
द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। ऐसा ही संयोग इस बार भी है।
मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। उस समय रोहिणी नक्षत्र था। चंद्र उदय भी देर रात्रि में हुआ था। ऐसा ही संयोग इस बार जन्माष्टमी पर पड़ रहा है।
आचार्य पंडित सतीश नागर के अनुसार अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग है। साथ ही देर रात 11.24 बजे चंद्र उदय का समय है। इसी संयोग में जन्माष्टमी मनाना श्रेष्ठ है।
अष्टमी तिथि 18 अगस्त गुरुवार रात 12:14 से आरंभ होकर 19 अगस्त शुक्रवार रात एक 1/06 तक रहेगी।अतः 19 अगस्त शुक्रवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत तथा गोकुलाष्टमी सभी जगहों पर मनाई जाएगी। गोकुल, द्वारका ,एवं मथुरा आदि स्थानों में भी उत्सव के रूप में जो अष्टमी मनाई जाती है
इस बार श्रीकृष्णजन्माष्टमी में जन्म जयंती योग बन रहा है। *अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश होने से जन्म जयंती योग बन जाता है,तथा चंद्रोदय भी रात में 11:24को होगा । इस बार वैष्णव तथा स्मार्त्त दोनों मत को मानने के लिए 19 अगस्त 2022 शुक्रवार को ही श्री कृष्णजन्माष्टमी का व्रत करना चाहिए,* केवल उदयव्यापिनी रोहिणी मतावलंबी दूसरे दिन अर्थात् शनिवार को कर सकते हैं।
*फल-फूल, मेवों, सब्जियों के झूलों में झूलेंगे कान्हा*
मंदिरों में लड्डू गोपाल के लिए प्रतिदिन झूलों का श्रृंगार अलग अलग रूप में किया जा रहा है। कहीं चांदी से बना झूला तो कहीं फल-फूल, मेवों, सब्जियों से झूलों का श्रृंगार किया जा रहा है। राधा-कृष्ण मंदिरों में फल, फूल, काजू-किशमिश, बादाम, मूंगफली, पान पत्ता, माखन-मिश्री, मोर पंख सहित अन्य वस्तुओं से झूला सजाया जा रहा है। श्रावणी तीज से श्रृंगार का सिलसिला शुरू हुआ था, जो जन्माष्टमी तक लगातार चलेगा।
*इस शुभ मुहूर्त में भगवान श्री कृष्ण की करें विशेष पूजा, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं*
*हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है.*
हिंदू धर्म में भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले लड्डू गोपाल का जन्मदिन भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस पर्व को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में जाना जाता है. इस वर्ष यह पर्व 18 अगस्त को मनाई जाएगा.
मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और जीवन से दुख-दर्द दूर हो जाते हैं. जन्माष्टमी पर्व के दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है. इस दिन शुभ मुहूर्त में श्री कृष्ण की पूजा करने से बहुत लाभ होता है.
*आइए जानते हैं अगस्त 2022 में किस दिन मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी और क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त.*
*कृष्ण जन्माष्टमी*
हिंदू पंचांग के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाएगी. *अष्टमी तिथि का प्रारंभ 18 अगस्त को शाम 9:21 से होगा और इसका समापन 19 अगस्त रात्रि 10:59 पर होगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त 18 अगस्त को दोपहर 12:05 से 12:56 तक रहेगा. इस दिन वृद्धि योग का निर्माण हो रहा है जिसे अत्यंत शुभ माना गया है. बता दें कि वृद्धि योग का निर्माण 17 अगस्त को सुबह 8:56 से 18 अगस्त को रात्रि 8:41 तक होगा.*
*कृष्ण जन्माष्टमी 2022 पूजा विधि*
शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के जन्म के उत्सव पर रात्रि 12:00 बजे भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को स्नान और उनका पूजन करना चाहिए. इस दिन लड्डू गोपाल को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराकर स्वच्छ और सुंदर वस्त्र पहनाएं. इसके पश्चात उनको मुकुट, माला, बांसुरी आदि से सजाएं. फिर चंदन, अक्षत, फूल और फल अर्पित करें और इसके बाद भोग के रूप में माखन मिश्री मिठाई और मेवा अर्पित करें. इसके बाद लड्डू गोपाल की आरती उतारें और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना करें.
