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त्योहारों से पहले ही इन राशियों के हाथ लगेगा कुबेर का खजाना

17 Oct 2022

मंगल-शनि की युति कराएगी तगड़ा धन लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह को एक राशि से दूसरी राशि में जानें में कुल 45 दिन का समय लगता है.


ऐसें 16 अक्टूबर को मंगल मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे.


मंगल ग्रह को सभी ग्रहों का सेनापति ग्रह माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर ग्रह अपने निश्चित अंतराल पर राशि परिवर्तन करता है. मंगल ग्रह 45 दिन बाद राशि परिवर्तन करता है. इस समय मंगल वृषभ राशि में विराजमान हैं और 16 अक्टूबर को वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे. मिथुन राशि में पहले से ही शनि देव विराजमान हैं और मंगल के वहां प्रवेश करने से षडाष्टक योग का निर्माण हो रहा है.


आइए जानें मंगल का ये राशि गोचर किन राशि के जातकों के लिए विशेष फलदायी रहने वाला है.


मंगल का मिथुन राशि मे गोचर का किस राशि को होगा लाभ


मेष राशि- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह अपने शुत्र ग्रह बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करने जा रहे हैं. ऐसे में कुछ राशि वालों को विशेष रूप से लाभ होता नजर आ रहा है. इसमें मेष राशि के जातक भी शामिल हैं. बता दें कि इस राशि के तृतीय भाव में गोचर करने जा रहे हैं. इस समय आप अत्याधिक धैर्यवान और साहसी बनेंगे. कई कार्यों में सफलता पाएंगे. इतना ही नहीं, वरिष्ठ अधिकारी आपके काम की सराहना करेंगे. और आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा.


सिंह राशि- बता दें कि मंगल इस राशि के एकादशी भाव में गोचर करने जा रहे हैं. इस स्थिति में आपको अनुकूल परिणामों की प्राप्ति होगी. आर्थिक जीवन में उन्नति मिलेगी. इतना ही नहीं, इस दौरान सुख-सुविधाओं में भी बढ़ोतरी होगी. इस समय आप सबसे ज्यादा ऊर्जावान महसूस करेंगे.


मकर राशि- बता दें कि मंगल का ये गोचर इस राशि के षष्टम भाव में होने जा रहा है. इस दौरान शत्रुओं पर विजय पाने में सफल होंगे. आय में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं. इतना ही नहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन देने में सफल होंगे. बिजनेस में तरक्की और सफलता पाएंगे.


मीन राशि- बता दें कि मंगल इस समय मीन राशि की गोचर कुंडली में चतुर्थ भाव में गोचर करने जा रहे हैं. इस अवधि में आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. धन जोड़ने में सफलता पाएंगे. परिवार का माहौल सुध होगा और परिवार का सहयोग मिलेगा.


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मंगल का राशि परिवर्तन


मंगल का राशि परिवर्तन का सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ता है।


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मंगल गोचर के प्रभाव से कई राशि वालों को तरक्की के साथ धन लाभ होने के संकेत दिख रहे हैं। जानें मंगल राशि परिवर्तन का सभी राशियों पर प्रभाव-


मेष- मेष राशि के दूसरे भाव में मंगल विराजमान होने से आपको आर्थिक मोर्चे पर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। छात्रों के लिए समय अनुकूल रहेगा। यात्रा के योग बन रहे हैं।


वृषभ- मंगल आपकी राशि के लग्न भाव में होने से आपको माता-पिता का सहयोग प्राप्त होगा। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बीतेगा। पैसों के मामले में सावधानी बरतें।


मिथुन- मिथुन राशि वालों के 12वें भाव में मंगल का गोचर होने से आपके खर्चों में वृद्धि हो सकती है। पार्टनरशिप के काम में मुश्किलें आ सकती हैं।


कर्क- मंगल का गोचर कर्क राशि के 11वें भाव में हुआ है। इस दौरान नौकरी पेशा करने वाले जातकों को कार्यस्थल पर प्रशंसा मिल सकती है। प्रमोशन के योग बनेंगे।


सिंह- आपकी राशि के 10वें भाव में मंगल गोचर होने से कार्यक्षेत्र में सफलता हासिल होगी। व्यापार में मुनाफा हो सकता है। शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा।


कन्या- कन्या राशि के नवम भाव में मंगल गोचर बेहद लाभकारी माना जा रहा है। मंगल गोचर की अवधि में आपको आकस्मिक धन लाभ हो सकता है। भाई-बहन का सहयोग मिलेगा।


तुला- तुला राशि के 8वें भाव में मंगल गोचर अशुभ माना जा रहा है। इस दौरान आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वाणी पर काबू रखें।


वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों के सातवें भाव में मंगल गोचर बेहद व्यापारिक दृष्टि से लाभकारी माना जा रहा है। इस दौरान जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें।


