
उज्जैन| अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव में आज शाम उज्जैन की आयुर्धा शर्मा ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी| उन्होंने अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ राग शंकरा तीनताल में रचित जय महेश जटा-जुट.....श्री महाकालेश्वर भगवान की आराधना से किया| उनके कथक में ठाट, आमद, तोड़े-टुकड़े, परण, तिहाईयाँ, बंदिशे, शिव परण व शिवद्रुपद आदि ने दर्शकों का मन मोह लिया| अपनी प्रस्तुति का समापन उन्होंने सूल व तीनताल में निबद्ध शिव वंदना से किया|
अगली प्रस्तुति में अतुल शास्त्री के वायलिन वादन किया| अपनी में प्रस्तुति में अतुल ने राग बिहाग मे विलंबित एकताल किया| उन्होंने राग बिहाग तीनताल और राग काफी में होरी की प्रस्तुति भी दी|
श्रावण महोत्सव में एक और प्रस्तुति कुलदीप दुबे के कथक नृत्य की हुई| कुलदीप दुबे द्वारा एकल कथक का प्रारंभ बाबा महाकाल के प्राकट्य श्लोक अवंतिकायम विहितावतारम.... से हुआ | कथक के मूल अर्थ "कथा कहे सो कथिक कहावे को चरितार्थ करते हुए" राग शंकरा में दुबे द्वारा ही स्वर बद्ध रामचरितमानस के शिव विवाह से ली गई शिव श्रृंगार की चौपाइयों एवं डिमिक डिमिक डमरू कर बाजे प्रेम मगन नाचे भोला..... बंदिश की प्रस्तुति हुई| इसके बाद पारंपरिक कथक में विलंबित लय में उठान, आमद, परन आमद , डमरू की उठान, लड़ी, एवं मध्य और द्रुत लय में कथक के विभिन्न घरानों से ख़ासकर लखनऊ की प्रसिद्ध फ़रमाइशी परमेलु, गिनती की रचनाएँ, नटवरी के टुकड़े, विभिन्न जातियों के तोड़े परन आदि के पश्चात "श्री राम चरित मानस के विश्राम की चोपाई, दोहा, छंद राग भैरवी पर भक्ति एवं करुण रस भाव प्रस्तुति हुई, प्रस्तुति के अंतिम चरण में मयूरगत, पंचतत्व की छोटी रचनाओं एवं जुगलबंदी से समापन हुआ|

कार्यक्रम में अतिथि स्वरूप महापौर मुकेश टटवाल और आयुक्त नगर पालिक निगम रोशन कुमार सिंह उपस्थित थे| श्रावण महोत्सव में अगले शनिवार 19 अगस्त को श्रावण महोत्सव की सातवी संध्या में कोलकाता की सुश्री शायोनी चावडा के कथक, धार की सुश्री गुंजन जोशी के शास्त्रीय गायन एवं बैगलुरु की सुश्री अदिति गाँधी के कथक नृत्य की प्रस्तुति होगी।