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भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न रुद्राक्ष का शिवलिंग

रुद्राक्ष शिवलिंग भगवान शिव का अत्यंत प्रिय स्वरुप माना जाता है। इसकी पूजा या जल से अभिषेक करने से पापों का क्षय, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह शिवलिंग भय, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है तथा जप-तप और साधना में विशेष सहायक माना जाता है। रुद्राक्ष शिवलिंग की आराधना से शिव कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और मन को स्थिरता मिलती है।


रुद्राक्ष का शिवलिंग बनाना और उसकी पूजा करना हिंदू धर्म, विशेषकर शिव पुराण में अत्यंत कल्याणकारी और फलदायी माना गया है। रुद्राक्ष स्वयं भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न माना जाता है, इसलिए जब इसका शिवलिंग बनाया जाता है, तो इसकी ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है।


महत्व और लाभ


  • अक्षय पुण्य: माना जाता है कि रुद्राक्ष के शिवलिंग की पूजा करने से करोड़ों शिवलिंगों की पूजा के समान फल मिलता है।

  • नकारात्मकता का नाश: यह घर से वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक होता है।

  • ग्रह शांति: शनि और राहु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए इसकी पूजा विशेष मानी जाती है।

  • मनोकामना पूर्ति: शिव पुराण के अनुसार, रुद्राक्ष के शिवलिंग का अभिषेक करने से असाध्य रोगों से मुक्ति और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है।


रुद्राक्ष का शिवलिंग मुख्य रूप से दो तरह से स्थापित किया जा सकता है:


स्थायी शिवलिंग - बहुत सारे छोटे रुद्राक्षों को मिट्टी या किसी प्राकृतिक गोंद की सहायता से शिवलिंग के आकार में जोड़कर बनाया जाता है।


अस्थायी (पार्थिव) शिवलिंग - पूजा के समय रुद्राक्ष के दानों को एकत्रित कर शिवलिंग का रूप दिया जाता है और अभिषेक के बाद उन्हें पुनः धारण कर लिया जाता है।


पूजन विधि


  • शुद्धिकरण: सबसे पहले गंगाजल से स्नान कराएं।

  • अभिषेक: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।

  • अर्पण: बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करें।

  • सावधानी: चूंकि रुद्राक्ष लकड़ी का बीज है, इसलिए यदि आपने इसे धागे या मिट्टी से जोड़ा है, तो लंबे समय तक जल में रखने से यह खराब हो सकता है। अभिषेक के तुरंत बाद इसे सूखे कपड़े से पोंछ देना चाहिए।

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