
नवरात्रि का हिंदुओं में बहुत महत्व है। नवरात्रि का मतलब है देवी दुर्गा की पूजा के नौ दिन और नौ रातें। नवरात्रि के दौरान भक्त लगातार नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं। अक्टूबर के महीने में शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है और इसका समापन दुर्गा पूजा और दशहरा, जो 24 अक्टूबर 2023 को मनाया जाएगा के साथ होगा।
इस त्योहार को देश के अलग-अलग हिस्सों में दुर्गा पूजा या नवरात्रि के नाम से मनाया जाता है। यह त्योहार देवी दुर्गा और उनके विभिन्न रूपों की पूजा के लिए समर्पित है। इन नौ दिनों के दौरान, भक्त देवी के प्रत्येक रूप की पूजा करते हैं और विभिन्न अनुष्ठानों, प्रार्थनाओं और सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल होते हैं।
यह त्यौहार पूरे देश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा प्रसिद्ध है जहाँ पंडाल सजाए जाते हैं जिनमें देवी दुर्गा की मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं और लोग नौ दिनों तक इन पंडालों मे दर्शन करते हैं। गरबा नृत्य गुजरात में लोकप्रिय है जहां लोग डांडिया नृत्य करते हैं और बड़े उत्साह और उमंग के साथ नवरात्रि मनाते हैं। कन्या पूजन उत्तर भारत में प्रसिद्ध है, जहाँ भक्त छोटी लड़कियों को घर पर आमंत्रित करते हैं और उन्हें देवी दुर्गा के रूप में पूजा करते हैं।
शारदीय नवरात्रि की विशेषता कई अनुष्ठानों और अनुष्ठानों से होती है जो भक्तों का परमात्मा के साथ संबंध को गहरा करते हैं। इन नौ दिनों के दौरान उपवास करना एक आम बात है, जिसमें कई व्यक्ति कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं और विशिष्ट अवधि के दौरान खाने से परहेज करते हैं। पारंपरिक नवरात्रि व्रत में सादा, सात्विक भोजन करना शामिल है।
नौ दिनों की महत्वपूर्ण तिथि
15 अक्टूबर, 2023: घटस्थापना/शैलपुत्री प्रतिपदा, रविवार
16 अक्टूबर, 2023: ब्रह्मचारिणी, सोमवार
17 अक्टूबर, 2023: चंद्रघंटा, मंगलवार
18 अक्टूबर, 2023: कुष्मांडा, बुधवार
19 अक्टूबर, 2023: स्कंदमाता, गुरुवार
20 अक्टूबर 2023: कात्यायनी, शुक्रवार
21 अक्टूबर 2023: कालरात्रि, शनिवार
22 अक्टूबर 2023: महागौरी, रविवार
23 अक्टूबर 2023: सिद्धिदात्री सोमवार
24 अक्टूबर 2023: दुर्गा विसर्जन, मंगलवार
इस शुभ मुहूर्त में करें घट स्थापना
शारदीय नवरात्र पर घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 21 मिनट से सुबह 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। साथ ही, घट स्थापना का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से 12:30 मिनट तक रहेगा।
शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से कलश स्थापित करने से व्यक्ति के घर-परिवार में सुख, संपन्नता बनी रहती है। मिट्टी, सोना, चांदी या तांबे के कलश द्वारा भी घट स्थापना की जा सकती है, लेकिन ध्यान रहे कि कलश कभी भी लोहे या स्टील का नहीं होना चाहिए। घट स्थापना से पहले उस स्थान को अच्छी तरह से साफ करे लें जहां कलश स्थापना की जाएगी।
इसके बाद उस स्थान पर गंगाजल का छिड़काव करें। फिर उस स्थान पर हल्दी से अष्टदल बनाएं। इसके बाद कलश में शुद्ध जल लेकर उसमें हल्दी, अक्षत, लौंग, सिक्का, इलायची, पान और फूल डालकर कलश के ऊपर रोली से स्वास्तिक बनाएं। आखिर में कलश की स्थापना के दौरान मां भगवती का आह्वान करें।
पंडित सतीश नागर उज्जैन
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