
उज्जैन। विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित विक्रम नाट्य समारोह की तीसरी प्रस्तुति बुधवार को सम्पन्न हुई। ओड़िया रंगमंच से जुड़े चर्चित नाटक ’भरतवाक्य’ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नाटक के जरिए दिए जाने वाले विचार मंच और सभागृह तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आना चाहिए। यह नैतिक जिम्मेदारी कलाकार और समाज दोनों की है। नाटक समाज में नाट्य विधा और कलाकार की भूमिका को प्रभावी ढंग से रेखांकित करता है। प्रस्तुति का शुभारंभ मां भारती की आरती से हुआ। इसके बाद नंदलाल यादव (अध्यक्ष उज्जैन प्रेस क्लब) एवं प्रो. बालकृष्ण शर्मा (पूर्व कुलगुरु, विक्रमादित्य विश्वविद्यालय) ने अतिथियों का सम्मान किया।

महाराज विक्रमादित्य शोध पीठ, संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (भारंगम) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव के तहत बुधवार शाम 7.30 बजे कालिदास अकादमी के संकुल भवन में ’भरतवाक्य’ की प्रस्तुति हुई। इसका निर्देशन उड़ीसा के हरिप्रसाद पट्टनायक ने किया। ‘भरतवाक्य’ किसी भी नाटक के अंत में कही जाने वाली शुभकामना को दर्शाता है। लेखक ने इस रचना के माध्यम से रंगकर्म की आत्मालोचना की है। नाटक की कथा रंगकर्म और कलाकार पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य समाज, नैतिक मूल्यों और कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी पर चिंतन कराना है। प्रस्तुति में यह प्रश्न भी उठाया गया कि मंच से बोले गए आदर्श क्या वास्तव में समाज में बदलाव ला सकते हैं, तथा परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। नाटक पूरी तरह व्यंग्यात्मक और प्रतीकात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया।
19.02.2026 को होगी ‘जाति जीवनम्’ की प्रस्तुति
विक्रम नाट्य समारोह के अंतर्गत गुरुवार को ’जाति जीवनम्’ नाटक का मंचन किया जाएगा। इसका निर्देशन उड़ीसा के चित्तरंजन सत्पथी करेंगे। यह प्रस्तुति शाम 7.30 बजे कालिदास अकादमी परिसर में होगी।