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17 Aug 2022
संजीव ठाकुर - १७/०८/२०२२
दिल मे तेरी कई ख्वाइशें मिलेंगी,
गुम मेंरी यहां कई बंदिशे मिलेंगी |
चेहरे पर छुपे तेरे कई कई चेहरे,
यही सिसकती मेरी वफाये मिलेगी |
ख्वाईशो ने भी की कई बगावतें,
वही दफ़्न मेरी काशिशें मिलेंगी |
तेरे कई कई अफ़साने,कई किस्से हैं,
अफसानों में आशिकों की बंदिशें मिलेगी।
तेरे रंग महल में कई सतरंगी सपने है ,
सोये आशिको की अशिशे मिलेंगी।
दुनिया हंसती है बेबसी पर मेरी,
कब्र में मेरी दबी ख्वाहिशें मिलेंगी।
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