
श्रावण अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष हरियाली अमावस्या सोमवार के दिन होने से यह सोमवती अमावस्या भी है। इस संयोग के कारण इस वर्ष यह हरियाली अमावस्या बहुत ही महत्वपूर्ण है।
हरियाली अमावस्या के नाम से प्रसिद्ध है। इस अमावस्या को बहुत शुभ माना जाता है। श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित है। हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस वर्ष संयोग से इसी दिन सोमवती अमावस्या भी है। सोमवती अमावस्या और हरियाली अमावस्या दोनों एक ही होने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। इस दिन सावन का दूसरा सोमवार भी है। इस दिन भगवान शिव के अतिरिक्त पितर देव और पीपल की पूजा भी की जाती है।
इस वर्ष हरियाली अमावस्या 17 जुलाई 2023, सोमवार के दिन मनायी जायेगी। सन्योग से इस दिन सोमवार होने से यह सोमवती अमावस्या भी है।
सावन की हरियाली अमावस्या के नाम से ही प्रतीत होता है कि इसका संबंध वृक्षों और हरियाली से है। हमारे देश में मानसून की बारिश की शुरुआत सावन से होती है। यह दिन वर्षा ऋतु के कारण आई हरियाली के उत्सव के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसके तीन दिन बाद हरियाली तीज का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करके उन्हे भरपूर बारिश के लिये मनाया जाता है जिससे भरपूर फसल हो सकें।
वर्षा के कारण सावन माह में हर तरफ हरियाली छा जाती है इसलिए इस दिन को हरियाली अमावस्या और इसके तीन बाद आने वाली तीज को हरियाली तीज कहा जाता है। विभिन्न मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या के दिन वृक्ष लगाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जातक की मनोकामना पूर्ण होती है। वृक्ष हमारे लिये बहुत आवश्यक है और यह दिन मनुष्य और प्रकृति के बीच के संबंध को और मजबूत बनाता है।
हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव, पितर देव और पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीपल की पूजा करने से सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है। पीपल को जल चढ़ाने से पितर प्रसन्न होते है। इसके अतिरिक्त यह भी माना जाता है कि इस दिन मनुष्य को वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिये। पौधे लगाने से जातक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
हरियाली अमावस्या के दिन तीर्थ स्नान, तर्पण, दान, और ध्यान करने से बहुत पुण्य मिलता है, इसलिये इस दिन इनका विशेष महत्व होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन तर्पण करने से पितृ दोष का निवारण होता है। जिन जातको की जन्मकुण्डली में कालसर्प दोष होता है उनके लिये उससे मुक्ति पाने के लिये यह अमावस्या बहुत ही असरदार मानी जाती है।
धन-सम्पत्ति और मनोकामना पूर्ति के लिये अमावस्या के दिन यह आसान से उपाय अवश्य करें-
आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर अमावस्या के दिन किसी नदी या तालाब में मछलियों को खिलाने से बहुत पुण्य मिलता है। धन-सम्पत्ति में वृद्धि होती है। अमावस्या के दिन तीर्थ स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के पाप नष्ट होते है। यह संभव ना हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। अमावस्या के दिन प्रात:काल स्नानादि नित्यक्रिया से निवृत्त होकर हनुमान जी उपासना करें। उनके समक्ष चमेली के तेल का दीपक प्रज्वल्लित करें। और उन्हें लड्डू का भोग अर्पित करें। ऐसा करने से जातक के कार्य आसानी से सिद्ध होते है और मनोकामना पूर्ण होती है। मंदिर जाकर गरीबों को अन्न-वस्त्र आदि का दान करना बहुत शुभ होता है। शनि ग्रह की शुभता पाने के लिये और उसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिये इस दिन शनि देव को तेल चढ़ायें। काली उड़द और लोहा के दान करें।
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हरियाली अमावस्या की पूजा कैसे करें?