*जन्माष्टमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व भोग*
*इस साल कृष्ण जन्माष्टमी दो दिन 18 और 19 अगस्त दो दिन मनाई जाएगी.*
श्री कृष्ण जन्माष्टमी हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाई जाती है इसी दिन मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. इस त्योहार धूम केवल कृष्ण जन्म भूमि यानि मथुरा में ही नहीं, बल्कि देश भर के हर कोने में नजर आती है.
लेकिन इस साल कृष्ण जन्माष्टमी दो दिन 18 और 19 अगस्त दो दिन मनाई जाएगी. ऐसे में लोग दुविधा में जन्माष्टमी कब मनाएं, *ऐसे में आपके लिए सही तिथि व शुभ मुहूर्त लेकर आए हैं.*
इस दिन कई जगहों पर दही हांडी का आयोजन किया जाता है. *कृष्ण जन्माष्टमी को जन्माष्टमी, गोकुलाष्टमी, कृष्णष्टमी, कन्हैया अष्टमी, कन्हैया आठें, श्रीकृष्ण जयंती और श्रीजी जयंती आदि नामों से भी जाना जाता है.*
*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त*
*अष्टमी तिथि का प्रारंभ- 18 अगस्त की शाम 9.21 मिनट से.*
*अष्टमी तिथि समाप्त- 19 अगस्त की रात 10.59 मिनट पर.*
*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि*
*जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है.*
*सबसे पहले लड्डू गोपाल का दूध, दही, शहद और जल से अभिषेक करें.*
*अब श्रीकृष्ण के बाल रूप को झूले में बैठाएं और झुलाएं.*
*भगवान को माखन, मिश्री, लड्डू, धनिया पंजीरी और दूसरी मिठाइयों को भोग लगाएं.*
*रात के 12 बजे के बाद भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना करें.*
*पूजा हो जाने पर लड्डू गोपाल की आरती करें.*
*जन्माष्टमी का इतिहास*
भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की आठवीं (अष्टमी) के दिन मथुरा में हुआ था. वह देवकी और वासुदेव के पुत्र थे. जब कृष्ण का जन्म हुआ, मथुरा पर उनके मामा राजा कंस का शासन था, जो अपनी बहन के बच्चों को एक भविष्यवाणी के रूप में मारना चाहते थे, उन्होंने कहा कि दंपति का आठवां पुत्र कंस के पतन का कारण बनेगा.
भविष्यवाणी के बाद कंस ने देवकी और वासुदेव को कैद कर लिया. उसने उनके पहले छह बच्चों को मार डाला. हालांकि, उनके सातवें बच्चे, बलराम के जन्म के समय, भ्रूण रहस्यमय तरीके से देवकी के गर्भ से राजकुमारी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित हो गया. जब उनके आठवें बच्चे, कृष्ण का जन्म हुआ, तो पूरा महल नींद में चला गया, और वासुदेव ने वृंदावन में नंद बाबा और यशोदा के घर में बच्चे को बचाया.
विनिमय करने के बाद, वासुदेव एक बच्ची के साथ महल में लौट आए और उसे कंस को सौंप दिया. जब दुष्ट राजा ने बच्चे को मारने की कोशिश की, तो वह देवी दुर्गा में बदल गई, उसे उसके विनाश के बारे में चेतावनी दी. इस तरह कृष्ण वृंदावन में पले-बढ़े और अंत में अपने मामा कंस का वध कर दिया.
*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी स्पेशल भोग*
*माखन-मिश्री भोग-*
*जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग जरूर लगाए, ये उन्हें बहुत प्रिय है.*
*धनिया पंजीरी-* भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर उन्हें धनिया पंजीरी का भोग लगाया जाता है. ये भोग धनिया पंजीरी पाउडर,घी, कटे हुए बादाम, किशमिश, काजू और मिश्री के साथ बनाया जाता है.
