
5 Dec 2022
वास्तुशास्त्र में दिए गए हैं दीपक जलाने के नियम...
हमारे धार्मिक शास्त्र के अनुसार हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाए जाते हैं। सुबह-शाम होने वाली पूजा में भी दीपक जलाने की परंपरा है।
वास्तुशास्त्र में दीपक जलाने व उसे रखने के संबंध में कई नियम बताए गए हैं। दीपक की लौ की दिशा किस ओर होनी चाहिए, इस संबंध में वास्तुशास्त्र में पर्याप्त जानकारी मिलती है। वास्तुशास्त्र में यह भी बताया गया है कि दीपक की लौ किस दिशा में होने पर उसका क्या फल मिलता है।
1. पूर्व दिशा - दीपक की लौ पूर्व दिशा की ओर रखने से आयु में वृद्धि होती है। किसी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाते समय इस मंत्र का जप करने से शीघ्र ही सफलता मिलती है -
मंत्र- दीपज्योति: परब्रह्म:
दीपज्योति: जनार्दन:
दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते...
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां
शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति...
2. पश्चिम दिशा - दीपक की लौ पश्चिम दिशा की ओर रखने से दु:ख बढ़ता है।
मंत्र- शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति...
3. उत्तर दिशा - दीपक की लौ उत्तर दिशा की ओर रखने से धनलाभ होता है। किसी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाते समय इस मंत्र का जप करने से शीघ्र ही सफलता मिलती है-
मंत्र- दीपज्योति: परब्रह्म:
दीपज्योति: जनार्दन:
दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते...
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां
शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति...
4. दक्षिण दिशा- दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर रखने से हानि होती है। यह हानि किसी व्यक्ति या धन के रूप में भी हो सकती है। किसी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाते समय इस मंत्र का जप करने से शीघ्र ही सपलता मिलती है।
मंत्र- दीपज्योति: परब्रह्म:
दीपज्योति: जनार्दन:
दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते...
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां
शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति...
घर में सुबह-शाम दीपक जलाने की परंपरा, इससे दूर होते हैं वास्तु दोष और बढ़ती है सकारात्मकता
घर के मंदिर में रोज सुबह-शाम दीपक जलाने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। जो लोग विधिवत पूजा नहीं कर पाते हैं, वे दीपक जरूर जलाते हैं। घी या तेल का दीपक जलाने से धार्मिक लाभ मिलता है। वास्तु दोष दूर होते हैं। उज्जैन के आचार्य पंडित सतीश नागर के अनुसार दीपक जलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो पूजा जल्दी सफल हो सकती है।
जानिए दीपक से जुड़ी खास बातें...
अगर नियमित रूप से दीपक जलाया जाता है तो घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है। वास्तु दोष बढ़ाने वाली नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। दीपक के धुएं से वातावरण में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं। दीपक अंधकार खत्म करता है और प्रकाश फैलाता है। मान्यता है देवी-देवताओं को दीपक की रोशनी विशेष प्रिय है, इसीलिए पूजा-पाठ में दीपक अनिवार्य रूप से जलाया जाता है।
रोज शाम के समय मुख्य द्वार के पास दीपक लगाना चाहिए। ये दीपक घर में नकारात्क ऊर्जा के प्रवेश को रोकता है।
पूजा में घी का दीपक अपने बाएं हाथ की ओर जलाना चाहिए। तेल का दीपक दाएं हाथ की ओर रखना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। दीपक हमेशा भगवान की प्रतिमा के ठीक सामने लगाना चाहिए।
घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है। पूजन में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है।
दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए- मंत्र- शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते।।
इस मंत्र का सरल अर्थ यह है कि शुभ और कल्याण करने वाली, आरोग्य और धन संपदा देने वाली, शत्रु बुद्धि का विनाश करने वाली दीपक की ज्योति को नमस्कार है।
शास्त्रों की मान्यता है कि मंत्र जाप के साथ दीपक जलाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वास्तु दोष दूर होते हैं।
देवी-देवताओं के सामने दीपक लगाने से पहले रखें ध्यान, तभी मिलेगा पुण्य लाभ
