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14 साल बाद भादो में शनिश्‍चरी अमावस्‍या का योग, शनि से बचने के लिए ये राशि वाले करें उपाय

25 Aug 2022

27 अगस्‍त, शनिवार को भाद्रपद महीने की अमावस्‍या है.

भाद्रपद महीने में शनिश्‍चरी अमावस्‍या 14 साल बाद पड़ रही है. यह मौका शनि की साढ़े साती और ढैय्या से राहत पाने के लिए खास है.

भाद्रपद मास की अमावस्या 27 अगस्त, शनिवार को है. जब अमावस्‍या शनिवार के दिन पड़ती है तो इसे शनिश्‍चरी अमावस्‍या या शनि अमावस्‍या कहते हैं. भाद्रपद महीने में शनैश्चरी अमावस्या पड़ने का खास संयोग 14 साल बाद बना है. इसके बाद अगला संयोग 2 साल बाद 2025 में बनेगा.


हिंदू धर्म में तो भाद्रपद अमावस्‍या को बहुत महत्‍वपूर्ण माना ही गया है, इस दिन शनिवार पड़ने से ज्‍योतिष के अनुसार इसका महत्‍व कई गुना बढ़ गया है. इसके अलावा इस दिन एक और विशेष संयोग बन रहा है.


भाद्रपद अमावस्‍या पर दुर्लभ संयोग


भाद्रपद अमावस्‍या के शनि अमावस्‍या होने के अलावा एक और दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस दिन शनि ग्रह अपनी ही राशि मकर में मौजूद रहेंगे. चूंकि शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है और इस अमावस्‍या पर शनि अपनी ही राशि में मकर में रहेंगे. इस कारण यह दिन शनि देव के प्रकोप से राहत पाने के लिए बेहद खास है.


ये राशि वाले शनि अमावस्‍या पर जरूर करें उपाय


ऐसे जातक जिन पर शनि की साढ़े साती या ढैय्या चल रही है, उन्‍हें इस शनि अमावस्‍या के दिन कुछ उपाय जरूर कर लेना चाहिए. ऐसा करने से शनि की महादशा का अशुभ असर कम होगा. इस समय धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है.

वहीं मिथुन और तुला राशि वालों पर शनि कि ढैय्या का प्रभाव है. शनि की महादशा जातक को शारीरिक-मानसिक और आर्थिक समस्‍याएं देती है.


शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय


- शनिश्‍चरी अमावस्‍या के दिन शनि देव को सरसों का तेल च़ढ़ाएं. साथ ही काली तिल, काली उड़द, काले कपड़े का दान करें.


- शनिचरी अमावस्या से एक दिन पहले यानी शुक्रवार को सवा पाव काली उड़द की दाल को काले कपड़े में बांध लें. फिर इस पोटली को अपने सिरहाने रखकर सो जाएं. अगले दिन अमावस्‍या को इस पोटली को शनि मंदिर में रख आएं. इससे शनि का दुष्‍प्रभाव कम होगा और जीवन में सुख-समृद्धि आएगी.


शनि की महादशा के प्रकोप से राहत पाने के लिए शनिश्‍चरी अमावस्या के दिन कांसे की कटोरी में सरसों का तेल लें और एक सिक्का डालें. फिर इसमें अपना चेहरा देखें और तेल समेत कटोरी को शनि मंदिर में रख आएं. किसी जरूरतमंद को दान भी कर सकते हैं.


शनि अमावस्या 27 अगस्त को, बनेंगे ये 2 दुर्लभ योग, जानें क्या करना रहेगा अच्छा


इस बार भाद्रपद मास की अमावस्या को शनि अमावस्या का भी खास संयोग बन रहा है. इसके साथ ही इस दिन शिव और पद्म नामक दो शुभ योग बन रहे हैं.


इस दिन शनि देव और पितृ देव को प्रसन्न करने के लिए खास उपाय किए जाते हैं.


हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों के निमित्त समर्पित होता है. भाद्रपद मास की अमावस्या 27 अगस्त, शनिवार को पड़ रही है. अमावस्या शनिवार को पड़ने के कारण इस शनि अमावस्या कहा जा रहा है. शास्त्रों में भाद्रपद मास की अमावस्या को कुशाग्रही अमावस्या भी कहा गया है. शनि अमावस्या पर शुभ योग में शनिदेव की पूजा और विशेष उपाय किए जाते हैं.


मान्यता है इस दिन खास उपाय करने से पितृ दोष और शनि दोष से छुटकारा मिलता है.