*मखाना पाग-* 21 मखाना पाग एक पारंपरिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बनने वाला भोग है. मखाना के साथ घी, दूध और चीनी से बना, मखाना पाग छप्पन भोग का हिस्सा है.
*जन्माष्टमी पर अपनी राशि के अनुसार करें कान्हा का श्रृंगार, पूरी होगी हर मनोकामना*
इस बार जन्माष्टमी का त्योहार 18/19 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन अपनी राशि अनुसार श्री कृष्ण का श्रृंगार करें।
हर साल कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही धूम-धाम सेे मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी का त्योहार 18/19 अगस्त को मनाया जाने वाला है। *इस साल जन्माष्टमी पर ध्रुव और वृद्धि योग बन रहे हैं। ये दोनों ही योग बहुत ही शुभ माने जाते हैं। इन शुभ योगों में जन्माष्टमी का व्रत और विधि विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।* साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति भी होती है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पालकी सजाई जाती है। और उनका बड़े अच्छे से श्रृंगार भी किया जाता है।
*लेकिन क्या आप जानते हैं कि राशि के अनुसार कान्हा का श्रृंगार करने से ना सिर्फ भाग्य बढ़ता है बल्कि व्यक्ति को हर तरह के कष्टों से मुक्ति भी मिल जाती है।*
*मेष राशि -*
मेष राशि के जातकों को कान्हा का श्रृंगार लाल रंग के वस्त्रों से करना चाहिए। ऐसा करने से आपके दांपत्य जीवन में सुख बना रहता है। साथ ही मानसिक कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।
*वृषभ राशि -*
वृषभ राशि के जातकों काे बाल गोपाल का श्रृंगार चांदी की वस्तु से करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान कृष्ण की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी।
*मिथुन राशि -*
मिथुन राशि वालों को कान्हा का श्रृंगार लहरिया प्रिंट के वस्त्रों से करना चाहिए। ऐसा करने से आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होती है।
*कर्क राशि -*
कर्क राशि के जातकों पर श्रीकृष्ण की विशिष्ट कृपा मानी जाती है। साथ ही इन्हें हर कार्य में सफलता भी मिलती है। इस राशि के लोगों को कान्हा का श्रृंगार सफेद वस्त्रों से करना चाहिए।
*सिंह राशि -*
सिंह राशि के जातकों को भगवान कृष्ण का श्रृंगार गुलाबी रंग के वस्त्रों से करना चाहिए। साथ ही उन्हें अष्टगंध का तिलक भी लगाना चाहिए। ऐसा करने से आपके मान-सम्मान में काफी वृद्धि होगी।
*कन्या राशि -*
कन्या राशि के जातकों को बाल-गोपाल का श्रृंगार हरे रंग के वस्त्रों से करना चाहिए। इसके बाद चंदन का टीका भी अवश्य ही लगाना चाहिए। ऐसा करने से आप पर भगवान कृष्ण की कृपा हमेशा बनी रहेगी।
*तुला राशि -*
तुला राशि के जातकों पर भगवान कृष्ण की विशेष कृपा मानी जाती है। इस राशि के लोगों को कान्हा का श्रृंगार केसरिया रंग के वस्त्रों से करनी चाहिए। इसके बाद घी का भोग भी लगाना चाहिए। ऐसा करने से आपको आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।
*वृश्चिक राशि -*
वृश्चिक राशि के जातकों को कान्हा का श्रृंगार लाल रंग के वस्त्रों से करना चाहिए। ऐसा करने से आपको सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही आर्थिक लाभ के योग भी बनते हैं।
*धनु राशि -*
धनु राशि के लोगों को श्रीकृष्ण का श्रृंगार पीले रंग के वस्त्रों से करना चाहिए। साथ ही मिठाई का भोग भी लगाना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में कोई परेशानी नहीं आएगी।
*मकर राशि -*
मकर राशि के जातकों को पीले और लाल रंग के वस्त्रों से बाल-गोपाल का श्रृंगार करना चाहिए। साथ ही कान्हा को इसी रंग के कुंडल भी पहनाने चाहिए। तिलक भी इसी रंग का करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
*कुंभ राशि -*
कुंभ राशि के जातकों को भगवान कृष्ण का श्रृंगार नीले रंग के वस्त्रों से करना चाहिए। ऐसा करने से आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी।
