
बहुत से लोग बस हनुमान चालीसा रट लेते हैं और बस बोलते जाते हैं। बोलने से हनुमान चालीसा सिद्ध नहीं होगी, जप करने से होगी।
जप का अर्थ होता है शब्द पर ध्यान देना। आप जो भी नाम का जप कर रहे हैं या यहाँ हम हनुमान चालीसा की ही बात कर लेते हैं, आपको अर्थ पता होना बहुत ही आवश्यक है।अक्सर देखने में आया है लोग हनुमान चालीसा को बोल रहे होते हैं, जप नहीं करते।
हनुमान चालीसा बोलते हुए आपके मन में एक-एक शब्द का अर्थ आना चाहिए। धीरे - धीरे पढ़ें और अर्थ स्मरण करते रहे।
हनुमान चालीसा के यह अर्थ आपका जीवन बदल देंगे क्यूंकि हनुमान चालीसा हमें जीवन में दिशा देने के लिए ही लिखी हुई है।
यदि आपके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं है तो हनुमान चालीसा का अर्थ सहित जाप आपको अपना लक्ष्य पहचानने में सहायता करेगा।
यदि आप अपने जीवन में दुखी हैं तो हनुमान चालीसा का अर्थ सहित जाप आपको दुखों से मुक्ति देगा।
यदि आप पूरी तरह से परिस्थितियों के सामने घुटने टेक चुके हैं तो हनुमान चालीसा का अर्थ सहित जाप आपको शक्ति देगा फिर से जीवन में आने वाली विपत्तियों से जीतने के लिए।
आपको कोई भी समस्या हो, कोई रोग हो, तकलीफ हो, दर्द हो, सब धीरे धीरे ठीक हो जाएगा।
हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी ने आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व लिखी थी।
हम सबके मन में यह प्रश्न स्वाभाविक ही उठ जाता है जब हम हनुमान चालीसा शब्द को सुनते हैं कि चालीसा का क्या अर्थ है ? हनुमान जी के लिए लिखी गयी इस स्तुति का नाम तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा ही क्यों रखा!!
उत्तर: बहुत ही सरल है । इस स्तुति में 40 पंक्तियाँ (lines) हैं । हर पंक्ति की संख्या भी 40 ही है।
गोस्वामी शब्द का अर्थ होता है जिसने अपनी इन्द्रियों को अपने वश (control) में कर लिया हो ।इसमें सबसे प्रमुख इन्द्रिय है वासना, स्त्री के लिए आकर्षण ।
स्तुति शब्द का अर्थ होता है ध्यान लगाना । जैसे यदि आप हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं तो स्वतः ही आपका ध्यान हनुमान जी पर चला जाएगा।
जब तक आप पाठ कर रहे हैं तब तक । यदि बिना अर्थ के बस पंक्तियों को पढ़ रहे हैं तो ऐसा नहीं होगा । परन्तु यदि सभी पंक्तियों का अर्थ आप जानते हैं और हनुमान चालीसा की पंक्तियाँ पढ़ते समय अर्थ भी साथ-साथ आपके मस्तिष्क (brain) में चल रहा हो तो जिसे अंग्रेजी में मैडिटेशन कहते हैं
वो घटित हो जाएगा आपके भीतर ।
हनुमान चालीसा के अर्थ के साथ पाठ करने से आप यह अनुभव करेंगे की सच में हनुमान जी आपके साथ हैं बस अपने कर्म अच्छे रखना। ध्यान रहे कर्म मन, वाणी और शरीर तीनों से होते हैं ।
तो मन में भी किसी प्रकार की कोई गन्दगी का प्रवेश मत होने देना जैसे किसी स्त्री को लेकर गंदे विचार या किसी को धोखा देने का विचार या फिर वाणी से कोई भी गाली या अपशब्द का प्रयोग और ना ही शरीर से कोई गलत कर्म करना या किसी पर अनावश्यक शारीरिक बल का प्रयोग, इत्यादि ।
हनु शब्द का एक अर्थ होता है ठुड्डी और दूसरा अर्थ होता है हनन कर लेना। मान शब्द का अर्थ होता है सम्मान या यश। हनुमान जी पर दोनों ही अर्थ सटीक बैठते हैं।
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हनुमान नाम का रहस्य
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हनुमान जी की ठुड्डी यानी जबड़ा थोड़ा विकृत था इसलिए उनको हनुमान कहा जाता है। ठुड्डी विकृत होने के बाद भी हनुमान जी सुन्दर ही दिखते थे। विकृत ठुड्डी उनकी सुंदरता को और निखारती ही थी जिस वजह से हनु शब्द के आगे मान जोड़ दिया गया।
हनुमान जी में अतुलित (unmatched) बल, बुद्धि और विद्या थी पर फिर भी उनके अंदर अहंकार नहीं था ।
इस प्रकार हनुमान जी का नाम हनुमान इसीलिए भी पड़ा क्यूंकि उन्होंने अपने अहंकार का हनन कर लिया था यानी बल, बुद्धि और विद्या होने के बाद भी हनुमान जी में 1 प्रतिशत भी घमंड नहीं था।
ये कोई साधारण बात नहीं है। जिसमें शरीर में बल भी हो , बुद्धि भी तेज़ हो और जिसके पास किसी भी कार्य को करने की विद्या भी हो यानी तीनों सर्वोत्तम गुण एक ही मनुष्य में हो तो क्या ऐसा हो सकता है की उस मनुष्य में अकड़ ना हो?
और जो अपने अहंकार को समाप्त कर देगा उसका समाज में मान तो होगा ही। अब यह मत बोलना की वो भगवान थे इसलिए उनके अंदर अहंकार नहीं था।
सच तो यह है की उन्होंने अपने भीतर अहंकार को कभी आने नहीं दिया इसीलिए वो भगवान कहलाये।