top of page

भारत में चीतों की वापसी

संपादकीय/मालवा हेराल्ड | ७० वर्ष के बाद आज देश में चीतों की वापसी हुई | प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के ७२वे जन्मदिवस पर मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में ८ नामीबियाई चीतों को लाया गया | कूनो नेशनल पार्क मप्र के श्योपुर जिले से करीब ६० किलोमीटर दूर स्थित है | इसकी स्थापना १९८१ में की गई थी | राष्ट्रीय उद्यान विन्ध्याचल पर्वत शृंखला से घिरा हुआ है और इसकी खासियत है कि इसमें दो किले आमेट और मैटोनी मौजूद है | कहा जाता है कि कूनो कभी राजाओं का शिकारगाह हुआ करता था |

कूनो को वर्ष २०१८ में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया | ये करीब ७० किलोमीटर में फैला हुआ है और यहां लगभग १२० पेड़ों की प्रजातियां मौजूद हैं |

एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत आठ नामीबियाई चीतों को भारत लाया गया है | परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह चीतों का दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण है | पांच मादा और तीन नर चीतों को ११ घंटे की उड़ान के लिए "कैट प्लेन" नामक चार्टर्ड बोइंग ७४७ पर नामीबिया के एक गेम पार्क से ले जाया गया है |

मोदी जी ने अपने संबोधन में कहा - "आज चीता भारत की धरती पर लौट आया है | भारत की प्रकृति-प्रेमी चेतना भी पूरी ताकत से जागी है। हमें अपने प्रयासों को विफल नहीं होने देना चाहिए।"

ढाई से साढ़े पांच साल की उम्र के प्रत्येक चीते को उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट कॉलर से लैस किया गया है। पार्क के खुले वन क्षेत्रों में छोड़े जाने से पहले उन्हें शुरू में लगभग एक महीने के लिए क्वारंटाइन क्षेत्र रखा जाएगा। ये चीते नामीबिया की सरकार की ओर से भारत को भेट हैं | यह शानदार चीता नामीबिया के जंगलों में रहता है | नामीबिया अफ्रीका महाद्वीप का एक छोटा देश है और उन चंद देशों की गिनती में शामिल है जहाँ ये शानदार प्रजाति स्वछंद रूप से विचरण करती है |

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य भारत चीतों की जनसंख्या बढ़ाना भी है | अगले महीने दक्षिण अफ्रीका १२ और चीतों के आने की उम्मीद है। परियोजना के अनुसार चीतों की संख्या लगभग ४० तक पहुँचने की उम्मीद है | इस परियोजना के लिए लगभग ९१० मिलियन रुपये(११.४ मिलियन अमेरिकी डॉलर) इकट्ठा हुआ है, जिसका ज्यदातर हिस्सा इंडियन ऑयल ने दिया है |

भारत कभी एशियाई चीतों का घर था, लेकिन १९५२ तक इसे देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। भारत में जानवरों को फिर से लाने के प्रयासों ने २०२० में गति पकड़ी जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अफ्रीकी चीतों, एक अलग उप-प्रजाति, को प्रायोगिक आधार पर "सावधानीपूर्वक चुने गए स्थान" पर भारत में बसाया जा सकता है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान देश के उन्हीं चुनिन्दा स्थानों में से एक है |

आज पूरे विश्व में केवल ७००० चीते बचे हैं | भारत में चीतों की विलुप्ति का मुख्य कारण उनके निवास स्थान का नुकसान और शिकार था। माना जाता है कि महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने १९४० के दशक के अंत में देश के अंतिम ३ चीतों को मार डाला था | चीता को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की खतरनाक प्रजातियों की लाल सूची में विश्व स्तर पर "कमजोर" के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। उत्तरी अफ्रीका और एशिया में, यह "गंभीर रूप से संकटग्रस्त" है। भारत में चीतों की वापसी बेहद सकारात्मक और उत्साहित करने वाला कदम है |

कूनो नेशनल पार्क में पहले से ही बड़ी संख्या में तेंदुए मौजूद हैं | चीता पृथ्वी का सबसे तेज़ जानवर है। एक चीते को घूमने के लिए काफी जगह चाहिए होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार १०० वर्ग किलोमीटर (३८ वर्ग मील) क्षेत्र में छह से ११ बाघों, १० से ४० शेरों और केवल एक चीता के आसानी से रहने की संभावना होती है।


शुभम ताम्रकार

प्रधान संपादक

 FOLLOW US

  • Facebook
  • Instagram
  • LinkedIn
  • Pinterest
  • Twitter
  • YouTube
bottom of page