*मीन राशि -*
मीन राशि के लोगों को पीतांबरी रंग के वस्त्रों से बाल-गोपाल का श्रृंगार करना चाहिए। साथ ही इसी रंग के कुंडल भी पहनाने चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में ढेर सारी खुशीयां आती हैं।
*इस जन्माष्टमी पर राशि के अनुसार लगाएं कान्हा को भोग, हर मुराद होगी पूरी*
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 18/19 अगस्त को मनाया जाएगा। ये पर्व देशभर में बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। वहीं मथुरा-वृंदावन में इस त्योहार की अलग ही धूम होती है। खासकर मंदिरों और घरों में लोग बाल गोपाल के जन्मोत्सव का आयोजन करते हैं। लड्डू गोपाल के लिए पालकी सजाई जाती है। उनका शृंगार किया जाता है। लोग व्रत रखते हैं। वहीं कुछ लोग कान्हा जैसी संतान की कामना के साथ ये व्रत रखते हैं और मुरलीवाले को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाते हैं।
*इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि इस दिन राशि के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को शृंगार और भोग लगाने से जातकों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।*
साथ ही उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
*जन्माष्टमी पर राशि के अनुसार उपाय इस प्रकार हैं...*
*मेष राशि*
मेष राशि वाले जातकों का स्वामी ग्रह मंगल होता है और लाल रंग इनके लिए शुभ माना जाता है। ऐसे में इस राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार लाल रंग के कपड़े से करने के बाद उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाना चाहिए।
*वृष राशि*
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन वृष राशि के जातकों को लड्डू गोपाल को माखन का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से भगवान श्री कृष्ण उनकी सारी परेशानियों को दूर कर देंगे।
*मिथुन राशि*
मिथुन राशि के जातकों को जन्माष्टमी के दिन कान्हा का चंदन से तिलक करना चाहिए। इसके बाद उन्हें भोग में दही अर्पण करना चाहिए। फिर भगवान के सामने हाथ जोड़कर अपनी अर्जी लगाएं।
*कर्क राशि*
इस राशि के जातकों को जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को सफेद रंग का वस्त्र अर्पित करना करना चाहिए। फिर उन्हें दूध और केसर का भोग लगाना चाहिए।
*सिंह राशि*
जन्माष्टमी के दिन सिंह राशि के जातक कान्हा जी का श्रृंगार गुलाबी रंग के कपड़ों से करें। इसके बाद अष्टगंध का तिलक लगाएं। साथ ही प्रसाद में उन्हें माखन-मिश्री चढ़ाएं।
*कन्या राशि*
कन्या राशि के लोग कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को हरे रंग के वस्त्रों से सजाएं। इसके बाद उन्हें मावे का भोग जरूर लगाएं।
*तुला राशि*
तुला राशि के जातकों के जातक जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को गुलाबी रंग के वस्त्र पहनाएं। इसके बाद लड्डू गोपाल को घी का भोग लगाएं।
*वृश्चिक राशि*
वृश्चिक राशि के जातक भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर लाल वस्त्र पहनाएं। साथ ही उन्हें माखन या दही चढ़ाएं।
*धनु राशि*
धनु राशि के जातक जन्माष्टमी पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण को पीले वस्त्र पहनाएं। इसके बाद भगवान को पीले रंग की मिठाई चढ़ाएं।
*मकर राशि*
मकर राशि के जातक कान्हा को नीले वस्त्रों से श्रृंगार करें। साथ ही पूजा में उन्हें मिश्री का भोग लगाना चाहिए।
*कुंभ राशि*
कुभ राशि के जातक जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को नीले रंग का वस्त्र पहनाएं। फिर मुरली मोहन को बालूशाही का भोग लगाएं।
*मीन राशि*
जन्माष्टमी पर मीन राशि के जातक भगवान श्रीकृष्ण को पीतांबरी वस्त्र और पीले ही रंग के कुंडल पहनाएं। इसके बाद भोग में केसर और बर्फी चढ़ाएं।