अल़-सुब्ह
बारिश की बूँदें देख
वसुधा आखिर पूछती है-
समीर !
ऐसे भी कोई ब्याह कर लाता है
जामुनी बदरी को रात्रि में ही ?
पता तो है न... नील व्योम को
कि उनकी बेटी आई है यहाँ ?
माँ की बातें सुन
समीर शांत है पर,
कजरारी नयनों वाली बहुरिया
मुस्काती हुई हँस रही है।