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Ujjain News: निगम अधीक्षण यंत्री द्वारा जारी कॉलोनियों की अनुमति वाली फाइलें मंगलवार को खुलेगी

7 Aug 2023

कॉलोनी सेल प्रभारी ने कहा, जरूरत पड़ी तो जांच कराएंगे

उज्जैन। सेवानिवृत्त हुए नगर निगम अधीक्षण यंत्री गोपाल कृष्ण कठिल द्वारा रिटायरमेंट से पहले एक महीने में 5 कॉलोनियों के पूर्णता प्रमाण और 6 कॉलोनियों को विकास अनुमति जारी किए जाने का मामला सुर्खियों में बना हुआ है। एन वक्त पर जल्दबाजी में किए गए इस मामले की सभी फाइलें आज मंगलवार को कॉलोनी सेल प्रभारी ने तलब की है।


उल्लेखनीय है कि नगर निगम अधीक्षण यंत्री जीके कठिल 30 जून को निगम से सेवानिवृत्त हो गए। इसके पूर्व 30 दिन के अंतराल में उन्होंने 6कॉलोनी विकास की अनुमति और 5 कालोनियों के पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिए।आशंका जताई जा रही है कॉलोनियों को लेकर जारी अनुमतियों में भ्रष्टाचार हुआ है। इसके पीछे कारण यह है कि श्री कठिल ने अप्रेल से जून 2023 तक के तीन महीने में 7 कॉलोनियों के पूर्णता प्रमाण पत्र और इतनी ही कॉलोनियों के विकास अनुमति जारी की है। जबकि रिटायरमेंट के पूर्व अंतिम 30 दिनों में उन्होंने आश्चर्यजनक ढंग से जून 2023 मेंं पांच कॉलोनियों के पूर्णता-प्रमाण पत्र तो 6 कॉलोनियों के विकास अनुमतियां जारी कर दी। इसमें तकनीकी रूप से भी सबसे बड़ा सवाल यही हो रहा है कि आखिर 5 महीने में कॉलोनी कैसे बनकर तैयार हो गई।


जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज....


निगम सूत्रों के अनुसार केवल तीन महीने के दौरान कॉलोनियों के पूर्णता प्रमाणपत्र और विकास अनुमतियां देने में नियमों की अनदेखी की भी पूरी आशंका है। सूत्रों के मुताबिक यह भी संभव हो सकता है कि विकास अनुमति से जुड़े दस्तावेज देखे नहीं गए हों तथा पूर्णता प्रमाण-पत्र के लिए भी संबंधित इंजीनियरों ने मौके पर जाकर बगैर जांच करें ही कागजों पर अनुमति दे दी हो। अगर इनकी जांच होती है तो कई राज खुल सकते हैं।


आधा दर्जन विभागों से लेनी होती है अनुमति..


कॉलोनी निर्माण में कॉलोनाइजर द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश से ले-आउट पास कराने के बाद विकसित की जाने वाली कॉलोनी में उद्यान, सडक, लाइट, सीवरेज, पेयजल लाइन आदि की प्लानिंग दी जाती है। ।इसमें निर्माण का प्रकार, साइज आदि जानकारी रहती है। निगम के जोन कार्यालय से संबंधित विभाग इसकी जांच कर कॉलोनी सेल को पहुंचाते है। इसी रिपोर्ट पर विकास अनुमति जारी की जाती है। इसके एवज में निगम निर्धारित शुल्क भी लेता है।


तब जाकर जारी होता है कालोनी पूर्णता प्रमाण-पत्र..


कॉलोनाइजर द्वारा पूर्णता प्रमाण के लिए आवेदन करने के बाद पूर्व में जारी विकास अनुमति के आधार पर कॉलोनी में निर्माण हुआ है या नही इसकी संबंधित विभाग दोबारा से जांच करता है। कमियांं निकलने पर प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जाता है। इसके विपरीत ज्यादातर कॉलोनाइजर जल्द से जल्द पूर्णता प्रमाण-पत्र लेकर कॉलोनी को निगम हैंडओवर कर अपनी जवाबदारी से पल्ला झाड़ने के चक्कर में रहते हैं।


इनका कहना


रविवार का अवकाश होने तथा सोमवार को भगवान महाकालेश्वर की सवारी के कारण उक्त मामले कि सभी फाइलें मंगलवार को मंगवाई जाएगी। आवश्यकता होने पर इनका परीक्षण कराया जाएगा।


डॉ.योगेश्वरी राठौर, एमआईसी सदस्य एवं प्रभारी कॉलोनी सेल,नगर निगम

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