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आइए जानते हैं पवित्र कार्तिक मास में दीप दान क्यों करना चाहिए एवं दीपदान से क्या पुण्य फल प्राप्त होता है

10 Oct 2022

दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:।
दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।।
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां।
शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।।

‼दीपदान का विशेष महत्व‼

कार्तिक मास मे दीपक का विशेष महत्व है। कार्तिक मास मे आकाशमंडल का सबसे बड़ा प्रकाशक ग्रह सूर्य अपनी नीच राशि तुला की ओर गमन करता है। जिससे जीवन मे जड़ता तथा अंधकार की वृद्धि होती है। इसीलिये इस पूरे मास दीपक के प्रकाश, जप, दान तथा स्नान का विशेष महत्व रहता है,


ये सब करने से जातक पर लक्ष्मी नारायण की कृपा होती है।


शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा मे दीपदान का विशेष महत्व


कहते है दीपक प्रज्वलित करने से लक्ष्मी मां तथा सभी देवी देवताओं प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। जल, शयन कक्ष, तुलसी तथा मंदिर मे दीपक लगाना सौभाग्य तथा लक्ष्मी की वृद्धि मे परम सहायक होता है। कहते है शाम और सुबह सूर्य के अभाव मे जहां दीपक का प्रकाश होता है वहां देवताओं का वास होता है।


तुलसी और दीपदान माहात्म्य

योगनिद्रा से जागते हैं भगवान विष्णु


भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागरण से प्रसन्न होकर समस्त देवी-देवताओं ने लक्ष्मी-नारायण की महाआरती करके दीप प्रज्ज्वलित किए। यह दिन देवताओं की दीपावली है अतःइस दिन दीप दान व व्रत-पूजा आदि करके हम भी देवों की दीपावली में शामिल होते हैं,ताकि हम अपने भीतर देवत्व धारण कर सकें अर्थात सद्गुणों को अपने अंदर समाहित कर सकें,नर से नारायण बन सकें। देवों की दीपावली हमें आसुरी प्रवृत्तियों अर्थात दुर्गुणों को त्यागकर सद्गुणों को धारण करने के लिए प्रेरित करती हैं।


तुलसी भगवान विष्णु को परम प्रिय है तुलसी पवित्रता तथा भगवान विष्णु की कृपा की परम कारक है। कार्तिक मास की एकादशी के दिन भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं। इस दिन तुलसी विवाह भी सम्पन्न किया जाता है। इसलिये कार्तिक मास मे तुलसी सेवा विष्णु कृपा प्राप्ति के लिये सर्वश्रेष्ठकार्य है। इसके अलावा दीपदान से महालक्ष्मी तथा सभी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।


ऐसा कहा गया है कि जो व्यक्ति कार्तिक मास में श्रीकेशव के निकट अखण्ड दीपदान करता है, वह दिव्य कान्ति से युक्त हो जाता है।

जो लोग कार्तिक मास में श्रीहरि के मन्दिर में दूसरों रखे दीपों को प्रज्वलित करते हैं, उन्हें नर्क नहीं भोगना पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि एक चूहे ने कार्तिक एकादशी में दूसरों के रखे दीप को प्रज्वलित करके दुर्लभ मनुष्य जन्म लाभ लिया था।

समुद्र सहित पृथ्वी दान और बछड़ों सहित दुग्धवती करोड़ों गायों के दान का फल विष्णु मंदिर के ऊपर शिखर दीपदान करने के सोलहवें अंश के एक अंश के बराबर भी नहीं है। शिखर या हरि मन्दिर में दीपदान करने से शत-कुल का उद्धार होता है।

जो व्यक्ति भक्ति सहित कार्तिक मास में केवल मात्र ज्योति -दीप्ति विष्णु मन्दिर के दर्शन करते हैं, उनके कुल में कोई नारकीय नहीं होता।

देवगण भी विष्णु के गृह में दीपदान करने वाले मनुष्य के संग की कामना करते हैं।

कार्तिक-मास में, खेल खेल में ही सही विष्णु के मन्दिर को दीपों से आलोकित करने पर उसे धन, यश, कीर्ति लाभ होती है और सात कुल पवित्र हो जाते हैं।


मिट्टी के दीपक में घी / तिल तेल डालकर कार्तिक पूर्णिमा तक दीप प्रज्वलित करें, इससे अवश्य लाभ होगा।