धनु- धनु राशि के छठवें भाव में मंगल गोचर शत्रुओं पर विजय दिला सकता है। परीक्षा में सफलता दिलाएगा। खर्चों में वृद्धि के योग बनेंगे। नौकरी में मिश्रित परिणाम प्राप्त होंगे।


मकर- मकर राशि के पांचवें भाव में मंगल गोचर लाभकारी माना जा रहा है। इस दौरान नौकरी में तरक्की मिल सकती है। व्यापारियों को लाभ होगा।


कुंभ- कुंभ राशि के चौथे भाव में मंगल गोचर होने से जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे। माता की सेहत का ध्यान रखें। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। कार्यक्षेत्र में बदलाव की संभावना है।


मीन- मीन राशि के तीसरे भाव में मंगल गोचर आपके साहस व पराक्रम में वृद्धि करेगा। इस दौरान आपको नौकरी व व्यापार में अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।


शनि की साढ़ेसाती और मंगल दोष मात्र शहद के इस उपाय से दूर हो जाएंगे


यदि आपकी कुंडली में शनि नीच का होकर बैठा है या शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैय्या चल रही है तो लाल किताब के अनुसार शहद का अचूक उपाय करें और यदि आपकी कुंडली में मंगल चतुर्थ, सप्तम भाव, अष्टम भाव या द्वादश भाव में बैठ कर मांगलिक दोष उत्पन्न कर रहा है तो भी आप यह उपाय आजमा सकते हैं।

आओ जानते हैं शहद के उपाय।

शहद एक ऐसी एंटीबायोटि‍क औषधि है, जो पूर्णत: प्राकृतिक है। सेहत और सुंदरता के लिए शहद का प्रयोग किया जाता है,


लेकिन हम आपको बता रहे हैं इसके 10 ऐसे उपाय जिसका उल्लेख लाल किताब और ज्योतिष शास्त्रों में मिलता है।


हालांकि उपाय तो और भी है। इन उपायों को किसी विशेषज्ञ से पूछकर ही आजमाएं।


शनि के उपाय :

1. शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या कुंडली में शनि नीच का होकर बुरे फल दे रहा है तो घर में एक मिट्टी के पात्र में शहद रखना चाहिए। घर में शहद रखने और खाने से शनि शांत रहता है।


2. शनि किसी भी प्रकार से पीढ़ा दे रहा है तो पांच शनिवार को मंदिर में शहद का दान करना चाहिए। इससे शनि के बुरे फल मिलना बंद हो जाएंगे।

मंगल के उपाय :

1. चतुर्थ भावस्थ मंगल यदि अशुभ हो, तो शहद का व्यापार कदापि न करें। मंगल चौथे भाव में मंदा होकर बैठा हो तो इसकी शुभता के लिए मिट्टी के बर्तन में शहद भरकर उसे शमशान भूमि में दबा देना चाहिए। लेकिन यह उपाय किसी विशेषज्ञ से पूछकर ही करें।


. मंगल सप्तम भाव में मंदा होकर बैठा हो तो इसकी शुभता के लिए मिट्टी के बर्तन में शहद भरकर उसे सुनसान भूमि में दबा देना चाहिए। लेकिन यह उपाय किसी विशेषज्ञ से पूछकर ही करें।


. आठवें भाव में मंगल ग्रह के अशुभ परिणामों को कम करने के लिए मट्टी के घड़े में शहद भरकर शमशान-भूमि में दफन करना शुभ बताया गया है। लेकिन यह उपाय किसी विशेषज्ञ से पूछकर ही करें।


. बारहवें भाव में मंगल हो तो दिन की शुरुआत शहद के साथ करेंगे तो लाभ होगा। व्यय भाव में जब मंगल अशुभता लिए हुए हो, तो जातक नित्य सुबह खाली पेट शहद का सेवन करना चाहिए। जन्म कुण्डली के बारहवें भाव में मंगल मंदा होकर बैठा है तो जल में शहद मिलाकर लोगों को पिलाना चाहिए।


. बारहवें मंगल की शांति के लिए बहते पानी में शहद बहाएं या मंगलवार को हनुमानजी को जब दिया लगाएं तो उसमें थोड़ा शहद भी डाल दें।


. कुंडली के दूसरे भाव में यदि शुक्र बैठा है तो शहद का दान करना चाहिए। इससे मंगल का उपाय होता है जो कि संतान की समस्या दूर करता है। अगर जातक स्त्री हो तो शुक्र संतान की समस्या देता है जबकि जातक के पुरुष होने पर पुत्र संतान की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होती है।


. शिवजी का शहद से अभिषेक करने से मंगलदोष दूर होता है और ऋ‍ण से मुक्ति भी मिलती है।

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