
आज की बढ़ती प्रतियोगिता में औसत विद्यार्थी भी अपने को बहुत पिछड़ा हुआ अनुभव करता है,और तनाव ग्रस्त हो जाता है।ऐसे में सहज योग की सरल ध्यान पद्धति अभिनव प्रयोग कर शिक्षार्थी के बुद्धि स्तर में भी परिवर्तन संभव करती है।फलतः विद्यार्थी के भीतर छिपी बहुमुखी प्रतिभाएँ सामने आने लगती हैं।
दरअसल कुण्डलिनी के जागरण से सहस्रार चक्र खुलता हैं और ब्रहम रंध्र को स्पर्श करती कुण्डलिनी एक प्रकाशीय बल को तैयार करती है।यह साधक के हृदय,मस्तिष्क,और चित्त (attention) तीनों में प्रकाशीय चेतना का संचार करती है जिसका परिणाम ये होता है कि हृदय और तर्क शक्ति(brain)एक हो जाने से आप के दृढ़ निर्णय शक्ति एवं आत्म विश्वास को बढ़ाती है ।साथ ही चित्त (attention) और इच्छा शक्ति(will power) के एक हो जाने से चित्त प्रभावशाली होता है , स्मरण शक्ति (memory) और अवशोषण शक्ति (grasping power) भी बढ़ जाती है।इस प्रकार ध्पान द्वारा बालक का सर्वांगीण विकास संभव है।
इस योग की प्रक्रिया में ध्यान से जुड़ने की वास्तविक युक्ति सहज योग संस्था द्वारा अत्यंत सरलता से निशुल्क सिखाई जाती रही है। आज के महामारी से उपजे विकट समय में
ऑन लाइन आत्म साक्षात्कार कराया जा रहा है जिसमे अनुभव सिद्ध ध्यान और मेडीटेशन को निशुल्क सिखाया जा रहा । इस हेतु वेबस्थली www.sahajayoga.org.in पर ध्यान या आत्मसाक्षात्कार टाइप कर इसे अनुभव किया जा सकता है।साथ ही टोल फ्री नंबर 18002700800 की सुविधा भी उपलब्ध है।