कार्तिक मास में दीपदान कैसे करें

कार्तिक मास में दीप दान करने के भी नियम हैं। दीप दान किसी नदी में, किसी मंदिर, पीपल, चौराहा, किसी दुर्गम स्थान आदि में करना चाहिए। भगवान विष्णु को ध्यान में रखकर किसी स्थान पर दीप जलाना ही दीपदान कहलाता है। दीप दान का आशय अंधकार मिटाकर उजाले के आगमन से है। मंदिरों में दीप दान अधिक किए जाते हैं।


दीपदान क्या होता है, कैसे करते हैं और क्या हैं इसके 11 लाभ


दीपदान के बारे में सभी ने सुना होगा परंतु कम लोग ही जानते होंगे कि दीपदान क्या है, कैसे करें दीपदान और क्या है दीप दान करने के लाभ। आओ इस संबंध में जानते हैं कुछ खास जानकारी।


दीपदान क्या है?

दीपक का दान करना या दीप को जलाकर उसे उचित स्थान पर रखना दीपदान कहलाता है। किसी दीपक को जलाकर देव स्थान पर रखकर आना या उन्हें नदी में प्रवाहित करना दीपदान कहलाता है। यह प्रभु के समक्ष निवेदन प्रकट करने का एक उपाय होता है।


कहां करते हैं दीपदान?

1. देवमंदिर में करते हैं दीपदान।

2. विद्वान ब्राह्मण के घर में करते हैं दीपदान।


3. नदी के किनारे या नदी में करते हैं दीपदान।

4. दुर्गम स्थान अथवा भूमि (धान के उपर) पर करते हैं दीपदान।


कैसे करते हैं दीपदान?

1. किसी मिट्टी के दिये में तेल डालकर उससे मंदिर में ले जाकर जलाकर उसे वहां पर रख आएं।


दीपों की संख्या और बत्तियां विशेष समयानुसार और मनोकामना अनुसार तय होती है।



2. आटे के छोटेसे दीपक बनाकर उसमें थोड़ासा तेल डालकर पतलीसी रुई की बत्ती जलाकर उसे पीपल या बढ़ के पत्ते पर रखकर नदी में प्रवाहित किया जाता है।


3. देव मंदिर में दीपक को सीधा भूमि पर नहीं रखते हैं। उसे सप्तधान या चावल के उपर ही रखते हैं। भूमि पर रखने से भूमि को आघात लगता है।


कब करते हैं दीपदान?

1. सभी स्नान पर्व और व्रत के समय दीपदान करते हैं।

2. नरकचतुर्दशी और यम द्वितीया के दिन दीपदान करते हैं।

3. दीपावली, अमावस्या या पूर्णिमा के दिन करते हैं दीपदान।

4. दुर्गम स्थान अथवा भूमि पर दीपदान करने से व्यक्ति नरक जाने से बच जाता है।


5. पद्मपुराण के उत्तरखंड में स्वयं महादेव कार्तिकेय को दीपावली, कार्तिक कृष्णपक्ष के पांच दिन में दीपदान का विशेष महत्व बताते हैं।


कृष्णपक्षे विशेषेण पुत्र पंचदिनानि च।

पुण्यानि तेषु यो दत्ते दीपं सोऽक्षयमाप्नुयात्।


अर्थात कृष्णपक्ष में रमा एकादशी से दीपावली तक 5 दिन बड़े पवित्र है। उनमें जो भी दान किया जाता है, वह सब अक्षय और सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है।


दीपदान करने के फायदे :

1. अकाल मृत्यु से बचने के लिए करते हैं दीपदान।

2. अपने मृ‍तकों की सद्गति के लिए करते हैं दीपदान।

3. लक्ष्मी माता और भगवान विष्णु को प्रसन्न कर उनकी कृपा हेतु करते हैं दीपदान।

5. यम, शनि, राहु और केतु के बुरे प्रभाव से बचने के लिए करते हैं दीपदान।

6. सभी तरह के अला-बला, गृहकलह और संकटों से बचने के लिए करते हैं दीपदान।

7. जीवन से अंधकार मिटे और प्रकाश आए इसीलिए करते हैं दीपदान।

8. मोक्ष प्राप्ति के लिए करते हैं दीपदान।

9. किसी भी तरह की पूजा या मांगलिक कार्य की सफलता हेतु करते हैं दीपदान।

10. घर में धन समृद्धि बनी रहे इसीलिए भी कहते हैं दीपदान।

11. कार्तिक माह में भगवान विष्णु या उनके अवतारों के समक्ष दीपदान करने से समस्त यज्ञों, तीर्थों और दानों का फल प्राप्त होता है।

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