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इसलिए कन्या पूजन में रखा जाता है कन्याओं की उम्र का ध्यान एवं अपनी राशि अनुसार दे कन्याओं को यह उपहार

2 Oct 2022

प्रत्येक वर्ष नवरात्र पर्व के अष्टमी और नवमी तिथि के दिन हिन्दू घरों में कन्या पूजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सभी प्रकार के दुःख दूर हो जाते हैं।

इसलिए कन्या पूजन में रखा जाता है कन्याओं की उम्र का ध्यान

हिन्दू धर्म में नवरात्र महापर्व के अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन का विधान है। इस दिन 10 वर्ष से कम उम्र की नौ कन्याओं को घर पर आमंत्रित कर भोजन कराने की प्रथा है। मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन के दिन कन्या और बटुक की पूजा करने से मां भगवती प्रसन्न होती हैं और धन-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। बता दें कि शास्त्रों में आयु के अनुसार कन्या पूजन के महत्व को भी विस्तार से वर्णित किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि इस दिन आयु के अनुसार कन्याओं को भोग लगाने से भक्तों को विशेष लाभ होता है।


आइए जानते हैं कन्या पूजन में क्या है कन्याओं के आयु का महत्व।


कन्या पूजन तिथि

शास्त्रों के अनुसार नवरात्र महापर्व के अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है।

पंचाग के अनुसार इस वर्ष अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर व नवमी तिथि 4 अक्टूबर के दिन पड़ रही है।


इस दिन शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करने से व्यक्ति को विशेष लाभ होता है।


आयु के अनुसार कन्या पूजन का महत्व


2 वर्ष- 2 वर्ष की छोटी कन्या का पूजन करने से दुःख, दरिद्रता और कई प्रकार की समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। साथ ही घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस आयु की कन्या को कुमारी कहा जाता है।


3 वर्ष- 3 वर्ष आयु की कन्या का पूजन करने से घर-परिवार में शांति आती है और धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। बता दें कि तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति के नाम से जाना जाता है।


4 वर्ष- 4 वर्ष की कन्या का पूजन करने से व्यक्ति को बहुत लाभ होता है। ऐसा करने से उसे बुद्धि, विद्या और राज सुख की प्राप्ति होती है। इसके साथ 4 वर्ष की कन्या को देवी कल्याणी का स्वरूप माना जाता है।


5 वर्ष- शास्त्रों के अनुसार नवरात्र महापर्व में 5 वर्ष की कन्या का पूजन करने से व्यक्ति को गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। बता दें कि 5 वर्ष की कन्या को रोहिणी के रूप में जाना जाता है।


6 वर्ष- नवरात्र में 6 वर्ष की कन्याओं का पूजन करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इनकी पूजा करने से शत्रु पर विजय प्राप्त होती है। साथ ही अपारशक्ति की प्राप्ति भी होती है। 6 वर्ष की कन्या कालिका के रूप में जानी जाती हैं।


7 वर्ष- नवरात्र महापर्व में 7 वर्ष की कन्या की उपासना करने से और उन्हें भोग लगाने से धन और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है। आपको बता दें कि 7 साल की कन्या को चंडिका के रूप में पूजा जाता है।


8 वर्ष- 8 वर्ष की कन्याओं का पूजन करने से कोर्ट कचहरी के मामले जल्दी सुलझ जाते हैं और आपसी विवाद से भी मुक्ति प्राप्त होती है शास्त्रों के अनुसार 8 साल की कन्या को देवी शांभवी का स्वरूप माना जाता है।


9 वर्ष- मां दुर्गा को समर्पित नवरात्रि महापर्व में अष्टमी अथवा नवमी तिथि को नौ वर्ष की कन्या का पूजन करने से कष्ट, दोष से मुक्ति प्राप्त होती है। साथ ही ऐसा करने से परलोक की प्राप्ति भी होती है। नौ वर्ष की कन्या को स्वयं देवी दुर्गा का रूप माना जाता है।


10 वर्ष- कन्या पूजन के दिन 10 वर्षीय कन्या की पूजा करने से सभी बिगड़े काम सफल हो जाते हैं और मनोकामना पूर्ण होती है। इन्हें माता सुभद्रा का स्वरूप माना जाता है।


आइये जानते है नवरात्रि में कन्याओं का पूजन करने के लाभ एवं कन्या पूजन में कन्याओं का नवदुर्गा रूप ..........


सनातन धर्मग्रन्थों में कन्या-पूजन को नवरात्र-व्रत का अनिवार्य अंग बताया गया है। छोटी बालिकाओं में देवी दुर्गा का रूप देखने के कारण श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

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दो वर्ष की कन्या को “कुमारी” कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके पूजन से दुख और दरिद्रता समाप्त हो जाती है।

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तीन वर्ष की कन्या “त्रिमूर्ति” मानी जाती है। त्रिमूर्ति के पूजन से धन-धान्य का आगमन और संपूर्ण परिवार का कल्याण होता है।

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चार वर्ष की कन्या “कल्याणी” के नाम से संबोधित की जाती है। कल्याणी की पूजा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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पांच वर्ष की कन्या “रोहिणी” कही जाती है। रोहिणी के पूजन से व्यक्ति रोग-मुक्त होता है।

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छ: वर्ष की कन्या “कालिका” की अर्चना से विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है।

