्ट रुद्राभिषेक भी करा सकते हैं।


पार्थिव शिवलिंग का महत्व


शिव महापुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों का निवारण होता है तथा सुख समृद्धि और पुत्र की प्राप्ति होती है। कलयुग में मोक्ष प्राप्ति के लिए और व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए मिट्टी के शिवलिंग को उत्तम बताया गया है।


कहा जाता है कि जो भी भक्त मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पार्थिव शिवलिंग का पूजन और रुद्राभिषेक करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विशेष फल की प्राप्ति होती है। शिवपुराण में पार्थिव शिवलिंग का विशेष महत्व है।


महादेव से मनचाहा वरदान दिलाती है पार्थिव पूजा, सावन में करने से पहले जान लें इसकी विधि और नियम


भगवान शिव की पूजा के लिए जिस सावन के महीने को सबसे ज्यादा शुभ और उत्तम माना गया है, उसमें पार्थिव पूजा  का क्या महत्व होता है| हिंदू धर्म में भगवान शिव को कल्याण का देवता माना गया है. जिनकी साधना के लिए श्रावण मास ही शुभ माना गया है. ऐसे में भोले के भक्त अपने आराध्य महादेव  की तमाम तरह से पूजा करके उनको प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं. कोई उनके साकार स्वरूप यानि मूर्ति की पूजा करता है तो कोई उनके निराकार स्वरूप यानि शिवलिंग की पूजा करता है|


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पार्थिव पूजन से जुड़ी पौराणिक कथा


मान्यता है कि भगवान शिव का पार्थिव पूजन सबसे पहले भगवान राम ने किया था. मान्यता है कि भगवान श्री राम ने लंका पर कूच करने से पहले भगवान शिव की पार्थिव पूजा की थी.

मान्यता है कि कलयुग में भगवान शिव का पार्थिव पूजन कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने किया था. जिसके बाद से अभी तक शिव कृपा बरसाने वाली पार्थिव पूजन की परंपरा चली आ रही है. मान्यता यह भी है कि शनिदेव ने अपने पिता सूर्यदेव से ज्यादा शक्ति पाने के लिए काशी में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा की थी.


पार्थिव शिवलिंग की पूजा के लाभ


मान्यता है कि सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने पर व्यक्ति के जीवन से जुड़ी बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर और कामनाएं पूरी होती हैं. पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने वाले शिव साधक के जीवन से अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है. शिवपुराण के अनुसार पार्थिव पूजा करने वाले साधक को भगवान शिव के आशीर्वाद से धन-धान्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और वह सभी सुखों को भोगता हुआ अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है.


पार्थिव शिवलिंग की पूजा विधि


सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग की पूजा के लिए किसी पवित्र स्थान की मिट्टी को लेकर उसमें गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाएं. इसके बाद उसे पानी से सानकर शिवलिंग बना लें. यदि संभव हो तो गंगा नदी की मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाना चाहिए. पार्थिव शिवलिंग को हमेशा अंगूठे के बराबर छोटा ही बनाने का प्रयास करना चाहिए और किसी भी सूरत में 12 अंगुल से ऊंचा नहीं बनाना चाहिए|


पार्थिव शिवलिंग के पूजन से नष्ट हो जाता है अकाल मृत्यु का भय


सावन का महीना चल रहा है और हर तरफ ॐ नमः शिवाय की गूंज है. मंदिरों से लेकर घरों तक हर दिशा में हर स्थान पर शिवमय वातावरण छाया हुआ है. मंदिरों में भव्य रुद्राभिषेक और आलौकिक शिव श्रृंगार देखने के लिए लोग हमेशा तत्पर रहते हैं और भोलेनाथ की झलक पाते ही अत्यंत सुख से आनंदित हो उठते हैं. लेकिन कभी कभार मंदिरों में भीड़ के चलते या अन्य किन्हीं कारणों से भक्त मंदिर नहीं जा पाते और भगवान भोलेनाथ के दर्शनों से वंचित रह जाते हैं|

ऐसे में अगर हम आपसे ये कहें कि अब देवादि देव महादेव स्वयं आपके घर पर विराजेंगे तो. अब आप महादेव के आशीर्वाद से वंचित नहीं रहेंगे तो. जी हां, आज हम आपके और महादेव के बीच की दूरी को कम करने आये हैं. अब अगर आप किसी भी वजह से शिव शंभू के दर्शन हेतु मंदिर नहीं जा पाते हैं तब भी आप भगवान शिव का आशीष पा सकेंगे|

आज हम आपको आचार्य सतीश नागर जी की मदद से पार्थिव शिवलिंग बनाने की पूर्ण विधि बताने जा रहे हैं. साथ ही, हम आपको पार्थिव शिवलिंग का महत्व और उसका पूजा विधान भी विस्तार से बताएंगे|


पार्थिव शिवलिंग बनाने की विधि

पार्थिव शिवलिंग मिट्टी , जल , भस्म , चन्दन , शहद आदि को मिश्रित (मिलाकर) करके अपने हाथों से निर्मित किया जाना चाहिए , इसके लिए छानी हुई शुद्ध मिट्टी, गाय का गोबर, गुड़, मक्खन , शहद ,चन्दन और भस्म मिलाकर शिवलिंग का निर्माण करें. शिवलिंग की ऊँचाई 12 अंगुल से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए. पार्थिव शिवलिंग के पूजन से जन्म -जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं|


अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है. अपार शिव कृपा की प्राप्ति होती है|


सावन में शिव भक्ति विशेष महत्व रखती है अत: सावन में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर उसकी पूजा अर्चना करना बहुत मंगलकारी माना गया है. बता दें कि, "कलयुग में कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने पार्थिव पूजन का प्रारंभ किया था."


पार्थिव शिवलिंग की पूजा का महत्व


शिव महा पुराण में 'विद्येश्वरसंहिता' के 16वे अध्याय में दिए गए श्लोक "अप मृत्युहरं कालमृत्योश्चापि विनाशनम। सध:कलत्र-पुत्रादि-धन-धान्य प्रदं द्विजा:।" के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा से तत्क्षण (तुरंत ही) जो कलत्र पुत्रादि यानी कि घर की बहु, पुत्र वधु जो होती है वो शिव शंभू की कृपा से घर में धन धान्य लेकर आती है और इस लोक में सभी मनोरथ को भी पूर्ण करती है. गृह लक्ष्मी द्वारा की गई पार्थिव शिवलिंग की पूजा अकाल मृत्यु को भी टालती है|


बता दें कि, इस पूजा को स्त्री पुरुष सभी कर सकते हैं. शिवपुराण के अनुसार, पार्थिव पूजन से धन-धान्य, आरोग्य के साथ ही पुत्र की प्राप्ति होती है. जो दम्पति पुत्र प्राप्ति के लिए कई वर्षों से तड़प रहे हैं, उन्हें पार्थिव लिंग का पूजन अवश्य करना चाहिए|


पार्थिव लिंग के पूजन से अकाल मृत्यु का भय भी खत्म हो जाता है. शिवजी की आराधना के लिए पार्थिव पूजन सभी लोग कर सकते हैं|


पंडित सतीश नागर उज्जैन

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