
नर्मदेश्वर शिवलिंग नर्मदा नदी से प्राप्त होता है और इसे स्वयंभू माना जाता है। इस शिवलिंग की पूजा से घर में सुख-शांति, दांपत्य जीवन में मधुरता और संतान सुख की प्राप्ति होती है। जो लोग गृहस्थ जीवन में समस्याओं से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह शिवलिंग अत्यंत फलदायी माना गया है।
नर्मदेश्वर शिवलिंग का महत्व
स्वयंभू (Natural): यह प्राकृतिक रूप से निर्मित होते हैं, जिन पर प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।
पवित्रता: मान्यता है कि नर्मदा नदी का हर कंकड़ शंकर (शिव) है, इसलिए इसे सबसे पवित्र माना जाता है।
आकार: ये आमतौर पर अंडाकार होते हैं और संगमरमर जैसी चमक और ठोसपन इनकी पहचान है।
लाभ: इसे घर में स्थापित करने से वास्तु दोष, काल और यम का भय दूर होता है, तथा सुख-समृद्धि का वास होता है।
पूजा विधि और स्थापना
स्थापना: शिवलिंग को घर में उत्तर दिशा की ओर वेदी का मुख रखकर स्थापित करना शुभ माना जाता है।
पूजा: सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
विशेष: शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से मधुमेह जैसी बीमारियों में राहत मिल सकती है।
नर्मदेश्वर शिवलिंग पवित्र नर्मदा नदी के तल से प्राकृतिक रूप से प्राप्त एक अत्यंत पवित्र और स्वयंभू शिवलिंग है, जिसे साक्षात शिव स्वरूप माना जाता है। इन्हें बिना प्राण-प्रतिष्ठा के भी स्थापित किया जा सकता है। यह घर में सुख-शांति, वास्तु दोष दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।