
आओ जानते हैं कि तुलसी विवाह के क्या है नियम।
- तुलसी पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः " मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।
- कुछ खास मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कुछ चीजों के त्याग का व्रत लें। इस व्रत में दूध, शकर, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन या मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन नहीं किया जाता। कार्तिक में प्याज, लहसुन और उड़द की दाल आदि का त्याग कर दिया जाता है।
- यदि आप इस एकादशी का व्रत रख रहे हैं तो ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करें।
- पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर विराजमान करें।
- फिर भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, पीला चंदन चढ़ाएं। फिर पान और सुपारी अर्पित करने के बाद धूप, दीप और पुष्प चढ़ाकर आरती उतारें।
- भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद फलाहार ग्रहण करें। फिर रात्रि में स्वयं के सोने से पहले भजनादि के साथ भगवान को शयन कराना चाहिए।
- शालिग्राम के साथ तुलसी का आध्यात्मिक विवाह देव उठनी एकादशी को होता है। इस दिन तुलसी की पूजा का महत्व है। तुलसी दल अकाल मृत्यु से बचाता है। शालीग्राम और तुलसी की पूजा से पितृदोष का शमन होता है।
- शलिग्राम भगवान विष्णु का ही विग्रह रूप है। जिस घर में शालिग्राम का पूजन होता है उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है। शालिग्राम सात्विकता के प्रतीक हैं। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। यदि आप मांस या मदिरा का सेवन करते हैं तो यह आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
- शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है। चंदन भी असली होना चाहिए। जैसे चंदन की एक लकड़ी को लाकर उसे शिला पर घिसे और फिर शालिग्रामजी को चंदन लगाएं। शालिग्राम को प्रतिदिन पंचामृत से स्नान कराया जाता है। कहते हैं कि कुछ समय को छोड़कर शालिग्राम की प्रतिदिन पूजा करना जरूरी है। ऐसे समय है रोग, यात्रा या रजोदर्शन आदि।
- शालिग्राम के साथ तुलसी विवाह को कन्यादान जितना पुण्य कार्य माना जाता है। कहा जाता है कि तुलसी विवाह संपन्न कराने वालों को वैवाहिक सुख मिलता है।
- मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम के साथ तुलसी का विवाह कराने वाले व्यक्ति के जीवन से सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं और उस पर भगवान हरि की विशेष कृपा बनी रहती है।
वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए करें तुलसी विवाह, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही पति-पत्नी के बीच उत्पन्न होने वाली समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।
हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। इस एकादशी को 'देवउठनी एकादशी' या 'प्रबोधिनी एकादशी' भी कहा जाता है। इस बार तुलसी विवाह 4 नवंबर, शुक्रवार को पड़ रहा है। सनातन धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही पति-पत्नी के बीच उत्पन्न होने वाली समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।
हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की लंबी नींद से जागते हैं और फिर भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं। इसी के साथ इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार के सभी मुहूर्त शुरू हो जाते हैं। इस खास मौके पर भगवान शालिग्राम का तुलसी माता से विवाह करने की परंपरा है।
तुलसी विवाह के लिए यह है पूजा विधि और सामग्री,देखें पूरी सूची तिथि और मुहूर्त
देव उठनी एकादशी पूजन के शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारम्भ- 03 नवम्बर 2022 को शाम 07:30 बजे।
एकादशी तिथि समाप्त- 04 नवम्बर 2022 को शाम 06:08 बजे।
एकादशी पारण समय : 5 नवम्बर को सुबह 06:36 से 08:47 के बीच।
तुलसी पूजा के शुभ मुहूर्त:-
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 से दोपहर 12:26 तक।
विजय मुहूर्त : दोपहर 01:54 से 02:38 तक।
अमृत काल : शाम 04:24 से 05:58 तक।
गोधूलि मुहूर्त : शाम 05:34 से शाम 06:00 तक।
दिन का चौघड़िया :
लाभ : सुबह 07:57 से 09:20 तक।
अमृत : सुबह 09:20 से 10:42 तक।
शुभ : दोपहर 12:04 से 01:27 तक।
रात का चौघड़िया :
लाभ : रात्रि 08:49 से 10:27 तक।
जानिये पूजन विधि
इस दिन महिलाएं सुबह उठकर स्नान कर नए वस्त्र धारण करें। पूजन स्थल को साफ-सुथरा कर फूल, अरिपन आदि से अच्छे से सजायें। तुलसी माता का सोलह श्रृंगार कर चुनरी ओढ़ायें। फिर तुलसी के पौधे के समीप शालिग्राम भगवान की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद दोनों की शोडषोपचार विधि से पूजा करें। पूजा के बाद भगवान शालिग्राम को हाथों में लेकर तुलसी के चारों ओर परिक्रमा करें। फिर तुलसी को शालिग्राम की बाईं और रखकर उन दोनों की आरती उतारें और विवाह संपन्न होने की घोषणा करें।
तुलसी विवाह आज,राशि अनुसार करेंगे ये उपाय तो बदल सकती है किस्मत
तुलसी विवाह के दिन इन उपायों से होता है लाभ
यूं तो तुलसी के उपाय किसी भी दिन किए जा सकते हैं। लेकिन यदि तुलसी विवाह के दिन राशि के अनुसार कुछ विशेष उपाय कर लिए जाएं तो जातक को न केवल सभी परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है। बल्कि मनचाहा कार्य भी पूरा हो जाता हैं। इस बार तुलसी विवाह 4 नवंबर को है। तो आइए आचार्य पंडित सतीश नागर से जानते हैं कि इस दिन राशि के अनुसार किए जाने वाले ये उपाय कौन से हैं?
