
22 Aug 2023
जनता की नज़र में प्रशासन के दावें कोरी घोषणाओं जैसे लगे
उज्जैन(शुभम ताम्रकार)| नागचंद्रेश्वर दर्शन से एक दिन पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की और से पत्रकार वार्ता आयोजित कर कुछ सुलभ दर्शन व्यवस्था के दावे किये गए, जिनमे से अधिकतर दावे गलत साबित हुए|
प्रशासन का दावा
श्रद्धालुओं को 1 घंटे में नागचंद्रेश्वर के सुलभ दर्शन होंगे
हकीकत
सामान्य दर्शन व्यवस्था में लगभग 3 घंटे से अधिक का वक़्त लगा
प्रशासन का दावा
वाहन पार्किंग से मंदिर प्रवेश द्वार तक श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए निःशुल्क बस चालन की व्यवस्था
हकीकत
श्रद्धालुओं को इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रशांन्ति धाम, हरिफाटक आदि स्थानों से लेकर श्री नागचंद्रेश्वर प्रवेश द्वार (कर्कराज पार्किंग- लाल पुल) तक कुछ समय के लिए ही ये व्यवस्था मिलीं, उसके बाद श्रद्धालु पैदल ही चलते नज़र आये| वहीँ देर शाम इस व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन आया, प्राइवेट बस ऑपरेटर प्रेसिडेंट होटल के सामने से इन्दौर की सवारी भरने लगे|
प्रशासन के दावें और हकीकत में जमीन और असमान का फर्क नज़र आया| जहाँ एक ओर मंदिर जाने के लिए इ-रिक्शा मिलना तक मुश्किल हो रहा था वहीँ हरिफाटक ओवर ब्रिज तक इन्दौर की ओर जाने वाली प्राइवेट बसें आसानी से पहुँच रही थी|
पेयजल व्यवस्था
(प्रशासन का दावा)
आगंतुक श्रद्धालुओं को पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंदिर में प्रवेश हेतु निर्धारित द्वार से प्रति 200 मीटर पर पेयजल की व्यवस्था की गई । साथ ही पार्किंग स्थल पर पेयजल व्यवस्था हेतु श्रद्धालुओं की सुविधा अनुसार पीने के पानी के टैंकर खड़े किए गए।

हकीकत
एक बार कतार में लगने के बाद श्रद्धालुओं के लिए बीच में पानी पीने जाना संभव नहीं हो सका| 3 घंटे से अधिक समय तक कतार में लगने से बुजुगों, महिलाओं और बच्चों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा|
पत्रकार साथियों के लिए दर्शन व्यवस्था
दावा - नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए दोपहर 12:00 से 2:00 तक पत्रकारों के लिए सुलभ दर्शन व्यवस्था रहेगी|
हकीकत - समय के पूर्व निर्धारण के बावजूद मुख्य द्वार पर जिले से बाहर के अधिकारी ही मिले जिन्हें समय पूर्व तक कोई उचित आदेश नहीं दिया गया था| उज्जैन जिले के अधिकारियों ने तो फ़ोन उठाने से भी दूरी बना ली| अंत में लगभग 1 बजे बाद उज्जैन पुलिस के अधिकारी पहुँचे|
पत्रकारों को लिखित और मौखिक सूचना देने के बाद भी इस तरह की हरकत होना जिला और मंदिर प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है|
मंदिर से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक नागचंद्रेश्वर मंदिर पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत विनितगिरी के क्षेत्राधिकार में आता है| आज के दिन श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर दर्शन से होने वही आय का लगभग 75% पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा को दिया जाता है| यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है| जहाँ एक ओर आखाड़े से जुड़े सभी यजमान बिना किसी रोक टोक के विशेष द्वार के बिना रसीद कटाए सुलभ दर्शन करते हैं तो वहीँ दूसरी ओर 300 रूपये(बढ़ी हुई राशी जो पिछले वर्ष 250 रूपये थी और इस वर्ष महाकाल दर्शन 250/- से अधिक है) देने के बाद भी बाहर से आये दर्शनार्थी परेशान हो रहे हैं|
यहाँ एक बात विचारणीय है कि अचानक(बिना किसी पूर्व सूचना के) श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के शीघ्र दर्शन शुल्क में बढ़ोतरी क्यूँ करती है?
क्या शुल्क वृद्धि के पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों से विचार विमर्श किया गया?
क्या शुल्क वृद्धि व्यक्ति/संस्था विशेष को लाभ पहुँचने के लिए की गई है?
इस सवालों के जवाब मांगने पर नगर जनप्रतिनिधियों को तक सही उत्तर नहीं मिलते फिर पत्रकारों को तो सिर्फ गोल घुमाया जाता है| खैर सवाल तो और भी बनते है, देश में लोकतंत्र है और हम शहर के पत्रकार अब हम रोज पूछेंगे और जिम्मेदारों जवाब भी लेंगे|