शनि अमावस्या पर पर बन रहे हैं शिव और पद्म योग


हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि की शुरुआत 26 अगस्त, शुक्रवार को 12 बजकर 24 मिनट से होगी. वहीं अमावस्या तिथि की समाप्ति 27 अगस्त, शनिवार को 1 बजकर 47 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि की मान्यतानुसार, 27 अगस्त, शनिवार को ही अमावस्या की पूजा और विशेष उपाय किए जाएंगे. इसके अलावा इस दिन पद्म और शिव नामक 2 शुभ योग भी बन रहे हैं.


शनि अमावस्या पर किए जाते हैं श्राद्ध और तर्पण

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या की तिथि पूर्वजों के लिए होता है. ऐसे में इस दिन पितरों की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है. वहीं जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, वे इस दिन खास उपाय करते हैं.

मान्यता है कि इस दिन पितृ दोष के मुक्ति के लिए किए गए उपाय लाभकारी होते हैं. इस बार की अमावस्या शनि अमावस्या के योग की वजह से और भी खास हो गई है.


ऐसे में इस दिन शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के लिए भी खास उपाय किए जा सकते हैं. ज्योतिष के जानकार बताते हैं, शनिश्चरी अमावस्या पर विशेष उपाय करने से शनि दोष शांत हो सकता है. साथ ही इस दिन शनि देव को प्रसन्न करते हैं, तो जीवन की परेशानी कम हो सकती है.

भाद्रपद अमावस्या को क्यों कहते हैं कुशाग्रही अमावस्या


शास्त्रों में भाद्रपद मास की अमावस्या को कुशाग्रही अमावस्या कहा गया है. दरअसल भाद्रपद मास की अमावस्या को कुशाग्रही अमावस्या इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन कुश इकट्ठा करने की परंपरा है. बता दें कि कुश का इस्तेमाल पूजा-पाठ में किया जाता है. कुश के आसन पर बैठकर पूजा करने से विशेष सिद्धि प्राप्त होती है. लोग इस दिन कुश एकत्र करते हैं, ताकि समय आने पर इसका उपयोग किया जा सके. पितृ तर्पण और श्राद्ध में कुश की अंगूठी पहनी जाती है.


भादो मास की शनिश्चरी अमावस्या के दिन इन 5 राशि के लोग जरूर करें ये उपाय, प्रसन्न होंगे शनिदेव


शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना गया है। शनिवार के दिन शनि संबंधी उपायों को करना शुभ माना जाता है। जानें शनिचरी अमावस्या के दिन किन उपायों को करना माना जाता है शुभ-


भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भाद्रपद अमावस्या या भादो अमावस्या कहा जाता है। यह अमावस्या पितृ पक्ष के पहले आती है। इस दिन दान-पुण्य करना, तर्पण व पिंडदान आदि करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह दिन पितृ दोष, काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए भी खास होता है। इस साल भाद्रपद अमावस्या 27 अगस्त, शनिवार को पड़ रही है।


शनिश्चरी अमावस्या का संयोग-


शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना गया है। ऐसे में शनिश्चरी अमावस्या का दिन शनि की महादशा से पीड़ित राशियों के लिए खास माना गया है। इस दिन शनि साढ़ेसाती व शनि ढैय्या से पीड़ित राशियों के लोग कुछ उपायों के जरिए शनिदेव का अशुभ प्रभाव कम कर सकते हैं।


ये राशियां शनि साढ़ेसाती व ढैय्या से पीड़ित-


वर्तमान में शनिदेव मकर राशि में वक्री अवस्था में विराजमान हैं। ऐसे में धनु, मकर व कुंभ राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। जबकि मिथुन व तुला राशि वालों पर शनि ढैय्या का प्रभाव है। शनि ढैय्या व साढ़ेसाती से पीड़ित राशि वालों को शारीरिक, आर्थिक व मानसिक कष्टों का सामना करना पड़ता है।


शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय-


1. शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या से पीड़ित जातक शनि के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए शनिचरी अमावस्या के दिन सरसों के तेल से शनिदेव की पूजा करें। इसके साथ ही काली उड़द दाल से बनी इमरती प्रसाद के रूप में अर्पित करें।


2. शनिचरी अमावस्या के दिन पहले यानी शुक्रवार को सवा पाव काली उड़द की दाल को एक कपड़े में बांध लें। इस पोटली को अपने पास रात में रखकर सो जाएं। ध्यान रहे कि आप अकेले ही सोएं। शनिचरी अमावस्या के दिन इस दाल की पोटली को किसी शनि मंदिर में रखें। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

3. शनिचरी अमावस्या के दिन एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें या शनि मंदिर में कटोरी सहित तेल रखकर आएं। इसके साथ ही पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मान्यता है कि यह उपाय कम से कम पांच शनिवार करने से शनिदोष में लाभ मिलता है।जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

आपका अपना


पंडित सतीश नागर उज्जैन


श्री अन्नपूर्णा अनुष्ठान केंद्र उज्जैन


मोबाइल 9753585323


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