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धर्मशाला विवाद में साधु-संत और रहवासी आमने-सामने

उज्जैन.दैनिक मालवा हेराल्ड | गंगा दशहरा पर नीलगंगा सरोवहर के बाहर धर्मशाला को लेकर साधु-संत और रहवासी आमने-सामने हो गये। रहवासियों का आरोप था कि संतो ने जबरदस्ती कब्जा किया है। संतो का कहना था कि जमीन हमारी है। दोनों पक्षों के बीच घंटो विवाद की स्थिति बनी रही। दोनों पक्ष जगह को लेकर अपना-अपना दावा कर रहे थे।


नीलगंगा पर पंचदशनाम जूना अखाड़ा बना हुआ है। जिसके समीप नीलकंठेश्वर महादेश मंदिर और सार्वजनिक धर्मशाला नीलगंगा चौराहा के नाम से बनी हुई है। मंगलवार को गंगा दशहरा का पर्व था और साधु-संतों ने पेशवाई निकाली थी। इस बीच धर्मशाला का बोर्ड निकालकर संतों ने अपना नया बोर्ड श्री नीलकंठेश्वर महादेश मंदिर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा व्यवस्थापक श्री महंत हरिगिरी महाराज का लगा दिया। रहवासियों का पता चला तो वह विरोध में सडक़ पर आ गये। रहवासी दिल्लू पहलवान का कहना था कि उन्होने 2003 में पूर्व सांसद सत्यनारायण जटिया से उक्त सरकारी जमीन को लिया था और कुछ राशि प्राप्त कर क्षेत्र के रहवासियों के लिये धर्मशाला बनाई थी। ताकि लोग यहां अपने परिवार के कार्यक्रम कर सके। कुछ समय बाद कोर्ट ने जमीन सरकारी होना बताकर तोडऩे के आदेश जारी कर दिये, जिसके दस्तावेज उनके पास है। अब संतो ने इस पर कब्जा कर लिया है और सरकार से खरीदना बता रहे है। उन्होने विरोध में सडक़ पर चक्काजाम कर दिया। गंगा दशहरा पर एकत्रित संतों ने जमीन अपनी बताई और कहा कि मंदिर में पूजा के लिये दी थी, मंहत हरिगिरी महाराज का कहना था कि जमीन ब्रहमलीन पार्वतीगिरी माई के नाम पर थी, उन्होने पूजा के लिये दी थी। संतों और रहवासियों के बीच विवाद बढ़ता देख नीलगंगा, माधवनगर और नानाखेड़ा थाने का पुलिस बल मौके पर पहुंच गया था। प्रशाासनिक अधिकारी एसडीएम कल्याणी पांडे, तहसीलदार अर्चना गुप्ता पहुंचे और मामला शांत किया। दोनों पक्षों से चर्चा की है और दस्तावेजों की जांच का आश्वसन दिया है। रहवासियों का कहना था कि वह कब्जा नहीं होने देगें। कोर्ट ने सरकारी जमीन होना बताई और तोडऩे के आदेश दिये है। जिसे अब तोड़ा जाये। इसके लिये आंदोलन किया जाएगा।


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