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सात वर्ष की कन्या “चण्डिका” के पूजन से ऐश्वर्य मिलता है।

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आठ वर्ष की कन्या “शाम्भवी” की पूजा से वाद-विवाद में विजय तथा लोकप्रियता प्राप्त होती है।

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नौ वर्ष की कन्या "दुर्गा" की अर्चना से शत्रु का संहार होता है तथा असाध्य कार्य सिद्ध होते हैं।

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दस वर्ष की कन्या “सुभद्रा” कही जाती है। सुभद्रा के पूजन से मनोरथ पूर्ण होता है तथा लोक-परलोक में सब सुख प्राप्त होते हैं।


नवरात्र में राशि के अनुसार कन्‍या भोज कराने से मिलता है यह विशेष लाभ


वासंतिक नवरात्र में किसी भी दिन अपनी राशियों के अनुसार कन्‍या भोज कराने का विशेष लाभ मिलता है। कहा जाता है कि इससे आपकी राशि के सभी दोष दूर होते हैं और मां की कृपा आपके ऊपर बनी रहती है।


पंडित सतीश नागर जी बताते हैं कि जिस प्रकार से कल्‍पवृक्ष की पूजा करने से समस्‍त मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उसी प्रकार से अपनी राशि के अनुसार कन्‍याओं को भोज कराने और उपहार देने से जीवन से सभी परेशानियों का निवारण हो जाता है।

तो आइए जानते हैं किस राशि के जातक को कन्‍या भोज में किस तरह का भोग लगाना चाहिए और कौन सा उपहार देना चाहिए...


नवरात्र में राशि के अनुसार कन्‍या भोज कराने से मिलता है यह विशेष लाभ


मेष राशि: यह वस्‍तु दें उपहार में

इस राशि के जातक कन्‍याओं को गुड़ या फिर किसी मीठी वस्‍तु का प्रसाद खिलाएं और उपहार में पेन दें। इससे मातारानी प्रसन्‍न होती हैं और धन-धान्‍य का आर्शीवाद देती हैं।


वृषभ राशि: मिलेगी मातारानी की कृपा

इस राशि के जातकों को कन्‍याओं को भोजन में घी डालकर प्रसाद देना चाहिए। साथ ही उपहार में खिलौना भेंट करना चाहिए। ऐसे करने से मातारानी की कृपा हमेशा बनी रहती है।


मिथुन राशि: इस धातु का करें दान

कन्‍याओं को गुड़ का भोग लगाएं। तांबे का बर्तन दान करें। कहते हैं कि ऐसा करने वालों पर मांं दुर्गा बहुत ही प्रसन्‍न होती हैं और सुख-समृद्धि का वरदान देती हैं।


कर्क राशि: लक्ष्‍मी की नहीं होगी कमी

इस राशि के जातक कन्‍याओं को खीर-पूड़ी का प्रसाद खिलाएं। साथ ही दान में रुमाल दें। इससे उनके घर में कभी भी लक्ष्‍मी की कमी नहीं होगी।


सिंह राशि: यह वस्‍तु दान में दें

इस राशि वाले लोग कन्‍याओं को खट्टी वस्‍तुओं का प्रसाद खिलाएं। साथ ही दान में लोहे की कोई भी वस्‍तु दें। कहते हैं कि ऐसा करने से मां आपके सारे कष्‍टों को दूर कर देती हैं।


कन्‍या राशि : इन चीजों से बने व्‍यंजन खिलाएं

कन्‍या राशि के जातकों को कन्‍याओं को गन्‍ने के रस से बनीं चीजों का भोग खिलाना चाहिए। साथ ही दान में अनार का फल देना चाहिए। इससे मातारानी की कृपादृष्टि आप पर बनी रहती है।


तुला राशि: इस वस्‍तु का दान करें

इस राशि के लोगों को कन्‍याओं को मखाने की खीर खिलाकर नारियल का दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में कभी भी अनाज की कमी नहीं होती।


वृश्चिक राशि: दूर होंगे सारे दुख

इस राशि के जात‍क कन्‍याओं को सूखे मेवे से बना प्रसाद खिलाएं। दान में पांच प्रकार के फल दें। कहा जाता है कि ऐसा करने से मां आपके सारे दु:खों को दूर करती हैं।


धनु राशि: ऐसा करने से मिलेगी सफलता

इस राशि के जातकों को कन्‍याओंं को दही-जलेबी का प्रसाद खिलाना चाहिए। दान में विद्या संबंधित कोई भी वस्‍तु दें। ऐसा करने से आपको जीवन में सफलता ही सफलता मिलती है।


मकर राशि: धन-धान्‍य की कमी नहीं होगी

इस राशि के जातकों को मालपुॅए का प्रसाद खिलाना चाहिए। साथ ही वस्‍त्रों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से आपके घर में कभी भी धन-धान्‍य की कमी नहीं होगी।


कुंभ राशि: दान में दें यह वस्‍तु

इस राशि के लोगों को कन्‍याओं को दूध से बनी चीजों का प्रसाद खिलाना चाहिए। साथ ही दान में शंख देना चाहिए।


मीन राशि: श्रृंगार का सामान दान करें

इस राशि के जातकों को प्रसाद में हलुवा-चना और पूड़ी खिलानी चाहिए। साथ ही दान में श्रृंगार का कोई भी सामान दे सकते हैं। ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

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