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एक असीम सा अरमान लिए फिरता हूँ।
देह के भीतर में तूफान लिए फिरता हूँ।।
दुश्मनों को उड़ा मृत्युलोक ले जाऊँगा।
ऐसा निरंतर परिधान लिए फिरता हूँ।।
मेरे रग-रग में साहस-जज्बा ऐसे भरे हैं।
देशभक्ति का पहचान लिए फिरता हूँ।।
तन में हरे वर्दी,मन में हरियर रंग भरकर।
देश की आन-बान-शान लिए फिरता हूँ।।
अब तो मौत से हमको डर नही लगता है।
हाथों में देश का कमान लिए फिरता हूँ।।
पावस,प्रचण्ड ग्रीष्म,शिशिर की हिम में।
देखो निज हाथों में जान लिए फिरता हूँ।।
साहस शांति खुशहाली का झण्डा लेकर।
हर-पल हर-घड़ी निशान लिए फिरता हूँ।।
अगणित ममत्व भावना भरी भूमि के लिए।
भारतवर्ष रक्षा का आह्वान लिए फिरता हूँ।।
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