देवपूजा में दीपक का बड़ा महत्व माना गया है। सामान्यत: घी या तेल का दीपक जलाने की परम्परा रही है। पूजा के समय दीपक कैसा हो, उसमें कितनी बत्तियां हों यह जानना भी बेहद जरूरी है। यही जानकारी उस देवता की कृपा और अपने उद्देश्य की पूर्ति का कारण बनती है।
दीपक और ग्रह स्वामियों पर पडऩे वाला प्रभाव
किसी भी प्रकार का आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए नियम से अपने घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए। अगर जातक शत्रु पीड़ा से पीड़ित हों तो सरसों के तेल का दीपक भैरव जी के समक्ष जलाना ठीक रहता है।
भगवान सूर्य की प्रसन्नता और कृपा के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनि तिल के तेल का दीपक जलाने से प्रसन्न होते हैं। पति की आयु के लिए महुए का तेल और राहू-केतु ग्रह की शांति के लिए अलसी के तेल का दीपक जलाना चाहिए। किसी भी देवी या देवता की पूजा में शुद्ध गाय का घी या एक फूल बत्ती या तिल के तेल का दीपक आवश्यक रूप से प्रज्वलित करना चाहिए। विशेष रूप से भगवती जगदम्बा, दुर्गा देवी की आराधना के समय दोमुख घी वाला दीपक माता सरस्वती की आराधना के समय और शिक्षा प्राप्ति के लिए जलाना चाहिए।
भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति के लिए तीन बत्तियों वाला घी का दीपक जलाएं। भैरव साधना के लिए चौमुखा सरसों के तेल का दीपक जलाना ठीक रहता है। मुकद्दमा जीतने और भगवान कार्तिक की प्रसन्नता के लिए पंचमुखी दीपक प्रभावी होते हैं। भगवान कार्तिक की प्रसन्नता के लिए गाय का शुद्ध घी प्रयोग में लें और पीली सरसों का दीपक जलाएं। आठ और बारह मुखी दीपक भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए होते हैं। इन्हें पीली सरसों के तेल में प्रज्वलित करना चाहिए। लक्ष्मी जी की प्रसन्नता के लिए सात मुखी घी का दीपक और भगवान विष्णु की दशावतार आराधना के समय दस मुखी दीपक जलाने चाहिएं।
पूजा और दीपक के प्रकार
इष्ट सिद्धि, ज्ञान प्राप्ति के लिए गहरा और गोल दीपक प्रयोग में लें। शत्रु नाश, आपत्ति निवारण के लिए मध्य में से ऊपर उठा हुआ दीपक इस्तेमाल करें।
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए दीपक सामान्य गहरा होना चाहिए। हनुमान जी की प्रसन्नता के लिए त्रिकोने दीपक का प्रयोग करें। दीपक मिट्टी, आटा , ताम्बा, चांदी, लोहा, पीतल और स्वर्ण धातु के हो सकते हैं लेकिन मूंग, चावल, गेहूं, उड़द और ज्वार को समान मात्रा में लेकर इसके आटे से बनाया दीपक सर्वश्रेष्ठ होता है। किसी-किसी साधना में अखंड जोत जलाने का भी विशेष विधान है जिसे शुद्ध गाय के घी और तिल के तेल के साथ भी जलाएं।
घर के मंदिर में कितने दीपक जलाने चाहिए ?
वैसे तो घर के मंदिर में एक दीपक जलाना ही पर्याप्त होता है। ईश्वर के समक्ष दीपक जलाकर हम अपने जीवन की अनेक समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं।
आईए जाने कैसे -
● गणेशजी के सम्मुख घी का तीन बातियों वाला तीन मुखी दीपक जलाने से विद्या-बुद्धि की प्राप्ति होती है और यश-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
●.मां सरस्वती जी के सम्मुख घी या तिल के तेल का दो बातियों वाला दीपक जलाने से उत्तम शिक्षा की प्राप्ति होती है और शिक्षा के क्षेत्र में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
●.श्री लक्ष्मीनारायण के सम्मुख मौली की बाती का घी का दीपक हल्दी एवं सिन्दूर डालकर जलाने से जीवन में तरक्की एवं सफलता प्राप्त होती है।
●.धन-सम्पदा प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी जी के सम्मुख सात मुखी दीपक जलाना चाहिए।
●. भोलेनाथ शिव जी की कृपा प्राप्त करने के लिए सरसों के तेल का आठ या बारह मुखी दीपक जलाना चाहिए।
●. शिवलिंग के समक्ष तिल के तेल के तीन दीपक जलाने से सम्पूर्ण कष्टों का निवारण होता है और दुख-दारिद्रय दूर होता है।
●घर के मंदिर में पांच मुखी दीपक जलाने से कोर्ट- कचहरी, मुकदमा आदि से छुटकारा मिलता है और कानूनी मामलों में जीत हासिल होती है।
●. हनुमान जी के सम्मुख आठ बातियों वाला तिल के तेल का दीपक अथवा लाल बाती वाला चमेली के तेल का तीन मुखी दीपक जलाने से अनजाने भय से मुक्ति मिलती है तथा सभी संकट दूर होते हैं।
●.शनिदेव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
●. राहु-केतु को प्रसन्न करने के लिए अलसी के तेल का दीपक जलाना चाहिए। ||ॐ||
जिस घर में प्रातः - सायं दीपक नहीं जलता उस घर से दूर रहने की सलाह क्यों दी जाती है?