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हरियाली अमावस्या के दिन प्रात:काल में सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करना चाहिये। यदि यह संभव ना हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूरे घर में गंगा जल के छींटें लगाकर उसे शुद्ध करें। शिवालय जाकर ’ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुये भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। अभिषेक के पश्चात् बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि भगवान शिव को समर्पित करें। और उनकी पूजा करें। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते है। भगवान को भोग निवेदन करें। फिर हाथ जोड़कर भगवान शिव का ध्यान करें। ध्यान के पश्चात् शिव जी की आरती करें और भक्तजनों को प्रसाद वितरित करें। अमावस्या तिथि पितृदेव को समर्पित है। इस दिन पितरों की शांति के लिये श्राद्ध कर्म, तर्पण या पूजा पाठ करना चाहिये।
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हरियाली अमावस्या के विभिन्न नाम
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सम्पूर्ण भारत में हरियाली अमावस्या को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। जैसे उत्तर भारत में इसे हरियाली अमावस्या कहते है। महाराष्ट्र में इसे ’गतारी अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है। आंध्र प्रदेश में यह ’चुक्कला अमावस्या’ के नाम से प्रसिद्ध है और उड़ीसा में इसे ’चितलगी अमावस्या’ के नाम से पुकारा जाता है। हर क्षेत्र के लोग इसे अपने- अपने रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार मनाते है।
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हरियाली अमावस्या कब है, जानें महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और उपाय
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हरियाली अमावस्या का त्योहार इस बार 17 जुलाई को है और इस दिन पितरों की पूजा करने का खास महत्व होता है। इस दिन पितरों को याद करने से आपके जीवन में सुख बना रहता है और आपको सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन आपको कम से कम एक गरीब ब्राह्मण को भोजन जरूर करवाना चाहिए। हरियाली अमावस्या श्रावण मास की अमावस्या को कहते हैं। हरियाली अमावस्या इस बार 17 जुलाई को है और इस दिन सोमवार होने से यह सोमवती अमावस्या भी कही जा रही है। अमावस्या की तिथि जब सोमवार को पड़ती है तो इसे धार्मिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए पूजा करती हैं और व्रत करती हैं। हरियाली अमावस्या पर पौधे लगाने का शास्त्रों में खास महत्व बताया गया है। इस दिन हर व्यक्ति को कम से कम 5 पौधे जरूर लगाने चाहिए। ऐसा करने से उसकी कुंडली से शनिदोष, कालसर्पदोष और पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं। आइए जानते हैं हरियाली अमावस्या का महत्व, शुभ मुहूर्त और इस दिन किए जाने वाले उपाय।
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हरियाली अमावस्या का महत्व
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हरियाली अमावस्या पर पूजापाठ और दान पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दिन पितरों के नाम से दान पुण्य करने से वे आपसे प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। इस दिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं। इस दिन पीपल के पेड़ और तुलसी के पेड़ की पूजा करने से आपके घर में सुख समृद्धि बढ़ती है। हरियाली अमावस्या पर पूजापाठ करने से आपके घर में आर्थिक संपन्नता बढ़ती है।
हरियाली अमावस्या का शुभ मुहूर्त
हरियाली अमावस्या का आरंभ- हरियाली अमावस्या 16 जुलाई की रात को 10 बजकर 8 मिनट पर
हरियाली अमावस्या का समापन- 17 जुलाई को सुबह 12 बजकर 01 मिनट पर
उदया तिथि की मान्यता के अनुसार हरियाली अमावस्या 17 जुलाई को मनाई जाएगी।
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हरियाली अमावस्या की पूजाविधि
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हरियाली अमावस्या साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शंकर और पार्वती माता की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान शिव को बेलपत्र भांग, धतूरा चढ़ाएं और पार्वती माता को सुहाग की सभी सामग्री अर्पित करें। अगले दिन ये सभी सामग्री किसी जरूरतमंद महिला को बांट दें।
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हरियाली अमावस्या पर आजमाएं ये उपाय
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हरियाली अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा करें और तिल के तेल का दीपक जलाएं। इस दीपक में थोड़े से काले तिल जरूर डाल दें।
नारियल को एक सफेद कपड़े में बांधकर उसमें थोड़े से चावल रख लें और उसमें 11 रुपये रखकर अपने सिर से पांव तक 7 बार उबारे और उसके बाद इसे घर में किसी ऐसे स्थान पर रख दें जहां से यह बाहर के किसी व्यक्ति को नजर न आए। ऐसा करने से आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होगी।
हरियाली अमावस्या पर गाय को रोटी और खीर खिलाएं और कुत्ते को तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं। ऐसा करने से आपका हर संकट से बचा रहेगा और आपके ऊपर पितरों की कृपा बनी रहेगी।
तांबे के लोटे में गुलाब का फूल डालकर उसमें काले तिल डालकर पीपल के पेड़ पर अर्पित करें। ऐसा करने से आपको धन की कभी कोई कमी नहीं होती।