मेष राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
मेष राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी और शालिग्राम भगवान के विवाह के समय खुद ही अपने हाथों से मां तुलसी को लाल चुनरी पहनानी चाहिए। इसके बाद धूप-दीप दिखाकर अपनी मनोकामना पूरी करने की पार्थना करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन की सारी चिंता दूर हो जाती है।
वृषभ राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
वृषभ राशि के जातकों को तुलसी विवाह पर मां तुलसी को इत्र अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में कभी धन की कोई कमीं नही होती। साथ ही जीवन में ऐश्वर्य भी बना रहता है। इसी के साथ जातक के सभी प्रकार के ग्रह दोष भी समाप्त हो जाते हैं।
मिथुन राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
मिथुन राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन तुलसी मां को हरे रंग के वस्त्र और हरे रंग की चूड़ियां अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन तो सुखमय रहता ही है। साथ ही विवाह में अगर कोई ग्रह बाधा आ रही है तो वह भी समाप्त हो जाती है।
कर्क राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
कर्क राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन शाम के समय तुलसी के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से इस राशि के लोगों का न केवल चंद्रमा ठीक होगा। बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। इसलिए तुलसी विवाह के दिन इस राशि के लोगों को तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए।
सिंह राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
सिंह राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी के पौधे पर लाल पुष्प अर्पित करने चाहिए। साथ ही शाम के समय रोली का तिलक करके तुलसी के पौधे के नीचे दीपक अवश्य जलाना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
कन्या राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
कन्या राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन तुलसी का पौधा मंदिर में दान करना चाहिए। ऐसा करने से इस राशि के जातकों को सफलता के योग बनेंगे। इतना ही नहीं यह उपाय करने से नौकरी और व्यापार में चल रही सभी समस्याएं भी समाप्त हो जाती हैं।
तुला राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
तुलसी विवाह के दिन तुला राशि के जातकों को माता तुलसी को सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए। यह उपाय करने से सुख और शांति की प्राप्ति होती है। इतना हीं नहीं इस उपाय से घर-परिवार के लोगों का आपसी प्रेम भी बढ़ता है।
वृश्चिक राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
वृश्चिक राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी को श्रृंगार की सभी वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए। इससे जातकों को शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है और यदि कोई कोर्ट केस चल रहा हो तो उसमें भी सफलता मिलती है।
धनु राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
धनु राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराते समय माता तुलसी को हल्दी अवश्य लगानी चाहिए। ऐसा करने से घर में मांगलिक कार्यों में आ रही सभी प्रकार की रुकावटें समाप्त हो जाती हैं। साथ ही घर-परिवार के सभी सदस्यों के जीवन में खुशियों का आगमन होता है।
मकर राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
मकर राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी का कन्यादान अपने हाथों से करना चाहिए। ऐसा करने से जातक को न केवल कन्यादान का फल प्राप्त होता है। बल्कि संतान के विवाह में आ रही सभी समस्याएं भी समाप्त हो जाती हैं।
कुंभ राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
कुंभ राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन तुलसी का पौधा किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए। या फिर किसी मंदिर में लगाना चाहिए। ऐसा करने से शनिदेव का आर्शीवाद प्राप्त होता है। साथ ही दुर्घटना, अकाल मृत्यु और अन्य परेशनियों से भी राहत मिलती है।
मीन राशि के जातकों को करना चाहिए ये काम
मीन राशि के जातकों को तुलसी विवाह के दिन घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। लेकिन ध्यान रखें कि तुलसी का पौधा लगाने के बाद उसके नीचे शालिग्राम अवश्य रखें।