
उज्जैन। आप समय की कमी से नहीं, समय के दुरुपयोग से हारते हैं। आप अपना अधिकांश समय उन विषयों पर खर्च कर देते हैं, जिन पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता जैसे राजनीति की बहसें, सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएँ और दूसरों की आलोचना।

यह उद्गार मुख्य वक्ता के रूप में नई शिक्षा नीति, 2020 के क्रियान्वयन प्रभारी रहे आई.ए.एस. अनिल स्वरूप पूर्व सचिव मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित ‘ऊर्जा-सेतु’ व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ करते हुए “यू केन मेक इट हैप्पन - आप इसे संभव बना सकते हैं” विषय पर व्याख्यान देते हुए अपने संबोधन में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने की।
यह विशिष्ट व्याख्यान सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों के संगठन '" विक्रम विश्वविद्यालय एल्यूमनाई एसोसिएशन"' द्वारा "ऊर्जा-सेतु" व्याख्यान श्रृंखला के शुभारंभ के अंतर्गत विक्रमोत्सव-2026 (विक्रम संवत 2082) के तहत आयोजित किया गया।
मुख्य वक्ता स्वरूप ने “यू केन मेक इट हैप्पन - आप इसे संभव बना सकते हैं” विषय पर युवाओं को जीवन की वास्तविक चुनौतियों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग समय की कमी का बहाना बनाते हैं, जबकि वास्तविक समस्या समय का गलत उपयोग है। उन्होंने कहा आप समय की कमी से नहीं, समय के दुरुपयोग से हारते हैं। आप अपना अधिकांश समय उन विषयों पर खर्च कर देते हैं, जिन पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता जैसे राजनीति की बहसें, सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएँ और दूसरों की आलोचना। उन्होंने युवाओं से प्रश्न किया। आप अपने 24 घंटे में से कितने घंटे अपने लक्ष्य के लिए देते हैं? इस प्रश्न ने श्रोताओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। वक्ता ने कहा कि सफल और असफल व्यक्ति में अंतर प्रतिभा का नहीं, बल्कि टाइम एलोकेशन का होता है।

अपने संबोधन में स्वरूप ने ‘फियर ऑफ फेलियर’ यानी असफलता के भय पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि गलती करना मानव स्वभाव है, किंतु गलती से सीख न लेना सबसे बड़ी विफलता है। उन्होंने कहा गलतियाँ आपकी दुश्मन नहीं, आपकी शिक्षक हैं। जो व्यक्ति अपनी गलतियों से सीख लेता है, वही आगे बढ़ता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे असफलता को अंत न मानकर प्रक्रिया का हिस्सा समझें और हर प्रयास के साथ स्वयं को बेहतर बनाते रहें।
स्वरूप ने समय के तीन आयाम अतीत, वर्तमान और भविष्य पर चर्चा करते हुए कहा कि अतीत बदला नहीं जा सकता, पर उससे सीख लेकर वर्तमान को बेहतर बनाया जा सकता है। भविष्य की अत्यधिक चिंता व्यक्ति को वर्तमान से भटका देती है।
उन्होंने कहा अगर आप आज के एक-एक पल को मजबूत बनाएँगे, तो भविष्य अपने आप मजबूत बन जाएगा। जीवन एक दिन में नहीं बदलता, यह ईंट-दर-ईंट बनता है।”
मुख्य वक्ता स्वरूप ने समाज में बढ़ती दिखावे की प्रवृत्ति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज का युवा कई बार दूसरों को प्रभावित करने के लिए अपने फैसले लेता है। कपड़े, फैशन और सोशल मीडिया पर छवि बनाने की दौड़ व्यक्ति को उसके वास्तविक लक्ष्य से दूर कर देती है।
उन्होंने युवाओं को “स्वान्तःसुखाय” की भावना से कार्य करने की प्रेरणा दी अर्थात अपने आत्मसंतोष के लिए कार्य करें, न कि केवल दूसरों को प्रभावित करने के लिए।
उन्होंने दैनिक जीवन से उदाहरण देते हुए बताया कि जिन विषयों पर हमारा नियंत्रण नहीं है, उनके लिए चिंता करना व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक जाम, पेट्रोल की कीमतें या राजनीतिक निर्णय जैसे विषयों पर अनावश्यक चिंता केवल मानसिक तनाव बढ़ाती है।उन्होंने कहा जो आपके नियंत्रण में है आपका समय, आपका प्रयास और आपकी दिशा उसी पर ध्यान केंद्रित कीजिए।”
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, लक्ष्य निर्धारण और समय प्रबंधन से जुड़े प्रश्न पूछे। वक्ता ने छात्रों को छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करने, दैनिक दिनचर्या बनाने और स्वयं के प्रति ईमानदार रहने की सलाह दी।इस चरण में विद्यार्थियों ने करियर और प्रशासनिक चुनौतियों से जुड़े प्रश्न पूछे। स्वरूप ने उत्कृष्ट प्रश्न पूछने वाले दो विद्यार्थियों को अपनी पुस्तक "यू कैन मेक इट हैपन" भेंट कर सम्मानित किया।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरू प्रो. अर्पण भारद्वाज ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का संस्थान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व बोध विकसित करने का केंद्र है। उन्होंने शोध, शिक्षा नीति और नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘ऊर्जा-सेतु’ जैसी पहल विद्यार्थियों को अपने जीवन लक्ष्य के प्रति सजग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने कहा कि ऊर्जा सेतु की वैचारिक व्याख्यान की यह श्रृंखला भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के बीच एक वैचारिक पुल के रूप में देखी जा रही है। इसका उद्देश्य वर्तमान छात्रों और अनुभवी पूर्व छात्रों के बीच संवाद स्थापित करना है ताकि नवयुवकों को ऊर्जा नीति, करियर और जीवन की जटिल चुनौतियों का सामना करने में मार्गदर्शन मिल सके। विश्वविद्यालय प्रशासन और एल्यूमनाई एसोसिएशन ने सुनिश्चित किया है कि सभी प्रोफेशनल कोर्सेस के विद्यार्थी इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में सरस्वती वंदना के पश्चात अतिथियों द्वारा मां वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन किया गया। तत्पश्चात राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति दी गई, बाद में विश्वविद्यालय कुलगान की प्रस्तुति दी गई। कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने मुख्य अतिथि स्वरूप का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
विश्वविद्यालय की अंग्रेजी अध्ययनशाला की विद्यार्थी सुश्री इवेंजलिन चौहान ने कार्यक्रम का संचालन किया। अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. स्वाति दुबे द्वारा किया गया। एल्यूमनाई एसोसिएशन की अध्यक्ष श्रीमती उमा शर्मा द्वारा आयोजन के लिए अतिथियों का आभार माना। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।