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Ujjain News : विक्रम उत्सव 2026 - ताल वाद्य समूह ‘ताल फ्राय’ की प्रस्तुति

उज्जैन। विक्रम उत्सव–2026 के अंतर्गत आयोजित विक्रम नाट्य समारोह में बुधवार को दो आकर्षक प्रस्तुति हुई। प्रथम प्रस्तुति कर्नाटक के प्रख्यात निर्देशक मनोहर के निर्देशन में संगीत कार्यक्रम ‘अभंग नाद’ की हुई। भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक भावधारा से ओतप्रोत प्रस्तुति ने संत परंपरा के अमृतमय अभंगों को सुर और लय के माध्यम से जीवंत किया। कलाकारों की सुमधुर स्वर लहरियाँ श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर एक दिव्य वातावरण का सृजन किया। दूसरी प्रस्तुति सुश्री पियाल भट्टाचार्य (पश्चिम बंगाल) के निर्देशन में आयोजित नाट्य प्रस्तुति ‘सौगंधिकाहरण’ में भीम और हनुमान के प्रसंग के माध्यम से आत्मसंयम, विनय और धर्म का प्रभावी संदेश दिया गया। पौराणिक कथा पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को यह अनुभूति कराई कि सच्चा पराक्रम केवल शक्ति में नहीं, बल्कि संयमित और विवेकपूर्ण आचरण में निहित है। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की आरती से हुई। आरती की ये प्रस्तुति विजेंद्र वर्मा ,अध्यक्ष कलाकार संस्कृति एवं लोकहित समिति, उज्जैन के निदेशन में कलाकारों ने दी। अतिथि राजेश सिंह कुशवाहा वरिष्ठ कार्य परिषद सदस्य विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन, आदित्यनाम जोशी, देवकृष्ण व्यास, पंकज चांदोरकर अध्यक्ष महाराष्ट्रीय समाज ने कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान किया, जबकि संचालन राष्ट्रीय कवि दिनेश दिग्गज ने किया।


महाराज शोध पीठ, संस्कृति विभाग, मप्र शासन के तत्वावधान में कालिदास अकादमी के संकुल भवन में बुधवार सायं 7:30 बजे सौगंधिकाहरण की प्रस्तुति शुरू हुई। पौराणिक कथानक पर आधारित नाट्यकृति ‘सौगंधिकाहरण’ के कथासार में शक्ति और विनय के संतुलन का प्रभावी संदेश सामने आता है। कथा के अनुसार वनवास के दौरान पाण्डवों के आश्रम में वायु द्वारा लाया गया दिव्य सौगन्धिक पुष्प द्रौपदी को प्राप्त होता है। पुष्प की अलौकिक सुगंध से प्रभावित होकर द्रौपदी ऐसे और पुष्पों की इच्छा प्रकट करती हैं, जिसे पूर्ण करने के लिए भीम गन्धमादन वन की ओर प्रस्थान करते हैं। एकाग्र भाव से लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए भीम अपनी अपार शक्ति के कारण वन और पर्वतीय क्षेत्र में हलचल उत्पन्न कर देते हैं, जिससे वहाँ के जीव-जन्तु भयभीत हो उठते हैं। इसी क्रम में मार्ग में वृद्ध वानर रूप में उपस्थित हनुमान उनसे संवाद करते हैं और उन्हें संयम, विनय तथा धर्म का महत्व समझाते हैं। हनुमान की पूँछ हटाने में असफल रहने पर भीम का अहंकार दूर होता है और वे विनम्र होकर क्षमा याचना करते हैं। इसके पश्चात हनुमान अपने दिव्य स्वरूप का दर्शन कराकर भीम को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। अंततः कुबेर प्रकट होकर भीम की भक्ति और धर्मनिष्ठ उद्देश्य से प्रसन्न होकर उन्हें सौगन्धिक पुष्प प्रदान करते हैं। प्रस्तुति का मूल संदेश यही रहा कि वास्तविक पराक्रम वही है, जिसमें बल के साथ विनय, विवेक और आत्मसंयम का समन्वय हो।


‘अभंग नाद’ ने बांधा समां


लय और नवाचार के संगम को मंच पर साकार करने वाला ताल वाद्य समूह ताल फ्राय अपनी विशेष संगीतमय प्रस्तुति ‘अभंग नाद’ के साथ दर्शकों के बीच उपस्थित हुआ। भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपराओं से प्रेरित इस समूह ने पारंपरिक ताल-व्यवस्थाओं को समकालीन और प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत कर श्रोताओं के लिए एक अनूठा ध्वनि-अनुभव निर्मित किया। प्रस्तुति में तबला, मृदंगम, घटम, काजोन, ढोलक, वायलिन और बांसुरी जैसे विविध वाद्यों का समन्वित प्रयोग देखने को मिला। समूह ने कर्नाटक और हिंदुस्तानी संगीत की लय परंपराओं की गहराइयों को स्पर्श करते हुए पारंपरिक तत्वों को नए प्रयोगों के साथ प्रभावी ढंग से संयोजित किया। कार्यक्रम की विशेष अवधारणा “अभंग नाद” रही, जिसे एक आध्यात्मिक और ऊर्जावान संगीतमय यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके अंतर्गत महाराष्ट्र की समृद्ध अभंग परंपरा को मंच पर सजीव किया गया। भगवान विठ्ठल की स्तुति में रचित अभंगों को शास्त्रीय लय, प्रयोगधर्मी संयोजन और सजीव ताल-संवाद के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पारंपरिक भक्ति-भाव और समकालीन ध्वनियों के इस प्रभावी संगम ने श्रोताओं को भक्ति और लय के अद्वितीय अनुभव से जोड़ते हुए पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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