मंत्रों से दीपक कैसे जलता है?
घर के बाहर मध्य रात को दीपक क्यों जलना चाहिऐ
विष्णु भगवान को प्रसन्न करने के लिए इनके सामने प्रतिदिन सोलह बत्तियों का दीपक जलाना चाहिए. अगर आप विष्णु भगवान के दशावतार की पूजा करते हैं तो इन्हें प्रसन्न करने के लिए दस मुख वाला दीपक जलाना चाहिए.
इष्ट सिद्धि के लिए तथा ज्ञान प्राप्त करने के लिए एक गहरा और गोल दीपक प्रज्वलित करना चाहिए.
जिस घर में प्रातः - सायं दीपक नहीं जलता उस घर से दूर रहने की सलाह क्यों दी जाती है?
जिन घरों में नियमित तौर पर प्रातः और सायं काल दीपक पूजास्थल और तुलसी जी के पास, घर के मुख्य द्वार पर अन्य स्थानों जहां पर अंधकार रहता हो नहीं जलाया जाता है, तो वहां नकारत्मक शक्तियों का प्रकोप होता है जिससे आपके घर और आस पास में अशांति और भय बढ़ता है। स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता है, तनाव, क्रोध, चिंता, बच्चों का व्यवहार आक्रामक , पैसे ना बचना, भय, शोक, समस्त प्रकार के दुखों का आगमन हो जाता है।
और जहां नियमित दीपक जलते हैं वहां तो प्रभु स्वयं उपस्थित रहते हैं :-
इसे आप पूजा करने का एक तरीका भी मान सकते हैं. हिंदू धर्म में पूजा करते वक्त लोग देसी घी या सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं.
हालांकि पूजा के लिए भगवान के सामने दीपक जलाना सिर्फ पूजा का एक तरीका ही नहीं है बल्कि घर में दीया जलाना कई तरह से फायदेमंद भी है.
चलिए हम आपको बताते हैं सुबह और शाम के वक्त हर रोज घर में दीपक जलाने के लाभ :-
दीपक जलाने के लाभ :-
अंधकार होता है दूर
घर में सुबह और शाम के वक्त दीपक जलाने से घर का अंधकार दूर होता है. दीपक घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और वहां सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. तेल से जले दीपक का प्रभाव उसके बूझने के आधे घंटे बाद तक वातावरण में बना रहता है जबकि घी का दीपक बूझने के बाद करीब चार घंटे तक वातावरण को सकारात्मक रखता है.
- शुभ शक्तियां होती हैं आकर्षित
सनातन धर्म के अनुसार जिस घर में सुबह शाम दीपक जलता है वहां कभी अंधकार नहीं होता और उस घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. इतना ही नहीं जलता हुआ दीया शुभ शक्तियों को चुंबक की तरह अपनी तरफ खींचता है.
- हानिकारक कणों का होता है नाश
दीपक जलाना ना सिर्फ धार्मिक नजरिए से फायदेमंद है बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह फायदा पहुंचाता है. जब घर में शुद्ध घी या सरसों के तेल से दीपक जलाया जाता है तो उसके धुएं से घर के माहौल में सात्विकता आती है और इससे आसपास के वातावरण में मौजूद हानिकारक कणों का भी नाश होता है.
- बीमारियों को दूर भगाने में मददगार
घर में सुबह और शाम के वक्त दीया जलाने से बीमारियां घर-परिवार के सदस्यों से दूर भागती हैं. खासकर दीपक के साथ एक लौग जलाने से इसका असर दोगुना हो जाता है. घी में चर्मरोग दूर करने के सारे गुण मौजूद होते हैं इसिएल घी का दीया जलाना सेहत के लिहाज से काफी फायदेमंद है.
- घर में होता है सुख-समृद्धि का वास
जिस घर में सुबह और शाम के वक्त भगवान के सामने दीपक जलाया जाता है उस घर पर हमेशा लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, ऐसे घरों में सुख-समृद्धि का वास होता है. मान्यता है कि दीपक की लौ पूर्व दिशा में रखने से व्यक्ति दीर्घायु होता है जबकि उत्तर दिशा में लौ रखने से घर में धन और प्रसन्नता बढ़ती है.
ये है दीपक जलाने के फायदे -
दीपक ना सिर्फ हमारे घर के अंधकार को दूर करता है बल्कि ये हमारे जीवन को भी अंधकार से प्रकाश की तरफ बढ़ाता है. इसलिए घर में सुबह और शाम के वक्त दीपक जरूर जलाना चाहिऐ