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जानिए ज्योतिषशास्त्र के बारे में

ज्‍योतिष सीखने के लिए इसे दो भागों में विभाजित किया जा सकता है पहला गणित और दूसरा फलित। जन्‍म कुण्‍डली बनाना गणित भाग के अंतर्गत आता है। इसमें समय और स्‍थान के हिसाब से ग्रहों की स्थिति की गणना की जाती है। जबकि फलित विभाग में उक्त गणनाओं के आधार पर भविष्‍यफल बताया जाता है। प्राणी के जन्म के समय के अनुसार अन्तरिक्ष में ग्रहों की स्थिति का एक नक्शा तैयार किया जाता है जिसे जन्म कुण्डली कहते हैं।


सम्पूर्ण ज्‍योतिष विज्ञान नौ ग्रह, बारह राशि, सत्ताईस नक्ष और बारह भावों पर टिका हुआ है। नौ ग्रह सूर्य(रवि, सन), चंद्रमा(सोम, मून), मंगल(कुज, मार्स), बुध(मरकरी), गुरु(बृहस्‍पति, ज्‍यूपिटर), शुक्र(भार्गव, वीनस), शनि(मंद, सैटर्न), राहू(नॉर्थ नोड) और केतु(साउथ नोड) हैं। हमारे देश के ज्‍योतिष गणित में पृथ्‍वी को केन्द्र माना गया है।


इसके आगे राशिचक्र पर नौ ग्रह घूमते हैं। ज्योतिषशास्त्र में कुल बारह राशियां हैं - मेष(एरीज़), वृषभ(टॉरस), मिथुन(जैमिनी), कर्क(कैंसर), सिंह(लियो), कन्‍या(वरगो), तुला(लिबरा), वृश्चिक(स्कॉर्पियो), धनु(सैजीटेरियस), मकर(कैप्रीकॉर्न), कुंभ(एक्वेरियस) और मीन(पाइसेज़)। हर राशि का एक स्वामी होता है, उनका वर्णन इस प्रकार हैं -

राशि

स्वामी ग्रह

मेष

मंगल

वृषभ

शुक्र

मिथुन

बुध

कर्क

चन्द्र

सिंह

सूर्य

कन्‍या

बुध

तुला

शुक्र

वृश्चिक

मंगल

धनु

गुरू

मकर

शनि

कुंभ

शनि

मीन

गुरू


ग्रहों का वर्गीकरण -


शुभ ग्रह: चन्द्रमा, बुध, शुक्र, गुरू


पापी ग्रह: सूर्य, मंगल, शनि, राहु, केतु


ज्योतिष गणना में चन्‍द्र एवं बुध को भी सदैव शुभ नहीं गिना जाता। पूर्ण चन्‍द्र अर्थात पूर्णिमा के पास का चन्‍द्र शुभ एवं अमावस्‍या के पास का चन्‍द्र अशुभ माना जाता है।


ग्रह

उच्च राशि

नीच राशि

स्‍वग्रह राशि

सूर्य

मेष

तुला

सिंह

चन्द्रमा

वृषभ

वृश्चिक

कर्क

मंगल

मकर

कर्क

मेष, वृश्चिक

बुध

कन्या

मीन

मिथुन, कन्या

गुरु

कर्क

मकर

धनु, मीन

शुक्र

मीन

कन्या

वृषभ, तुला

शनि

तुला

मेष

मकर, कुम्भ

राहू

धनु

मिथुन


केतु

मिथुन

धनु



ग्रह की उच्‍च राशि और नीच राशि एक दूसरे से सप्‍तम होती हैं। उदाहरणार्थ सूर्य मेष में उच्‍च का होता है जो कि राशि चक्र की पहली राशि है और तुला में नीच होता है जो कि राशि चक्र की सातवीं राशि है।


ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की नैसर्गिक (प्राकृतिक) मित्रता और शत्रुता का अत्यधिक महत्व है, जो कुंडली फलादेश को प्रभावित करती है।


ग्रहों की मित्र-शत्रु तालिका


ग्रह

मित्र

शत्रु

सम (तटस्थ)

सूर्य

चंद्र, मंगल, गुरु

शनि, शुक्र, राहु

बुध

चन्द्र

सूर्य, बुध

राहु, केतु

मंगल, गुरु, शुक्र, शनि

मंगल

सूर्य, चंद्र, गुरु

बुध, राहु

शुक्र, शनि

बुध

सूर्य, शुक्र

चंद्र

मंगल, गुरु, शनि

गुरु

सूर्य, चंद्र, मंगल

बुध, शुक्र

शनि

शुक्र

बुध, शनि

सूर्य, चंद्र

मंगल, गुरु

शनि

बुध, शुक्र

सूर्य, चंद्र, मंगल

गुरु

राहु/केतु

शुक्र, शनि

सूर्य, चंद्र, मंगल, गुरु

बुध


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