
उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर के आंगन में इस वर्ष महाशिवरात्रि पर आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने 44 घंटे तक लगातार दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार कुल 8 लाख 6 हजार 545 श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए।

प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक दर्शन व्यवस्था 15 फरवरी को तड़के 2.30 बजे पट खुलने के साथ शुरू हुई थी, जो 16 फरवरी को रात 11 बजे शयन आरती के बाद पट मंगल होने तक निर्बाध जारी रही। सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि 15 फरवरी को सर्वाधिक 5 लाख 78 हजार 943 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि 16 फरवरी को 2 लाख 27 हजार 602 भक्तों ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई। भारी भीड़ के बावजूद पट लगातार खुले रहने से श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन हुए। सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही।
16 फरवरी की रात शयन आरती के साथ महाशिवरात्रि के विशेष अनुष्ठानों का विधिवत समापन हुआ और मंदिर के पट विश्राम के लिए बंद किए गए।
शीघ्र दर्शन से 25 हजार श्रद्धालुओं ने प्राप्त किए दर्शन, 62.50 लाख रुपए की आय
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व वर्ष 2026 के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु विशेष शीघ्र दर्शन व्यवस्था की गई। इस व्यवस्था के अंतर्गत दो दिनों में कुल 25,000 श्रद्धालुओं ने शीघ्र दर्शन का लाभ प्राप्त किया।
दिनांक 15 फरवरी 2026 को 20,700 श्रद्धालुओं द्वारा शीघ्र दर्शन टिकट प्राप्त किए गए, जिससे मंदिर समिति को ₹51,75,000 की आय हुई। वहीं 16 फरवरी 2026 को 4,300 टिकटों के माध्यम से ₹10,75,000 की आय प्राप्त हुई। इस प्रकार दो दिनों में कुल 25,000 टिकटों के माध्यम से ₹62,50,000 (बासठ लाख पचास हजार रुपए) की आय मंदिर समिति को प्राप्त हुई। मंदिर प्रशासन द्वारा सुव्यवस्थित कतार प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था एवं डिजिटल टिकटिंग प्रणाली के माध्यम से श्रद्धालुओं को सुगम एवं व्यवस्थित दर्शन सुनिश्चित किए गए।
शिव नवरात्रि पर्व पर 400 क्विंटल से अधिक लड्डू प्रसाद विक्रय
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा शिव नवरात्रि के पावन अवसर पर दिनांक 6 फरवरी 2026 से 16 फरवरी 2026 तक श्रद्धालुओं हेतु रागी एवं बेसन के लड्डुओं प्रसाद की व्यवस्था की गई। इस अवधि में मंदिर समिति द्वारा ₹1.95 करोड़ लागत का कुल 410.6 क्विंटल रागी एवं बेसन के लड्डुओं का विक्रय किया गया।
मंदिर प्रशासन द्वारा प्रसाद निर्माण एवं विक्रय की संपूर्ण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं को सुगमता से प्रसाद उपलब्ध हो सके, इसके लिए अतिरिक्त अस्थाई काउंटरों की व्यवस्था की गई थी।