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भारत के खिलाफ सीमावर्ती क्षेत्रों में षड्यंत्र कर सकते हैं चीन, पाकिस्तान और नॉर्थ कोरिया?

यह बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है कि नार्थ कोरिया ने अभी-अभी अपने देश में बड़ा मिसाइल परीक्षण किया है और उसमें खास बात यह है कि चीन और रूस ने अपने प्रतिनिधि को उस खास मौके पर नॉर्थ कोरिया भेजा था। एजेंसियों के अनुसार नॉर्थ कोरिया रूस और चीन अमेरिका तथा नाटो देश के खिलाफ कोई को कोई गुप्त समझौता करने जा रहे हैं। यह तो विदित है कि नार्थ कोरिया लगातार परमाणु मिसाइलों का अमेरिका के खिलाफ परीक्षण करता आ रहा है और इससे अमेरिका दक्षिण कोरिया काफी परेशान नजर आ रहे है|


अमेरिका ने नार्थ कोरिया को साउथ कोरिया के पक्ष में बयान देते हुए कई बार परमाणु परीक्षण न करने की धमकी भी दी है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका साउथ कोरिया का बहुत बड़ा हिमायती है और उसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी अमेरिका अपने ऊपर ले कर नॉर्थ कोरिया के तानाशाह को कई बार धमका भी चुका है पर नार्थ कोरिया को इससे कोई फर्क नजर आता दिखाई नहीं दे रहा है। नार्थ कोरिया के तानाशाह ने ताजा-ताजा परमाणु मिसाइल का परीक्षण कर उसमें चीन तथा रूस का समर्थन प्राप्त कर लिया हैl रूस, चीन तथा नॉर्थ कोरिया और पाकिस्तान चारों देश परमाणु शक्ति संपन्न देश है और रूस को छोड़कर नॉर्थ कोरिया, चीन चीन और पाकिस्तान भारत के कट्टर विरोधियों में माने जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में भारत को अपने सीमावर्ती प्रदेश की विशेष निगरानी करनी होगी और अपने परमाणु हथियारों को भी सजग रखना होगाl भारत के नॉर्थ कोरिया से कभी मधुर संबंध नहीं रहे हैं भारत वैसे भी युद्ध का सदैव विरोध कर शांति का पक्षधर रहा है परिणाम स्वरूप चीन, पाकिस्तान और नॉर्थ कोरिया भारत के धुर विरोधी हरकतों में शामिल हो सकते हैंl यह अलग बात है कि चीन अपनी एक आर्थिक परिस्थितियों से जूझ रहा है और वहां बेरोजगारी की दर भी 46.5% हो गई है इस तरह बेरोजगारों की बड़ी संख्या से परेशान भी है इसके अलावा वहां बिजली संकट पूरी तरह व्याप्त है। हिना में औद्योगिक उत्पादन लगभग ठप है और आवश्यक वस्तुओं की बड़ी कमी दिखाई देने लगी है इसके अलावा चीन अपनी अंदरूनी राजनीतिक समस्याओं से जूझ रहा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान के आर्थिक हालात बद से बदतर हो गए और कंगाली के दौर से गुजर रहा है। पाकिस्तान अब दिवालिया होने के कगार पर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कई शर्ते लगाकर पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए तीन अरब का कर्ज दिया है पर $3 डॉलर से पाकिस्तान की रोटी, आटा, चावल और मुद्रास्फीति की समस्या 2 महीने के बाद सिर सिर उठा कर खड़ी हो जाएगी, इतना हो जाने के बाद भी पाकिस्तान मे रक्षा बजट की कोई कमी नजर नहीं आ रही हैl पाकिस्तान हालाकी भारत से युद्ध करने की स्थिति में नहीं है पर चीन और नार्थ कोरिया का सहयोग मिलने पर वह भारत के सीमावर्ती क्षेत्र पर लगातार उपद्रव कर सकता हैl चूंकि भारत का रूस परंपरागत मित्र है और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अभी अभी भारत के प्रति अपनी आस्था जताई है पर भारत को अपने परंपरागत शत्रु चीन तथा पाकिस्तान पर किसी भी तरह का भरोसा नहीं किया जाना चाहिए|


स्वतंत्रता के पश्चात से ही पाकिस्तान ने भारत अधिकृत कश्मीर में हमेशा अपने आतंकवादी भेज कर अशांति फैलाने साजिश की है। भारत अब चुकी विश्व की बड़ी आर्थिक तथा सामरिक शक्ति बन चुका है जिसके कारण पाकिस्तान अभी कुछ दिनों के लिए शांत बैठा हुआ है चीन और नई परमाणु शक्ति बनते नार्थ कोरिया के सहयोग तथा समर्थन से वह भारत के विरुद्ध सीमा क्षेत्र में सामरिक हरकतें करने से बाज नहीं आएगाl भारत को इन परिस्थितियों में विशेष सावधानी रखकर चीन तथा पाकिस्तान की सीमाओं पर अपनी चौकसी बढ़ा देना चाहिएl भारत में 2024 में पांच राज्यों के आम चुनाव तथा संसद के चुनाव भी होने वाले हैं भारत सरकार का ध्यान चुनाव में होने की वजह से चीन, पाकिस्तान, नार्थ कोरिया की मदद से भारत पर आक्रमण भी कर सकता हैl भारत के प्रधानमंत्री की विगत दिनों अमेरिका यात्रा के दौरान उनका अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडन द्वारा खुलकर गर्मजोशी से स्वागत किए जाने के फ़लस्वरूप रूस के साथ उसके रिश्ते कुछ कमजोर भी पड़ सकते हैं। रूस ने सदैव भारत की विपरीत परिस्थितियों में मदद की है और ऐसे में भारत को रूस के साथ अपने संबंधों को संतुलित कर कर रखना होगा। अमेरिका के रवैये को देखते हुए अमेरिका पर 100% विश्वास किया जाना काफी मुश्किल भरा है। रूस यूक्रेन युद्ध तथा अफगानिस्तान में तालिबान के साथ युद्ध में अमेरिका तथा नाटो देशों ने यूक्रेन के बाहर रहकर अपने हाथ सेंकें हैं। भारत का अमेरिका और नाटो देशों के साथ व्यवसायिक तथा वैज्ञानिक शोध के संबंध तो हैं पर अभी तक अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों के साथ सामरिक रक्षा संबंधी कोई भी अनुबंध नहीं हुआ है ऐसे में अमेरिका तथा पश्चिमी देशों से भारत को युद्ध के समय सहायता की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अतः भारत को अभी भी पाकिस्तान तथा चीन के विरुद्ध किसी भी तरह की सहायता के लिए रूस पर ही भरोसा करना होगा।


Article by

संजीव ठाकुर

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